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जिंदगी से MCD ने किया खिलवाड़, 28 लाख इमारतों की जांच... सिर्फ 19 को बताया था खतरनाक!

MCD ने साल 2026 की शुरुआत में 27,84,286 इमारतों का सर्वे किया, जिनमें केवल 19 को खतरनाक पाया था. अधिकारी दरारें और झुकी दीवारें देखते थे. इमारतों की बाहर से जांच हुई, विस्तृत संरचनात्मक जांच नहीं.

दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस एरिया में सत्य निकेतन की संकरी गली में एक पांच मंजिला इमारत ढहने से कम से कम 7 लोगों की मौत हो गई. इस इमारत में पीजी चलता था, जिसमें दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र रहते थे. मरने वाले सात लोगों में 5 छात्र बताए जा रहे हैं. इस दर्दनाक हादसे के बाद एक बार फिर अवैध निर्माण का मुद्दा चर्चा में आ गया है. 

जून 2026 में हुए दिल्ली नगर निगम (MCD) के सर्वे में करीब 28 लाख इमारतों की जांच के बाद केवल 19 इमारतों को खतरनाक पाया गया था. इस बीच भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता विजय गोयल ने दिल्ली में अवैध निर्माण और जर्जर इमारतों को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि अगर समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो अनधिकृत बहुमंजिला इमारतें और पुरानी जर्जर संपत्तियां और अधिक हादसों का कारण बन सकती हैं.

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ग्राउंड प्लस वन फ्लोर बनाने की थी इजाजत

MCD के एक बयान के अनुसार, रविवार (6 सितंबर) को ढही इमारत का निर्माण साल 1990 के दशक में पुनर्वास कॉलोनी में करीब 55 वर्ग गज के प्लॉट पर किया गया था. हालांकि, कुछ स्थानीय निवासियों का दावा है कि यह इमारत करीब 50 साल पुरानी थी और इसे 1970 के दशक में बनाया गया था. अधिकारियों ने बताया कि इन पुनर्वास कॉलोनियों में शुरुआत में केवल भूतल और एक मंजिल (ग्राउंड प्लस वन) के निर्माण की अनुमति दी गई थी.

दशकों पुरानी यह पांच मंजिला इमारत लड़कों के पीजी के रूप में इस्तेमाल की जा रही थी. एमसीडी ने कहा कि इस इमारत का कोई स्वीकृत नक्शा नहीं था और इसके खिलाफ कोई शिकायत भी नहीं मिली थी. यह इलाका 1970 के दशक में पुनर्वास कॉलोनी के रूप में विकसित किया गया था, जहां लोगों को छोटे-छोटे भूखंड दिए गए थे.

एमसीडी आयुक्त संजीव खिरवार ने कहा कि मजिस्ट्रेट जांच के बाद इमारत ढहने के तात्कालिक कारणों के बारे में अधिक जानकारी मिलेगी. बेसमेंट में कोई काम हो रहा था या नहीं, यह मजिस्ट्रेट जांच के बाद पता चलेगा. 

आसपास की 4 इमारतों को MCD का नोटिस

स्थानीय निवासियों ने इमारत ढहने के लिए मरम्मत कार्य और बेसमेंट में जमा पानी को जिम्मेदार ठहराया है. नगर निकाय ने पास की इमारत खाली कराकर सील कर दी है, जिसमें लड़कियों का पीजी था. अधिकारियों के अनुसार, आसपास की कम से कम चार इमारतों को दिल्ली नगर निगम अधिनियम, 1957 की धारा 349 के तहत खाली करने के नोटिस जारी किए गए हैं.

धारा 349 और धारा 491 के तहत, नगर निगम किसी भी ऐसी इमारत को, जिसे खतरनाक या जोखिमपूर्ण माना जाता है, खाली कराने और उसे खतरनाक घोषित करने संबंधी नोटिस जारी कर सकता है. अधिकारियों ने बताया कि एमसीडी के दस्तावेजों के अनुसार, इमारत के मालिक ने पिछले साल संपत्ति कर और 2007 में कन्वर्जन शुल्क जमा किया था.

