लाल किले पर स्वतंत्रता दिवस समारोह इस बार सिर्फ देशभक्ति के रंग में नहीं रंगेगा, बल्कि सुरक्षा के लिहाज से भी राजधानी का सबसे हाईटेक आयोजन बनने जा रहा है. 15 अगस्त को होने वाले 80वें स्वतंत्रता दिवस समारोह के मद्देनजर दिल्ली में 20 हजार से अधिक सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की जा रही है. लाल किले और आसपास के इलाकों पर एक हजार से अधिक CCTV कैमरों, फेस रिकग्निशन सिस्टम, स्वचालित नंबर प्लेट पहचान तकनीक और ड्रोन डिटेक्शन सिस्टम से नजर रखी जाएगी. खास बात यह है कि पुलिस संदिग्धों की पहचान के लिए अभिज्ञान एप का इस्तेमाल करेगी, जो फिंगरप्रिंट स्कैन कर महज 35 सेकंड में पुराने आपराधिक रिकॉर्ड की जानकारी दे सकता है.
लाल किला धमाके के बाद सुरक्षा का नया स्तर
हाल के जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा और पिछले वर्ष 10 नवंबर को लाल किले के पास हुए आतंकी धमाके के मद्देनजर सुरक्षा एजेंसियों ने इस बार किसी भी तरह की चूक की गुंजाइश नहीं छोड़ने की तैयारी की है. समारोह स्थल के साथ-साथ आसपास के संवेदनशील इलाकों में भी सुरक्षा का घेरा मजबूत किया जा रहा है.
स्वतंत्रता दिवस समारोह की सुरक्षा के लिए 20 हजार से अधिक सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया जा रहा है. जमीनी स्तर पर तैनाती के साथ CCTV, ड्रोन डिटेक्शन सिस्टम और चेहरे की पहचान करने वाली तकनीक के जरिए लाल किले और आसपास के इलाकों की लगातार निगरानी होगी. लाल किले के आसपास लगे एक हजार से अधिक CCTV कैमरे सुरक्षा व्यवस्था की अहम कड़ी होंगे.
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पांच पार्किंग क्षेत्रों में वाहनों की अंडर-बॉडी जांच
लाल किले के पांच पार्किंग क्षेत्रों में अंडर-व्हीकल सर्विलांस सिस्टम यानी UVSS लगाया जाएगा. इसके जरिए वाहनों के नीचे की तरफ की जांच की जाएगी, ताकि विस्फोटक, हथियार या कोई प्रतिबंधित वस्तु छिपाकर ले जाने की कोशिश का पता लगाया जा सके. कैमरों और स्कैनर से लैस यह सिस्टम संवेदनशील स्थानों और सुरक्षा चौकियों पर किसी भी संदिग्ध गतिविधि या विसंगति को पकड़ने में मदद करेगा.
सुरक्षा व्यवस्था केवल संदिग्ध वस्तुओं और वाहनों तक सीमित नहीं रहेगी. भीड़ की संख्या पर नजर रखने के लिए हेडकाउंट कैमरों का इस्तेमाल किया जाएगा. इसके अलावा पुलिसकर्मियों की गतिविधियों और मौके की स्थिति को रिकॉर्ड करने के लिए 200 से अधिक बॉडी वार्न कैमरे भी तैनात किए जाएंगे.
सादे कपड़ों में पुलिसकर्मी, रात में भी बढ़ेगी निगरानी
समारोह स्थल और आसपास ऐसे उपकरण भी लगाए जा रहे हैं, जो लावारिस या संदिग्ध वस्तुओं की पहचान करने में मदद करेंगे. प्रतिबंधित क्षेत्रों में किसी तरह की घुसपैठ रोकने के लिए विशेष कैमरों से निगरानी की जाएगी. लाल किले के आसपास मौजूद ऊंची इमारतों पर स्नाइपर और छतों पर निगरानी दल तैनात रहेंगे. निर्धारित प्रतिबंधित क्षेत्रों में प्रवेश और आवाजाही को एंट्री कंट्रोल सिस्टम के जरिए नियंत्रित किया जाएगा.
सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सादे कपड़ों में निगरानी दल भी तैनात किए जा रहे हैं. पुलिस की ओर से कई सुरक्षा अभ्यास, रात में गश्त और अतिरिक्त पैदल गश्त की जाएगी. खासतौर पर संवेदनशील इलाकों में जमीनी स्तर पर पुलिस की मौजूदगी बढ़ाई जाएगी.
सोशल मीडिया पर भी साइबर टीम की पैनी नजर
स्वतंत्रता दिवस से पहले सुरक्षा एजेंसियों ने डिजिटल मोर्चा भी सक्रिय कर दिया है. पुलिस की साइबर इकाइयां इंटरनेट मीडिया प्लेटफॉर्म पर संभावित ऑनलाइन खतरों, शांति भंग करने वाली गतिविधियों और गलत सूचना फैलाने वालों पर नजर रखेंगी. किसी भी ऐसे खतरे का पता चलने पर समय रहते कार्रवाई की जाएगी.
