महिला आरक्षण पर CM रेखा गुप्ता का विपक्ष पर हमला, कहा- 'कुर्सी जाने के डर से बिल गिरने पर...'
Women Reservation Bill: एबीपी न्यूज़ से बातचीत में CM रेखा गुप्ता ने महिला बिल पर विपक्ष को घेरा. उन्होंने कहा कि मठाधीशों को कुर्सी जाने का डर है, इसीलिए बिल गिरने पर उन्होंने तालियां बजाईं.

लोकसभा में 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' (महिला आरक्षण बिल) के पास न हो पाने पर दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने विपक्ष पर तीखा और करारा हमला बोला है. एबीपी न्यूज़ (ABP News) से खास बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इस बिल पर विपक्ष का रवैया पूरी तरह से महिला विरोधी है.
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि विपक्ष के राजनीतिक 'मठाधीशों' को यह डर सता रहा है कि यदि महिलाएं राजनीति में आगे आईं, तो उनकी कुर्सी छिन जाएगी और उनकी पुरानी राजनीति खत्म हो जाएगी.
'परिवारवाद से बाहर नहीं निकाल पाते महिला चेहरे'
सीएम रेखा गुप्ता ने विपक्षी दलों पर परिवारवाद की राजनीति करने का गंभीर आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि कुछ दलों में आम महिलाओं को आगे बढ़ाने की कोई इच्छा ही नहीं है. उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा, "कांग्रेस पार्टी में सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा के अलावा कोई बड़ा महिला चेहरा नजर नहीं आता. इसी तरह समाजवादी पार्टी (SP) में भी मुख्य तौर पर सिर्फ डिंपल यादव ही दिखाई देती हैं." उन्होंने कहा कि ये पार्टियां सिर्फ अपने परिवार की महिलाओं को आगे करती हैं, आम महिलाओं को मौका नहीं देतीं.
'बिल गिरने पर बजाईं तालियां, पीटीं मेजें'
मुख्यमंत्री ने संसद के घटनाक्रम का जिक्र करते हुए बड़ा दावा किया. उन्होंने कहा कि जब यह ऐतिहासिक बिल लोकसभा में गिरा, तो विपक्ष के कई नेता खुश नजर आ रहे थे. उन्होंने इसके जश्न में मेजें पीटीं और तालियां बजाईं. सीएम के अनुसार, विपक्ष का यह बर्ताव साफ दिखाता है कि वे एक मजबूत और स्वतंत्र महिला नेतृत्व के उभरने से खौफजदा हैं.
'वोट खिलाफ डालने वाले सांसदों को देना होगा जवाब'
रेखा गुप्ता ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि देश की महिलाएं अब पूरी तरह से जागरूक हो चुकी हैं. जिन सांसदों और नेताओं ने इस बिल के खिलाफ वोट किया है, उन्हें आगामी चुनावों में देश की महिलाओं के सामने जवाब देना पड़ेगा. महिलाएं ऐसे नेताओं को कड़ा सबक सिखाएंगी.
क्या है नारी शक्ति वंदन अधिनियम?
'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' का मुख्य उद्देश्य संसद (लोकसभा) और राज्य की विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देना है, ताकि नीति-निर्माण में उनकी भागीदारी बढ़ सके. लंबे समय से इस बिल की मांग हो रही है. विशेषज्ञों का मानना है कि इस कानून के लागू होने से राजनीति में महिलाओं का योगदान बढ़ेगा. वहीं, विपक्ष का तर्क है कि इस बिल में कुछ तकनीकी खामियां हैं (जैसे परिसीमन की शर्त), जिन्हें पहले ठीक करना जरूरी है. फिलहाल, यह मुद्दा देश भर में पूरी तरह से गरमा गया है और आने वाले चुनावों में यह एक बड़ा मुद्दा साबित होगा.
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Source: IOCL


























