'2029 के आम चुनावों में...', महिला आरक्षण बिल पास न होने पर पूर्व IPS किरण बेदी की प्रतिक्रिया
Nari Shakti Vandan Adhiniyam: महिला आरक्षण बिल दो तिहाई बहुमत हासिल न करने से गिर गया. इस बीच पूर्व आईपीएस अधिकारी और पुदुचेरी की पूर्व लेफ्टिनेंट गवर्नर किरण बेदी का बड़ा बयान सामने आया है.

महिला आरक्षण को लेकर देश की सियासत गरमाई हुई है. इस पर पक्ष-विपक्ष समेत सभी की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं. महिला आरक्षण संशोधन विधेयक शुक्रवार ( 17 अप्रैल) को लोकसभा में पेश किया गया. यह विधेयक दो तिहाई बहुमत साबित न होने के बाद गिर गया.
पिछले कई दिनों से इस पर चल रही सियासत के बीच पूर्व आईपीएस अधिकारी और पुदुचेरी की पूर्व लेफ्टिनेंट गवर्नर किरण बेदी का बड़ा बयान सामने आया है. उन्होंने कहा कि यह तभी संभव हो सकता है जब 2029 के आम चुनावों में दो तिहाई बहुमत वाली सरकार बने, जो उपरोक्त सभी कारकों के बीच सही संतुलन खोजने की दूरदर्शिता रखती हो. जो एक विकसित भारत के लिए एकजुट हो.
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एक्स पर ट्वीट कर किरण बेदी ने दी प्रतिक्रिया
पूर्व आईपीएस अधिकारी और पुडुचेरी की पूर्व लेफ्टिनेंट गवर्नर किरण बेदी ने ट्वीट में लिखा कि जनसंख्या, आर्थिक विकास, जनगणना और परिसीमन जैसी राजनीतिक जटिलताओं और साथ ही प्रतिबंधात्मक संवैधानिक प्रावधानों को देखते हुए मुझे 2029 से पहले संसद में महिलाओं के लिए एक तिहाई आरक्षण की कोई संभावना नहीं दिखती.
उन्होंने लिखा कि आज महिलाएं राष्ट्रीय विकास में हिस्सेदारी के लिए एक महत्वाकांक्षी वोट बैंक हैं. उनका कहना है कि महिलाएं चुनाव में एक निर्णायक शक्ति हैं. सिर्फ दिखावटी तौर पर उन्हें खुश करना काफी नहीं, अब वे भारत के भविष्य को संवारने में अपनी सीधी भूमिका चाहती.
किरण बेदी ने बिल पेश होने से पहले दी थी यह प्रतिक्रिया
किरण बेदी ने संसद में बिल गिरने से पहले प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि अगर संसद इस महिला आरक्षण बिल को पास करने में चूक जाती है, तो महिला मतदाता उन दलों का समर्थन कर सकती हैं जो 2029 की संसद और राज्य विधानसभाओं में एक-तिहाई महिला प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने का वादा करेंगे.
उनके अनुसार, आज की महिला मतदाता अब सिर्फ वादों से संतुष्ट नहीं होती, बल्कि वे ठोस बदलाव चाहती हैं. किरण बेदी का कहना है कि महिलाएं अब चुनावी राजनीति में एक निर्णायक शक्ति बन चुकी हैं. महिलाओं को केवल प्रतीकात्मक रूप से खुश करना काफी नहीं है, बल्कि उन्हें असली फैसले लेने की प्रक्रिया में शामिल करना जरूरी है. उनके अनुसार, देश के भविष्य को बेहतर बनाने के लिए महिलाओं की सीधी और सक्रिय भूमिका बेहद अहम है.
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Source: IOCL


























