सत्य निकेतन हादसा: रेखा सरकार का पहला बड़ा एक्शन, MCD के 5 अधिकारी सस्पेंड, देखें पूरी लिस्ट
दिल्ली स्थित सत्य निकेतन में इमारत ढहने के मामले में पांच अधिकारी निलंबित किए गए हैं. नगर निगम के पांच अधिकारियों पर हादसे के 24 घंटे बाद पहली गाज गिरी है.

दिल्ली के सत्य निकेतन में इमारत गिरने के मामले में दिल्ली नगर निगम में बड़ी कार्रवाई हुई है. साउथ जोन के 5 अधिकारियों पर गाज गिरी है. MCD कमिश्नर के आदेश पर साउथ जोन के 5 अधिकारियों को सस्पेंड किया गया.
निलंबित अधिकारियों में डिप्टी कमिश्नर राकेश कुमार, SE रणवीर सिंह, EE (Building) ललित कुमार गोयल, AE (Building) सुनील चौहान, जूनियर इंजीनियर आशीष कुमार को निलंबति किया गया है.
आदेश में कहा गया कि सभी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई लंबित रहने तक निलंबन रहेगा. MCD Vigilance Department ने अलग-अलग सस्पेंशन ऑर्डर जारी किए हैं.
इस कार्रवाई के संदर्भ में मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से जारी एक बयान में कहा गया- सत्य निकेतन घटना के संबंध में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के निर्देशों के अनुसार, MCD के डिप्टी कमिश्नर, एग्जीक्यूटिव इंजीनियर, सुपरिटेंडिंग इंजीनियर, असिस्टेंट इंजीनियर और जूनियर इंजीनियर को सस्पेंड कर दिया गया है.
निलंबित अफसरों की क्या जिम्मेदारी थी?
बिल्डिंग डिपार्टमेंट का काम निर्माण की निगरानी और बिल्डिंग नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई करना होता है. अगर निर्माण बिना मंजूरी या अप्रूव्ड नक्शे के खिलाफ हो रहा था तो संबंधित अधिकारियों पर निगरानी न रखने का सवाल उठ सकता है. AE और JE आम तौर पर मौके की शुरुआती निगरानी से जुड़े होते हैं.
वहीं EE और SE के स्तर पर भी संबंधित क्षेत्र की निगरानी और कार्रवाई की जिम्मेदारी होती है. डिप्टी कमिश्नर जोन के प्रशासनिक स्तर पर जिम्मेदार अधिकारी होते हैं.
दिल्ली एमसीडी के कमिश्नर ने क्या कहा था?
इससे पहले सत्य निकेतन में इमारत गिरने की घटना पर दिल्ली नगर निगम (MCD) के कमिश्नर संजीव खिरवार ने कहा था, "दुर्भाग्य से, सात लोगों की जान चली गई है. हमें लगता है कि गिरी हुई इमारत के बगल वाली इमारत कमजोर हो गई है, और रात भर उसे मजबूत करने का काम किया गया. अगले 1-2 दिनों में हम उसे योजनाबद्ध तरीके से गिराने का काम करेंगे.
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खिरवार ने कहा कि इमारत के मालिक से जुड़े दस्तावेज प्रॉपर्टी टैक्स के रिकॉर्ड से मिले हैं. मालिक ने पिछले साल प्रॉपर्टी टैक्स भरा था और 2007 में कन्वर्जन चार्ज भी दिया था. पुलिस मालिक का पता लगाने की कोशिश कर रही है. यह इमारत 1970 के दशक में बनी थी.
खिरवार ने कहा, 1970 के दशक की इस इमारत को कभी कोई नोटिस नहीं दिया गया और न ही इसे सील किया गया. इस इमारत के बारे में कोई शिकायत भी नहीं मिली थी.





















