DU से की पढ़ाई, 2024 में मिला प्रमोशन, जानें- कौन हैं आबकारी नीति मामले में फैसला देने वाले जज जितेंद्र सिंह?
Delhi Excise Case Verdict: अदालत ने आबकारी नीति में किसी व्यापक साजिश या आपराधिक इरादे के अभाव पर जोर देते हुए कहा कि संघीय एजेंसी का मामला न्यायिक जांच में खरा नहीं उतरता.

दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को बड़ी राहत देते हुए अदालत ने दोनों नेताओं और 21 अन्य को कथित शराब नीति घोटाला मामले में शुक्रवार को बरी कर दिया और उनके खिलाफ केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के आरोपपत्र पर संज्ञान लेने से इनकार कर दिया.
राउज एवेन्यू कोर्ट में जज जितेंद्र सिंह ने यह फैसला दिया. आइए आपको बताते हैं कि जज जितेंद्र कौन हैं और किस पद पर आसीन हैं. जज जितेंद्र सिंह दिल्ली न्यायिक सेवा के एक वरिष्ठ न्यायिक अधिकारी हैं. वर्तमान में वे नई दिल्ली स्थित राउज एवेन्यू कोर्ट में विशेष न्यायाधीश (पीसी एक्ट) सीबीआई-01 के पद पर तैनात हैं. वह मुख्य रूप से केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत जांच किए गए भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की सुनवाई करते हैं. उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से विधि की पढ़ाई की है और अक्टूबर 2024 में उन्हें अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत किया गया था.
राउज एवेन्यू कोर्ट के जज जितेंद्र सिंह ने क्या कहा?
इस मामले में बरी किए गए 21 अन्य आरोपियों में तेलंगाना जागृति की अध्यक्ष के. कविता भी शामिल हैं. विशेष न्यायाधीश जितेंद्र सिंह ने जांच में हुई चूक के लिए सीबीआई पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि केजरीवाल के खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं थे, जबकि सिसोदिया के खिलाफ प्रथम दृष्टया कोई मामला नहीं बनता था. सीबीआई आम आदमी पार्टी (आप) की पूर्ववर्ती सरकार द्वारा अब रद्द की जा चुकी आबकारी नीति के निर्माण और कार्यान्वयन में कथित भ्रष्टाचार की जांच कर रही है.
न्यायाधीश ने ‘कुछ भ्रामक कथनों’ पर जोर दिया और कड़े शब्दों में कहा कि विस्तृत आरोपपत्र में कई कमियां हैं जिनकी पुष्टि सबूतों या गवाहों से नहीं होती है. न्यायाधीश सिंह ने कहा, ‘आरोपपत्र में आंतरिक विरोधाभास हैं, जो साजिश की थ्योरी की जड़ पर प्रहार करते हैं.’ उन्होंने कहा कि किसी भी सबूत के अभाव में केजरीवाल के खिलाफ लगाए गए आरोप टिक नहीं सकते और पूर्व मुख्यमंत्री को बिना किसी ठोस सबूत के फंसाया गया है. न्यायाधीश ने कहा कि यह कानून के शासन के प्रतिकूल था. सिसोदिया के संबंध में न्यायाधीश ने कहा कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई सबूत नहीं है जो उनकी संलिप्तता को दर्शाता हो और न ही उनसे कोई बरामदगी की गई है.
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