विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियमों को लेकर देशभर में उठ रही नाराजगी के बीच बुधवार (28 जनवरी) को दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) में भी छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया. उत्तर परिसर में कला संकाय के पास करीब 50 छात्र इकट्ठा हुए और यूजीसी से इन नियमों को पूरी तरह वापस लेने की मांग की.

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नियम पक्षपातपूर्ण और विभाजनकारी

प्रदर्शन कर रहे छात्रों का कहना है कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (उच्च शिक्षा संस्थानों में समता के संवर्द्धन हेतु) विनियम, 2026 न सिर्फ अस्पष्ट हैं, बल्कि इनमें कई गंभीर खामियां भी हैं.

छात्रों ने इन नियमों को पक्षपातपूर्ण और विभाजनकारी बताते हुए आरोप लगाया कि यह व्यवस्था समता को बढ़ावा देने के बजाय परिसरों में नए तरह के भेदभाव को जन्म दे सकती है.

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प्रॉक्टर कार्यालय को सौंपा ज्ञापन

छात्रों ने अपनी मांगों को लेकर दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रॉक्टर कार्यालय को एक ज्ञापन सौंपा. ज्ञापन में कहा गया कि यूजीसी का यह नया ढांचा भेदभाव खत्म करने का दावा तो करता है, लेकिन हकीकत में यह छात्रों और शिक्षकों के बीच की दूरी को और बढ़ा सकता है.

छात्रों का कहना है कि नियमों की भाषा साफ नहीं है और इसे अलग-अलग तरीकों से लागू किया जा सकता है, जिससे मनमानी की गुंजाइश बढ़ जाती है.

संवेदनशीलता नहीं, मतभेद बढ़ेंगे

प्रदर्शन में शामिल छात्रों ने कहा कि नए नियमों से कैंपस में संवेदनशीलता और आपसी समझ बढ़ने की उम्मीद थी, लेकिन यह नियम उल्टा असर डाल सकते हैं. उनका मानना है कि इस तरह की नीतियां पहले से मौजूद सामाजिक और शैक्षणिक मतभेदों को और गहरा कर देंगी.

छात्रों ने मांग की कि यूजीसी किसी भी नए नियम को लागू करने से पहले छात्रों, शिक्षकों और विश्वविद्यालय प्रशासन से खुली बातचीत करे. उनका कहना है कि बिना जमीनी हकीकत समझे बनाए गए नियम शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के बजाय कमजोर करेंगे.

फिलहाल छात्रों ने साफ किया है कि अगर उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और तेज किया जा सकता है.