यूजीसी के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर कथावाचक कुमार विश्वास की भी प्रतिक्रिया सामने आई है. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय का स्वागत है. भारत इस समय किसी भी प्रकार का विभाजन झेलने की स्थिति में नहीं है. ऐसे समय में सरकारों को और राजनीति को भी चाहिए कि कोई विभाजक रेखा न खींचें. ये सत्य है कि हमारे दलित, पिछड़े और वंचित मित्रों के साथ शताब्दियों से बहुत अत्याचार हुआ है. 

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'सुप्रीम कोर्ट ने करोड़ों लोगों की मनोदशा का भाव समझा'

कुमार विश्वास ने आगे कहा, "यह भी कहने में लोगों की जबान हकलाती है कि ये सब जो पिछले एक हजार वर्षों में विधर्म भारत में आया था, जिनके यहां परंपराएं थीं, उन्होंने ये भारत में बोया था. उससे मुक्ति के उपाय किए जा रहे हैं. पिछले 80 वर्षों में किए गए, आगे भी किए जाएंगे. लेकिन कोई ऐसा न हो कि निरअपराध फंसे या किसी भी जाति-वर्ण का व्यक्ति, किसी धर्म का व्यक्ति किसी जाति में असहज अनुभव करें. मैं सुप्रीम कोर्ट का आभार व्यक्त करता हूं कि उन्होंने करोड़ों लोगों की मनोदशा का भाव  समझा. मैं आशा करता हूं कि राजनीति भी इसका सकारात्मक हल निकालेगी." नोएडा में मीडिया से बातचीत में कुमार विश्वास ने ये बातें कहीं.

सुप्रीम कोर्ट के फैसले की बड़ी बातें

  • सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया अस्पष्ट है, इसके बहुत व्यापक परिणाम हो सकते हैं 
  • इसका प्रभाव खतरनाक रूप से समाज को विभाजित करने वाला भी हो सकता है
  • केंद्र और यूजीसी से 19 मार्च तक जवाब मांगा
  • सुप्रीम कोर्ट ने कहा हम अनुच्छेद 142 के तहत दी गई शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए निर्देश देते हैं कि 2012 के विनियमन अगले आदेश तक लागू रहेंगे
  • याचिकाकर्ताओं में से एक की ओर से वकील विष्णु शंकर जैन पेश हुए 
  • सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने विभिन्न जातियों के लिए अलग-अलग छात्रावासों जैसे उपायों पर कड़ी आपत्ति जताई
  • प्रधान न्यायाधीश ने कहा, 'भगवान के लिए, ऐसा मत करो! हम सब साथ रहते हैं। अंतरजातीय विवाह भी होते हैं
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