दिल्ली जल बोर्ड के एसीबी से जुड़े मामले सत्येंद्र जैन को न्यायिक हिरासत में भेजा गया. वहीं जमानत अर्जी पर 25 अगस्त को सुनवाई होगी. जमानत अर्जी पर राऊज एवेन्यू कोर्ट ने एसीबी को नोटिस जारी किया है. अदालत ने सत्येंद्र जैन की उस याचिका को भी खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने पुलिस द्वारा अपनी गिरफ्तारी को अवैध बताया था. इस मामले में एसीबी ने मंगलवार (18 अगस्त) को कुछ छह आरोपियों को गिरफ्तार किया था. इनमें से एक अंकित श्रीवास्तव को 2 दिन की पुलिस कस्टडी और सत्येंद्र जैन समेत बाकी पांच आरोपियों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया. 

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IAS उदित प्रकाश की याचिका पर कल होगी सुनवाई

दिल्ली जल बोर्ड के पूर्व CEO और IAS अधिकारी उदित प्रकाश राय की जमानत याचिका पर गुरुवार (20 अगस्त) को सुनवाई होगी. बता दें कि दिल्ली सरकार की एंटी करप्शन ब्रांच (ACB) ने दिल्ली जल बोर्ड के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) से जुड़े टेंडर में कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के मामले में इन छह आरोपियों को गिरफ्तार किया था.  

किन-किन लोगों को किया गया गिरफ्तार?

  • सत्येंद्र जैन, पूर्व मंत्री दिल्ली सरकार, आप नेता
  • दिल्ली जल बोर्ड के पूर्व CEO और IAS अधिकारी उदित प्रकाश राय,
  • दिल्ली जल बोर्ड के पूर्व कॉन्ट्रैक्चुअल कंसल्टेंट अंकित श्रीवास्तव, 
  • AN Enterprises के प्रोपराइटर नागेंद्र यादव, 
  • Euroteck Environment Pvt. Ltd. के मालिक राजा कुमार कुर्रा 
  • Srijanhar के प्रोपराइटर पंकज वर्मा

आपराधिक साजिश से जुड़ी धाराएं

ACB के मुताबिक, यह मामला FIR 11 मई 2024 को दर्ज की गई थी. इस केस में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं के साथ IPC की धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और आपराधिक साजिश से जुड़ी धाराएं लगाई गई हैं. एसीबी का आरोप है कि टेंडर की तकनीकी शर्तों और स्पेसिफिकेशन में इस तरह बदलाव किए गए, जिससे एक खास टेक्नोलॉजी प्रोवाइडर Euroteck Environment Pvt. Ltd. को फायदा पहुंचाया जा सके.

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ACB का दावा है कि प्रस्तावित पायलट स्टडी नहीं कराई गई और टेंडर में ऐसी तकनीकी शर्तें शामिल की गईं, जिनसे दूसरी कंपनियों के लिए प्रतिस्पर्धा सीमित हो गई. इसके अलावा टेंडर की शर्तों और तकनीकी स्पेसिफिकेशन में कथित तौर पर ऐसे बदलाव किए गए, जिनका सरकारी खजाने पर बड़ा वित्तीय असर पड़ा.

जांच एजेंसी के मुताबिक, इलेक्ट्रॉनिक सबूतों के विश्लेषण में निजी व्यक्तियों, सरकारी अधिकारियों और बिचौलियों के बीच बातचीत सामने आई.  आरोप है कि टेंडर की शर्तें, कॉरिजेंडम और अन्य दस्तावेज पहले आपस में साझा किए गए और बाद में इन्हीं को दिल्ली जल बोर्ड के टेंडर में शामिल किया गया. ACB का कहना है कि इससे निजी कंपनियों और सरकारी अधिकारियों के बीच कथित सांठगांठ और टेंडर प्रक्रिया को प्रभावित करने का संकेत मिलता है.