Parliament Security Breach Case: संसद भवन में 2023 में हुए सनसनीखेज सुरक्षा उल्लंघन मामले में एक नया मोड़ आया है. इस मामले की आरोपी नीलम आजाद की जमानत याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट में अहम सुनवाई हुई, जहां जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद और जस्टिस हरीश वैद्यनाथन शंकर की बेंच ने दिल्ली पुलिस से कड़े सवाल किए.

कोर्ट ने पूछा कि क्या इस मामले में गैरकानूनी गतिविधियां (निवारण) अधिनियम (UAPA) जैसे सख्त कानून की बजाय अन्य कानूनों के तहत कार्रवाई नहीं की जा सकती थी. यह सवाल तब उठा जब फॉरेंसिक लैब की रिपोर्ट में सामने आया कि आरोपियों द्वारा इस्तेमाल किए गए धुएं के कनस्तर जहरीले नहीं थे. कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि संसद जैसे महत्वपूर्ण स्थान पर इस तरह की हरकत बिल्कुल अस्वीकार्य है, लेकिन क्या यह UAPA जैसे कठोर कानून को लागू करने का मामला है.  दिल्ली पुलिस की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा से कोर्ट ने कहा कि रिपोर्ट साफ कहती है कि इन कनस्तरों में कोई धातु नहीं थी, इसलिए वे मेटल डिटेक्टर से बच गए. ये वही कनस्तर हैं जो होली, IPL या अन्य समारोहों में रंगीन धुआं छोड़ने के लिए इस्तेमाल होते हैं. ये अमेजन पर बिकने वाले जहरीले कनस्तरों जैसे नहीं हैं. हम यह नहीं कह रहे कि आरोपियों ने जो किया वह सही था. संसद वह जगह है जहां देश के कानून बनते हैं, वहां इस तरह की हरकत विरोध नहीं, बल्कि गंभीर व्यवधान है. लेकिन सवाल यह है कि क्या यह UAPA की धारा 18 के तहत अपराध है.

दिल्ली HC ने कहा- संसद हमारे देश का गौरव 

जस्टिस प्रसाद ने आगे कहा कोई भी संसद में मजाक या विरोध के नाम पर हंगामा नहीं कर सकता. यह देश का गौरव है. लेकिन अगर UAPA का अपराध नहीं बनता, तो आरोपियों की स्वतंत्रता को इतने लंबे समय तक प्रतिबंधित करना ठीक नहीं. मुकदमा चल सकता है, लेकिन क्या अन्य कानूनों के तहत कार्रवाई संभव थी.

क्या था संसद सुरक्षा उल्लंघन का मामला ?

यह घटना 13 दिसंबर, 2023 को हुई, जब देश 2001 के संसद आतंकी हमले की बरसी मना रहा था. उस दिन जीरो आवर के दौरान संसद में अचानक हंगामा मच गया. दो आरोपी लोकसभा कक्ष में दर्शक दीर्घा से कूद गए और धुएं के कनस्तर खोल दिए, जिनसे पीली गैस निकली. उसी समय, संसद परिसर के बाहर नीलम आजाद और अमोल शिंदे ने रंगीन गैसों के कनस्तर छोड़े और नारा लगाया तानाशाही नहीं चलेगी.

इस घटना ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया. दिल्ली पुलिस की विशेष सेल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए छह आरोपियों को गिरफ्तार किया और उनके खिलाफ UAPA के साथ-साथ भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया.  

पिछली सुनवाई में भी उठा था यह मुद्दा 

पिछली सुनवाई में भी UAPA का मुद्दा उठा था. इससे पहले की सुनवाई में भी कोर्ट ने अभियोजन पक्ष से पूछा था कि क्या गैर-घातक धुएं के कनस्तरों का इस्तेमाल UAPA जैसे सख्त कानून के दायरे में आता है. बुधवार की सुनवाई में यह सवाल फिर से केंद्र में रहा. कोर्ट ने साफ किया कि संसद देश की शान है और वहां किसी भी तरह की गड़बड़ी को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता. लेकिन UAPA के इस्तेमाल पर सवाल उठाते हुए कोर्ट ने कहा कि अगर यह अपराध UAPA के तहत नहीं बनता, तो अन्य कानूनों के तहत कार्रवाई की संभावना तलाशी जानी चाहिए.  

अगली सुनवाई 19 मई को

कोर्ट ने इस मामले को अगली सुनवाई के लिए 19 मई, 2025 को सूचीबद्ध किया है. नीलम आजाद की जमानत याचिका का फैसला न केवल इस मामले के लिए महत्वपूर्ण होगा, UAPA के मामले दिल्ली पुलिस का जवाब भी अहम होगा. 

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