सुरक्षा कारणों से पुलिस आयुक्त ने 2 अगस्त से 16 अगस्त तक दिल्ली के आसमान में पैराग्लाइडर, हैंग-ग्लाइडर, UAV, ड्रोन, हॉट एयर बैलून और अन्य रिमोट से संचालित विमानों जैसे उप-पारंपरिक हवाई प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाया है. आशंका है कि असामाजिक तत्व या आतंकी संगठन इनका इस्तेमाल पैरा-जंपिंग या हवाई हमले जैसी गतिविधियों के लिए कर सकते हैं. इससे स्वतंत्रता दिवस समारोह, VIP सुरक्षा और महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों के लिए गंभीर खतरा पैदा हो सकता है.
बाजार से मेट्रो स्टेशन तक पैदल गश्त का आदेश
सभी जिला पुलिस इकाइयों को बाजारों, मेट्रो स्टेशनों, बस टर्मिनलों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर पैदल गश्त बढ़ाने का निर्देश दिया गया है. वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को खुद मैदान में मौजूद रहकर सुरक्षा इंतजामों की समीक्षा करने को कहा गया है. अलग-अलग जिलों में औचक निरीक्षण और फ्लैग मार्च भी किए जाएंगे, ताकि आम लोगों में सुरक्षा का भरोसा बढ़े और उपद्रवियों को स्पष्ट संदेश मिले.
इस बार सुरक्षा व्यवस्था में अभिज्ञान एप को भी अहम भूमिका दी गई है. किसी संदिग्ध व्यक्ति को हिरासत में लेने के बाद पुलिस मौके पर ही उसके फिंगरप्रिंट को मोबाइल एप के जरिए स्कैन कर सकेगी. एप राष्ट्रीय डेटाबेस से जुड़ा होगा और करीब 35 सेकंड में यह जानकारी उपलब्ध करा सकता है कि संबंधित व्यक्ति का कोई पुराना आपराधिक रिकॉर्ड है या नहीं.पहले संदिग्धों के फिंगरप्रिंट की जांच के लिए उन्हें फोरेंसिक लैब भेजना पड़ता था, जिससे प्रक्रिया पूरी होने में कई दिन या कभी-कभी सप्ताह तक लग जाते थे. अभिज्ञान एप के इस्तेमाल से इस प्रक्रिया को मौके पर ही काफी तेजी से पूरा करने की तैयारी है.
इस बार लाल किले पर बदलेगा वंदे मातरम् का अंदाज
80वें स्वतंत्रता दिवस समारोह की थीम 'वंदे मातरम्' रखी गई है. लाल किले के मुख्य द्वार पर बड़े अक्षरों में 'वंदे मातरम्' लिखा जाएगा. इस बार समारोह में राष्ट्रगीत को विशेष स्थान दिया गया है और पहली बार लाल किला परिसर में वंदे मातरम् के सभी छह छंदों का गायन होगा. अब तक आम तौर पर इसके शुरुआती दो छंद ही गाए जाते रहे हैं.
देश इस समय वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ भी मना रहा है. गृह मंत्रालय की ओर से इससे संबंधित दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं. इनके मुताबिक सरकारी आयोजनों में राष्ट्रगान से पहले राष्ट्रगीत के सभी छह छंद बजाए जाएंगे और इस दौरान मौजूद लोगों को सावधान की मुद्रा में खड़ा होना होगा.लाल किले में होने वाले स्वतंत्रता दिवस समारोह में अब तक प्रधानमंत्री के ध्वजारोहण के बाद आम तौर पर राष्ट्रगान होता था. इस बार ध्वजारोहण के बाद पहले राष्ट्रगीत गाया जाएगा.
बारिश हुई तो पानी नहीं बनने देगा हाई-कैपेसिटी पंप सिस्टम
स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान बारिश की स्थिति को देखते हुए जलभराव से निपटने के लिए भी विशेष इंतजाम किए गए हैं. लाल किला परिसर और आसपास के क्षेत्रों में उच्च क्षमता वाले बड़े पंप लगाए गए हैं. संबंधित एजेंसियों को अलर्ट मोड पर रखा गया है, ताकि बारिश के कारण कहीं पानी जमा होने पर उसे तत्काल बाहर निकाला जा सके.
इस बार समारोह में दर्शकों के लिए बनाए जा रहे बैठने के क्षेत्रों को भी अलग पहचान दी जा रही है. दर्शक दीर्घा के अलग-अलग सेक्टरों के नाम देश की प्रमुख नदियों के नाम पर रखे गए हैं. इनमें गंगा, यमुना, गोदावरी और कावेरी जैसी नदियां शामिल हैं. इससे समारोह स्थल को एक खास सांस्कृतिक और आध्यात्मिक स्वरूप देने की कोशिश की जा रही है.
फोल्डिंग हाइड्रोलिक कुर्सियों की भी व्यवस्था
दर्शकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए इस बार दर्शक दीर्घा में फोल्डिंग हाइड्रोलिक कुर्सियां लगाई जा रही हैं. यानी सुरक्षा और तकनीक के साथ इस बार स्वतंत्रता दिवस समारोह में व्यवस्थाओं, प्रस्तुति और दर्शकों की सुविधा के स्तर पर भी कई बदलाव देखने को मिलेंगे.
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