भयावह साकेत इमारत हादसा: छात्रों को बचाने अंदर गईं कैंटीन ओनर पार्वती ओझा, मलबे में दबकर गई जान
Saket Building Collapse: कई छात्र कैंटीन की मालकिन पार्वती ओझा की तलाश में मलबे के पास लौटे. पार्वती ओझा अन्य छात्रों को चेतावनी देने के लिए वापस गई थीं, लेकिन बाद में मलबे में दबकर उनकी मृत्यु हो गई.

दिल्ली के साकेत में इमारत ढहने का खौफनाक मंजर जिसने भी देखा, वह शायद अपनी पूरी जिंदगी इसे कभी भुला नहीं पाएगा. एक पल पहले छात्र वहां रात का खाना खा रहे थे, नोट्स दोहरा रहे थे और आगे के एग्जाम की चर्चा कर रहे थे. दूसरे ही पल तेज गर्जन के साथ पूरी इमारज ढह गई और वही छात्र अपनी जान बचाने के लिए भागने लगे. पूरे इलाके में धूल का गुबार छा गया.
दरअसल, शनिवार (30 मार्च) की शाम करीब 7:44 बजे साकेत मेट्रो स्टेशन के पास पांच मंजिला कमर्शियल बिल्डिंग भरभरा कर गिर गई. इस भयावह हादसे में बचे छात्रों और कार्यालय कर्मचारियों के लिए, वह मंजर उनके दिमाग में हमेशा के लिए दाग कर गया है.
अधिकारियों ने बताया कि इस हादसे में 6 लोगों की मौत हुई है और कई घायल हैं, जिन्हें अस्पातल में भर्ती कराया गया है. बचाव अभियान रविवार को भी जारी रहा. इमारत से सटी कैंटीन के पास मौजूद छात्र रोनित ने कहा, “ऐसा लगा जैसे पूरा इलाका अचानक गायब हो गया हो. मैंने इमारत का एक हिस्सा गिरते हुए देखा और समझ गया कि ढांचा ढहने ही वाला है. एक जोरदार आवाज हुई और देखते ही देखते चारों ओर धूल ही धूल हो गई. हम देख नहीं पा रहे थे कि कौन कहां खड़ा है. लोग चीखते-चिल्लाते इधर-उधर भाग रहे थे.”
चाय नाश्ते के लिए कैंटीन में इकट्ठा होते थे कई छात्र
सैद-उल-अजैब क्षेत्र के वेस्टएंड मार्ग पर स्थित इमारत में कोचिंग संस्थान, कैफे, कार्यालय आदि थे. ढही हुई इमारत के बगल में एक छोटी कैंटीन थी, जहां विदेशी मेडिकल स्नातक, नीट और गेट जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्र अक्सर आते थे. इनमें से कई छात्र पास के ही पेइंग गेस्ट आवासों में रहते हैं और भोजन और चाय के लिए कैंटीन में इकट्ठा होने से पहले लाइब्रेरी और कोचिंग सेंटर्स में लंबा समय बिताते हैं.
जब इमारत गिरी, तो उसका मलबा टिन की छत वाली कैंटीन पर जा गिरा, जिससे कई लोग उसके नीचे दब गए. कैंटीन में नियमित रूप से आने वाले ऋषभ ने कहा, “हमने अजीब सी आवाज सुनी और फिर अचानक अफरा-तफरी मच गई. कुछ लोग भागने की कोशिश में गिर पड़े, जबकि अन्य अपने दोस्तों को पुकार रहे थे. मेरी आंखें जल रही थीं, और लोग खड़े होने के लिए सुरक्षित जगह ढूंढने की कोशिश कर रहे थे.”
बच्चों को आगाह करने अंदर दौड़ी थीं पार्वती ओझा
इसके बाद का मंजर भी उतना ही भयावह था. बच निकलने वाले छात्र अपने सहपाठियों, सहकर्मियों और कैंटीन की मालकिन पार्वती ओझा की तलाश में मलबे के पास लौटे. पार्वती ओझा कथित तौर पर छात्रों को चेतावनी देने के लिए वापस गई थीं, लेकिन बाद में मलबे में दबकर उनकी मृत्यु हो गई.
ऋषभ ने कहा, “लोग एक-दूसरे का नाम पुकार रहे थे और यह देखने के लिए फोन चेक कर रहे थे कि कौन सुरक्षित है.” जीवित बचे लोगों में आशुतोष भी शामिल हैं. उन्होंने शुरू में सोचा कि कंपन सामान्य बात है. उन्होंने कहा, “पास में एक मेट्रो स्टेशन है, और हम अक्सर इस इलाके में हल्के झटके महसूस करते हैं.” उन्होंने कहा, “जब कैंटीन की इमारत हिलने लगी, तो हममें से कई लोगों ने इस पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया लेकिन कुछ ही क्षणों में कंपन तेज हो गया और फिर सब कुछ ढह गया.”
मलबे की चपेट में आने से आशुतोष के पैर और कंधे में चोटें आईं. उन्होंने बताया, “मैंने दूर हटने की कोशिश की, लेकिन कंक्रीट के कुछ टुकड़े मेरे ऊपर गिरे. फिर रेंगते हुए मैं किसी तरह बाहर निकल पाया.”

























