देश की प्रतिष्ठित जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी एक बार फिर छात्र राजनीति और प्रशासनिक टकराव के केंद्र में आ गई है. छात्रसंघ के चार शीर्ष पदाधिकारियों समेत 5 छात्रों को दो सेमेस्टर के लिए रस्टिकेट किए जाने के फैसले के बाद कैंपस का माहौल गरमा गया है. बुधवार (11 फरवरी) से छात्रों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान कर दिया है और प्रशासन से आदेश वापस लेने की मांग तेज हो गई है.

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स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज में हुई जनरल बॉडी मीटिंग में देर रात तक चर्चा चली. बड़ी संख्या में मौजूद छात्रों ने सामूहिक रूप से क्लास का बहिष्कार करने और हड़ताल पर जाने का फैसला लिया.

छात्रों का कहना है कि जब तक निष्कासन आदेश रद्द नहीं होगा, तब तक आंदोलन जारी रहेगा. उनका आरोप है कि प्रशासन छात्रों की आवाज दबाने की कोशिश कर रहा है, इसलिए यह कदम उठाना जरूरी हो गया.

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फेस रिकग्निशन गेट से शुरू हुआ विवाद

पूरा मामला 21 नवंबर को डॉ. बी.आर. आंबेडकर सेंट्रल लाइब्रेरी में लगाए गए फेस रिकग्निशन आधारित प्रवेश द्वार से जुड़ा है. इस तकनीक को लेकर छात्रों ने पहले भी आपत्ति जताई थी. प्रशासन का आरोप है कि विरोध के दौरान तोड़फोड़ हुई, अव्यवस्था फैली और शैक्षणिक गतिविधियों में बाधा डाली गई.

इन्हीं आरोपों के आधार पर छात्रसंघ अध्यक्ष अदिति मिश्रा, उपाध्यक्ष के. गोपिका, महासचिव सुनील यादव, संयुक्त सचिव दानिश अली और पूर्व अध्यक्ष नीतीश कुमार को विंटर और मॉनसून सेमेस्टर 2026 तक के लिए रस्टिकेट कर दिया गया.

जुर्माना और कैंपस एंट्री पर रोक

निष्कासित छात्रों पर कैंपस में प्रवेश पर रोक लगा दी गई है. साथ ही 20-20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है. कुछ अन्य छात्रों पर करीब 19 हजार रुपये तक का आर्थिक दंड लगाया गया है.

छात्रसंघ का कहना है कि यह कार्रवाई छात्र राजनीति को कमजोर करने की कोशिश है और जिन पदाधिकारियों को हटाया गया है, उनके कार्यकाल को भी जानबूझकर प्रभावित किया गया है.

क्लासरूम से सड़कों तक पहुंचा विरोध

बुधवार को कैंपस में प्रदर्शन तेज हो गया. छात्रों ने कक्षाओं का बहिष्कार किया और प्रशासन के खिलाफ मार्च निकाला. प्रदर्शन के दौरान चीफ प्रॉक्टर मैनुअल की प्रतियां जलाकर प्रतीकात्मक विरोध जताया गया.

आंदोलनकारी रस्टिकेशन, आउट ऑफ बाउंड्स आदेश, जुर्माने और सीपीओ मैनुअल को वापस लेने की मांग कर रहे हैं. कैंपस में नारेबाजी और धरना जारी है.

फिलहाल विश्वविद्यालय में शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित हैं. छात्र नेताओं का कहना है कि जब तक मांगें नहीं मानी जातीं, हड़ताल जारी रहेगी. वहीं प्रशासन की ओर से अभी तक कोई नरमी के संकेत नहीं मिले हैं. ऐसे में टकराव और लंबा खिंच सकता है. आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि बातचीत से हल निकलता है या विवाद और गहराता है.