27.84 लाख इमारतों में केवल 19 पाई गई थीं खतरनाक 

जून से सितंबर के बीच नगर निकाय ने करीब 980 संपत्तियों पर तोड़फोड़ की कार्रवाई की, 460 संपत्तियां सील कीं, अवैध निर्माण के लिए 1,500 से अधिक कारण बताओ नोटिस और 708 सीलिंग संबंधी कारण बताओ नोटिस जारी किए. 

अधिकारियों ने बताया कि 720 से अधिक तोड़फोड़ आदेश जारी किए. इस घटना ने एमसीडी के हर साल मानसून से पहले किए जाने वाले कमजोर इमारतों के सर्वे की प्रभावशीलता पर भी सवाल खड़े किए हैं. अधिकारियों के अनुसार, इस साल की शुरुआत में किए गए सर्वे में एमसीडी ने 27,84,286 इमारतों की जांच की थी, जिनमें से केवल 19 को खतरनाक पाया गया.

इमारत की बाहर से जांच होती है, विस्तृत नहीं

उन्होंने बताया कि इमारतों के सर्वेक्षण के दौरान एमसीडी की टीम दरारें, झुकी हुई दीवारें और इमारत की कमजोरी के अन्य दिखाई देने वाले संकेतों को देखती हैं. आमतौर पर इमारतों की बाहर से जांच की जाती है और विस्तृत संरचनात्मक जांच नहीं की जाती.

साउथ दिल्ली की पुरानी इमारतों में हुए कई हादसे

इस साल शहर में खासकर दक्षिण क्षेत्र में इमारत ढहने और आग लगने की कई घटनाएं हुई हैं. 30 मई को सैदुल अजायब में इमारत ढहने की घटना में छह लोगों की मौत हुई थी. वहीं, तीन जून को हौज रानी इलाके में एक ‘बेड एंड ब्रेकफास्ट’ में आग लगने से 23 लोगों की मौत हुई थी, जिनमें 11 विदेशी नागरिक शामिल थे. जून में मलका गंज सब्जी मंडी इलाके में एक मकान ढह गया था और इसी महीने करावल नगर में चार मंजिला इमारत भी ढह गई थी. 

MCD के पांच अधिकारी सस्पेंड

एमसीडी ने सत्य निकेतन में इमारत ढहने की घटना के बाद सोमवार को दक्षिण क्षेत्र के उपायुक्त राकेश कुमार और चार इंजीनियरों को अनुशासनात्मक कार्रवाई लंबित रहने तक निलंबित कर दिया. बीजेपी नेता गोयल ने कहा कि उन्होंने शहर में अवैध निर्माण के मुद्दे को कई बार उठाया, लेकिन इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई.

उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, 'आज भी पुरानी दिल्ली और चांदनी चौक में खुलेआम छह मंजिल तक के अवैध निर्माण हो रहे हैं. वहीं, कई पुरानी इमारतें पहले से ही जर्जर और खतरनाक स्थिति में हैं.' गोयल ने कहा कि यह स्थिति किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है. उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली नगर निगम वर्षों से चली आ रही इस समस्या से निपटने में विफल रहा है.

न्यूज एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ

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निमिषा श्रीवास्तव ने लखनऊ यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में ग्रेजुएशन करने के बाद माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास कम्यूनिकेशन में मास्टर्स की डिग्री ली है. इनको पत्राकारिता के क्षेत्र  में 5 साल से ज्यादा का अनुभव है. इस दौरान निमिषा ने राजनीति, क्राइम, पॉलिटिकल एनालिसिस और इलेक्शन रीसर्च पर काम किया है. अभी निमिषा एबीपी लाइव में स्टेट्स सेक्शन में बतौर शिफ्ट हेड अपनी सेवाएं दे रही हैं. निमिषा इतिहास और साहित्य की किताबों में रुचि रखती हैं और खबरों से हटकर भी लिखना पसंद करती हैं. 

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