दिल्ली होटल अग्निकांड: रियाजुद्दीन ने पेश की इंसानियत की मिसाल, 2 लाख के गद्दे बिछाकर बचाईं कई जानें
Malviya Nagar Fire News: एक गद्दा कारोबारी ने पल भर में फैसला लेते हुए करीब दो लाख रुपये मूल्य के अपने गद्दे बिछा दिए, जिससे कई लोगों की जान बच सकी.

दिल्ली के मालवीय नगर स्थित एक होटल में बुधवार को आग लगने के बाद जब चारों ओर धुआं और लपटें फैल गईं तथा मदद की चीख-पुकार सुनाई देने लगी, तब सामने दुकान चलाने वाले एक गद्दा कारोबारी ने पल भर में फैसला लेते हुए करीब दो लाख रुपये मूल्य के अपने गद्दे बिछा दिए, जिससे कई लोगों की जान बच सकी.
होटल में आग लगने की सूचना मिलते ही रियाजुद्दीन मंसूरी अपने कर्मचारियों के साथ मौके पर पहुंचे और उन्होंने होटल के बाहर जमीन पर दर्जनों रजाइयां और गद्दे बिछाकर एक अस्थायी सुरक्षा कवच तैयार किया. इससे इमारत में फंसे लोगों को कूदकर सुरक्षित बाहर निकलने में मदद मिली.
रियाजुद्दीन ने बचाई 20 लोगों की जान
रियाजुद्दीन ने बताया कि उन्होंने सबसे पहले गद्दे और रजाइयां बिछाईं. उन्होंने कहा कि बचाव कार्य के दौरान उन्हें और उनके बेटे को भी चोटें आईं. चश्मदीद रियाजुद्दीन मंसूरी ने बताया कि जब मैंने लोगों को इमारत से कूदते देखा, तो मैंने अपनी दुकान से गद्दे सड़क पर बिछाकर आठ लोगों की जान बचाई. हमने शवों को ढकने के लिए चादरें भी उपलब्ध कराईं. दमकलकर्मी समय पर पहुंच गए थे. हमने 20 से अधिक लोगों को बचाया.
मालवीय नगर के घनी आबादी वाले हौज रानी क्षेत्र स्थित ‘फ्लरिश स्टे’ होटल में लगी आग में 21 लोगों की मौत हो गई, जिनमें 11 विदेशी नागरिक शामिल थे. अधिकारियों के अनुसार, घायल हुए 35 लोगों में से 19 का दिल्ली के विभिन्न अस्पतालों में इलाज किया जा रहा है और उनकी हालत गंभीर बनी हुई है.
अधिकारियों ने घटना पर क्या बताया?
अधिकारियों ने बताया कि यह होटल मुख्य रूप से पास स्थित मैक्स अस्पताल में उपचार के लिए आने वाले मरीजों और उनके परिजनों के ठहरने के लिए इस्तेमाल किया जाता था. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आग तेजी से फैलने पर कई लोग खिड़कियों के शीशे तोड़कर मदद की गुहार लगा रहे थे.
रियाजुद्दीन के बेटे अरमान ने बताया, “एक पड़ोसी से सुबह करीब साढ़े आठ बजे आग लगने की सूचना मिलने पर मैं मौके पर पहुंचा. भूतल पर आग लगी हुई थी. कोई भी अंदर नहीं जा पा रहा था और बाहर नहीं आ पा रहा था. ऊपरी मंजिलों पर फंसे लोग चिल्ला रहे थे और पूछ रहे थे कि क्या वे कूद जाएं. इसके बाद मैंने तुरंत दुकान से करीब 20 से 25 रजाइयां और गद्दे निकालकर होटल के बाहर बिछा दिए.”
चार दशक से गद्दों की दुकान चला रहा परिवार
करीब चार दशक से होटल के सामने गद्दों की दुकान चला रहे परिवार ने बताया कि लोगों को चोट से बचाने के लिए कई गद्दों और रजाइयों को एक-दूसरे के ऊपर रखा गया था. अरमान ने कहा, “करीब आठ लोग उन पर कूदे और सुरक्षित बच गए. केवल कुछ लोगों को मामूली चोटें आईं.”
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि इमारत में धुआं भर जाने से अफरा-तफरी का माहौल था. उन्होंने कहा कि एक महिला अपने बच्चे को गोद में लेकर तीसरी मंजिल से कूद गई, जबकि अन्य लोग बाहर निकलने का रास्ता तलाश रहे थे. ऐसे समय में गद्दे और रजाइयां कई लोगों के लिए सहारा बने.
गद्दे बिछाने से दो लाख का नुकसान- रियाजुद्दीन
रियाजुद्दीन ने कहा, “मुझे करीब दो लाख रुपये का नुकसान हुआ. हमने मृतकों और घायलों को बाहर निकालने के लिए चादरें भी दीं. रजाइयों के कवर भी दिए. हमारे पास जो भी सामान था, हमने मानवता के नाते सब दे दिया. हिंदू-मुसलमान से ऊपर इंसानियत है. हम सब हिंदुस्तानी हैं. जरूरतमंद लोगों की मदद करना मेरा फर्ज था.”
अरमान ने कहा कि यदि आग पर समय रहते काबू नहीं पाया जाता तो उनकी दुकान भी इसकी चपेट में आ सकती थी. उन्होंने कहा, “आपातकालीन सेवाएं शीघ्र मौके पर पहुंच गई थीं और बचाव अभियान में उन्होंने सहयोग किया. सभी समय पर पहुंचे और उन्होंने हमारी काफी मदद की.
चश्मदीदों ने बताई आंखों-देखी
एक दुकानदार ने अपनी दुकान से करीब 20-22 गद्दे बाहर बिछा दिए ताकि लोग आग से बचने के लिए उन पर कूद सकें. दुकानदार अरमान ने बताया कि मेरी दुकान यहीं है, मुझे आग लगने की सूचना मिली, भीषण आग लगी थी, कोई अंदर नहीं जा पा रहा था और न ही बाहर आ पा रहा था. फिर किसी तरह 7-8 लोग अंदर घुस गए. तब मैंने अपनी दुकान से करीब 20-22 गद्दे बाहर बिछा दिए, लोग उन पर कूद गए. उनमें से ज्यादातर लोग सुरक्षित थे.

























