दिल्ली के सदर बाजार के व्यापारियों ने बाजार की वर्षों पुरानी समस्याओं के समाधान के लिए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को पत्र लिखा है. व्यापारियों का कहना है कि एशिया के सबसे बड़े थोक बाजारों में शामिल सदर बाजार लंबे समय से बुनियादी सुविधाओं की कमी और प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार है.
इसी को लेकर फेडरेशन ऑफ सदर बाजार ट्रेड्स एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश कुमार यादव ने मुख्यमंत्री से मुलाकात का समय मांगा है, ताकि बाजार की वास्तविक स्थिति और व्यापारियों की परेशानियों से उन्हें सीधे अवगत कराया जा सके.
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व्यापारियों द्वारा भेजे गए पत्र में जलभराव की समस्या को सबसे गंभीर बताया गया है. उनका कहना है कि हर मानसून में बाजार की कई सड़कें, गलियां और दुकानें 8 से 9 फीट तक पानी में डूब जाती हैं. इससे दुकानों में रखा करोड़ों रुपये का सामान खराब हो जाता है और कई दिनों तक कारोबार ठप पड़ जाता है.
व्यापारियों का कहना है कि यह समस्या नई नहीं है, लेकिन वर्षों से इसके स्थायी समाधान की दिशा में कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया है. हर साल बारिश के मौसम में वही हालात दोहराए जाते हैं.
आग की घटनाओं पर जताई चिंता
पत्र में बाजार में बार-बार होने वाली आग की घटनाओं का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया है. व्यापारियों का आरोप है कि पुरानी बिजली व्यवस्था और खुले बिजली के तार आग लगने की बड़ी वजह हैं.
उन्होंने सरकार से पूरे बाजार में बिजली के तारों को चरणबद्ध तरीके से भूमिगत करने और एक व्यापक अग्नि सुरक्षा योजना लागू करने की मांग की है. व्यापारियों का कहना है कि यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में बड़े हादसे हो सकते हैं.
मेट्रो निर्माण और जाम से बढ़ी मुश्किलें
व्यापारियों ने मेट्रो निर्माण कार्य में हो रही देरी को भी चिंता का विषय बताया है. उनका कहना है कि लंबे समय से चल रहे निर्माण कार्य के कारण कारोबार प्रभावित हो रहा है. साथ ही बाजार में आने-जाने वाले लोगों को भी काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.
इसके अलावा संकरी गलियां, पार्किंग की कमी, बढ़ते अतिक्रमण और अवैध रेहड़ी-पटरी के कारण बाजार में दिनभर जाम की स्थिति बनी रहती है. इससे व्यापारिक गतिविधियों के साथ-साथ आम लोगों की आवाजाही भी प्रभावित होती है.
अवैध वेंडिंग और माफिया का आरोप
व्यापारियों ने अपने पत्र में दावा किया है कि सदर बाजार में 15 हजार से अधिक अवैध वेंडिंग प्वाइंट संचालित हो रहे हैं. उनका आरोप है कि इसके पीछे संगठित "स्ट्रीट वेंडिंग माफिया" सक्रिय है.
व्यापारियों के मुताबिक अवैध कब्जों की वजह से यातायात व्यवस्था बिगड़ रही है, स्वच्छता प्रभावित हो रही है और आपातकालीन सेवाओं को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. उन्होंने आरोप लगाया कि अदालतों के निर्देशों के बावजूद इस समस्या पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही है.
पुनर्विकास और मास्टर प्लान की मांग
व्यापारियों का कहना है कि दिल्ली के अन्य प्रमुख बाजारों में विकास और सौंदर्यीकरण के काम किए जा रहे हैं, जबकि सदर बाजार खुद को उपेक्षित महसूस कर रहा है. उन्होंने मुख्यमंत्री से बाजार के पुनर्विकास और आधुनिकीकरण के लिए विशेष मास्टर प्लान तैयार करने की मांग की है.
साथ ही व्यापारिक संगठनों के प्रतिनिधिमंडल को मुलाकात का समय देने का अनुरोध भी किया गया है. व्यापारियों का कहना है कि सदर बाजार से जुड़े लाखों व्यापारी, कर्मचारी, मजदूर और उनके परिवार इस मुलाकात से सकारात्मक समाधान की उम्मीद लगाए हुए हैं.
उनका मानना है कि यदि सरकार गंभीरता से पहल करे तो वर्षों पुरानी समस्याओं का स्थायी समाधान निकाला जा सकता है.
