दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार (6 अक्टूबर) को 5 मंजिला इमारत ढहने से हुए दर्दनाक हादसे के बाद सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं. हादसे में कई लोगों की जान चली गई, जबकि कई लोग घायल हुए और कुछ लोग मलबे में फंस गए. इस घटना को लेकर CJP के सह-संयोजक आशुतोष रांका ने सरकार पर हमला बोला है. उन्होंने देश के शहरी प्रशासन की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े किए.
उन्होंने कहा, "भरभराकर गिरती इमारतें, जर्जर बुनियादी ढांचा, टूटी सड़कें. प्रदूषित हवा, जाम पड़े सीवर, न धन है और न ही राजनीतिक या नौकरशाही स्तर पर कोई जवाबदेही. भारत में शहरी प्रशासन पूरी तरह एक भयावह स्थिति में पहुंच चुका है. अब समय आ गया है कि हम इस मुद्दे पर गंभीरता से बात करना शुरू करें."
प्रधानमंत्री की चुप्पी पर भी सवाल
वहीं, कॉकरोच जनता पार्टी के सह-संयोजक सौरव दास ने सत्य निकेतन हादसे को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि हादसे से दो दिन पहले दिल्ली विश्वविद्यालय के एक कॉलेज में प्रधानमंत्री के लिए पूरा PR अभियान आयोजित किया गया था, लेकिन हादसे के बाद प्रधानमंत्री की ओर से कोई बयान नहीं आया.
सौरव दास ने कहा, "महज दो दिन पहले दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) के एक कॉलेज में प्रधानमंत्री के लिए पूरा PR अभियान आयोजित किया गया था. आज DU के छात्र मारे गए हैं, कई गंभीर रूप से घायल हैं और सत्य निकेतन की भयावह इमारत के मलबे के नीचे फंसे हुए हैं. और प्रधानमंत्री की ओर से एक भी शब्द नहीं."
'दिमागी नक्सली' वाले बयान का भी जिक्र
सौरव दास ने प्रधानमंत्री के उस बयान का भी जिक्र किया, जिसमें सवाल करने वाले युवाओं को 'दिमागी नक्सली' कहा गया था. उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री के पास एक बार फिर सवाल करने वाले युवाओं को दिमागी नक्सली कहने के लिए शब्द थे. एक ऐसी पीढ़ी को बदनाम करने के लिए शब्द थे, जो विरोध करती है, सवाल पूछती है और जवाबदेही की मांग करती है. लेकिन मलबे के नीचे दबी युवा जिंदगियों के लिए एक शब्द भी नहीं."
उन्होंने आगे कहा, "छात्र फिर सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन कर रहे हैं, क्योंकि सत्ता में बैठे लोग, आपकी तरह, उन्हें ऐसी स्थिति में पहुंचने के लिए मजबूर करते हैं. और फिर आप उन्हें नक्सली कहते हैं. सत्ता में बैठे इन लोगों को उन युवाओं की जरा भी परवाह नहीं है, जिन्हें मजबूर होकर कॉकरोच की तरह रहने को मजबूर किया जाता है."
उन्होंने अपनी बात रखते हुए कहा, "हिंदू-मुस्लिम. मंदिर-मस्जिद. मेरी Gen Z बनाम तुम्हारी Gen Z.”
परिवारों के लिए प्रार्थना और जवाबदेही की मांग
सौरव दास ने कहा कि सत्ता की राजनीति के बीच युवाओं की जान जा रही है और इस पर गंभीरता से सवाल होना चाहिए. उन्होंने कहा, "यही उनकी राजनीति है और यह कभी नहीं रुकती, चाहे कितने ही युवा भारतीय इसकी कीमत अपनी जान देकर चुकाते रहें. एक दिन बीत चुका है. उन छात्रों के लिए कोई शब्द क्यों नहीं, जिन्होंने अपनी जान गंवा दी? क्या उनके परिवारों के लिए एक प्रार्थना तक नहीं? क्या यह आश्वासन नहीं कि मलबे में फंसे हर छात्र को बचाया जाएगा और हर जीवित बचे व्यक्ति की देखभाल की जाएगी?"
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'जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह क्यों नहीं ठहराया जाए?'
उन्होंने आगे सवाल उठाते हुए कहा, "क्या यह आश्वासन नहीं कि इस त्रासदी के लिए जिम्मेदार हर अधिकारी और राजनीतिक व्यक्ति को जवाबदेह ठहराया जाएगा? जब कनाडा या अमेरिका में स्कूल या कॉलेज में गोलीबारी जैसी कोई दुखद घटना होती है, तो भारत के प्रधानमंत्री सबसे पहले बयान जारी करने वाले नेताओं में शामिल होते हैं. फिर अपने ही छात्रों से यह दूरी क्यों, सर?"
उन्होंने आखिर में कहा, "एक नागरिक को अपने प्रधानमंत्री से कम से कम इतनी उम्मीद तो होनी ही चाहिए. लेकिन लगता है, इतना मांगना भी बहुत ज्यादा हो गया है. यह कैसी शर्मनाक स्थिति है."
