जयपुर: 2 साल से अधूरी सरकारी अस्पताल की नई बिल्डिंग पर सियासत तेज, कांग्रेस-BJP आमने-सामने
Jaipur News in Hindi: दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल की नई बिल्डिंग का काम अब सियासत के बीच अटक गया है. पिछले 2 साल पहले बीजेपी विधायक ने रुकवा दिया था.

राजस्थान की राजधानी जयपुर में मरीजों के ऊपर राजनीति भारी पड़ती हुई दिखाई दे रही है. यहां सरकारी अस्पताल की नई बिल्डिंग का काम सियासी उठापटक के चलते पिछले करीब सवा दो सालों से रुका पड़ा हुआ है. निर्माण रुकवाने के आरोपों के घेरे में आए बीजेपी के स्थानीय विधायक की दलील है कि पिछली सरकार ने नई बिल्डिंग का निर्माण घटिया क्वालिटी से कराया था, इसलिए उन्होंने काम रुकवा दिया है.
दूसरी तरफ कांग्रेस के विधायक ने सियासी पलटवार करते हुए सरकार से कहा है कि अगर उसके पास पैसे नहीं है तो वह अपने फंड से बचा हुआ निर्माण और सुविधाएं मुहैया कराने को तैयार हैं. अस्पताल की पुरानी बिल्डिंग जर्जर हो चुकी है. नई बिल्डिंग में नई सुविधाएं बढ़नी हैं, लेकिन सियासी खींचतान लोगों की जिंदगी और सेहत पर भारी पड़ रही है.
एसएमएस की भीड़ से बचते हैं लोग
राजस्थान के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल एसएमएस हॉस्पिटल का एक पार्ट पुराने शहर के गणगौरी बाजार स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय हॉस्पिटल भी है. यहां रोजाना तकरीबन दो हज़ार मरीजों की ओपीडी होती है. तमाम मरीजों का इलाज किया जाता है. ऑपरेशन, जांच और प्रसव का काम भी होता है. पुराने शहर के तमाम लोग एसएमएस की भीड़ से बचने के लिए यहां पर इलाज के लिए आते हैं.
अशोक गहलोत सरकार ने शुरू कराया था काम
अक्टूबर 2021 में राज्य की तत्कालीन अशोक गहलोत सरकार ने इस अस्पताल की नई बिल्डिंग के लिए 52 करोड रुपए का बजट जारी किया और काम शुरू कराया. नई बिल्डिंग के निर्माण का यह काम स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत कराया जा रहा था. इसे दिसंबर 2023 में पूरा हो जाना था. 80 फीसदी काम पूरा हो भी गया था. सिर्फ फिनिशिंग ही बची हुई थी.
इस बीच दिसंबर 2023 में ही राजस्थान में सत्ता परिवर्तन हो गया. जिस हवा महल क्षेत्र में यह अस्पताल है, वहां से बीजेपी के बाबा बालमुकुंद आचार्य विधायक चुने गए. विधायक बनते ही उन्होंने यह कहकर नई बिल्डिंग के निर्माण का काम रुकवा दिया कि निर्माण की क्वालिटी ठीक नहीं है. तब से यह काम रुका पड़ा हुआ है. नई बिल्डिंग में अलग-अलग वार्ड में 286 नए बेड लगाए जाने थे. जनरल मेडिसिन, सर्जरी और गायनी समेत कई अन्य विभागों को यहां शिफ्ट किया जाना था.
जर्जर हालत में अस्पताल की पुरानी बिल्डिंग
अस्पताल की पुरानी बिल्डिंग कई जगह से जर्जर हो चुकी है. प्लास्टर उखड़ गया है और पुताई के अभाव में दीवारें काली पड़ चुकी हैं. बारिश के सीजन में कई जगह पानी टपकता है. कभी किसी बड़े हादसे की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता. कुल मिलाकर कहा जाए तो पंडित दीनदयाल उपाध्याय के नाम पर चलने वाले अस्पताल को नई बिल्डिंग की जल्द से जल्द बेहद सख्त जरूरत है.
अस्पताल को लेकर क्या बोले बीजेपी विधायक?
इस बारे में जब बीजेपी के स्थानीय विधायक बाबा बालमुकुंद आचार्य से पूछा गया तो उन्होंने बिना किसी लाग लपेट के सीधे तौर पर यह कबूल किया कि काम उन्होंने ही रुकवाया हुआ है. उनके मुताबिक पिछली सरकार मानक के मुताबिक काम नहीं करा रही थी.
एजेंसी मनमाने तरीके से काम कर रही थी. ऐसे में सुरक्षा के मद्देनजर उन्होंने काम को रुकवा दिया था. बीजेपी विधायक बालमुकुंद आचार्य का आरोप है कि कांट्रैक्टर बजट का पैसा बढ़ाने के लिए लगातार ढिलाई बरत रहा है. इसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
कांग्रेस विधायक ने लगाए आरोप
अस्पताल की नई बिल्डिंग का काम बीजेपी के विधायक ने रुकवाया तो यहां कांग्रेस भी सियासी पलटवार करने में कतई पीछे नहीं नजर आ रही है. कांग्रेस पार्टी के विधायक अमीन कागजी का कहना है कि अस्पताल की नई बिल्डिंग का काम भ्रष्टाचार और लेनदेन के चलते रुकवाया गया है.
उन्होंने कहा कि अगर निर्माण में क्वालिटी का काम नहीं हो रहा था तो सरकार को कमी को दूर कराकर जल्द से जल्द नई बिल्डिंग को चालू करा देना चाहिए था. कांग्रेस विधायक अमीन कागजी ने कहा है कि अगर सरकार के पास पैसों की कमी है तो वह अपने फंड से बिल्डिंग का बचा हुआ काम पूरा करने और वहां सुविधाएं मुहैया कराने को तैयार हैं.
सियासत के चलते अधूरी है नई बिल्डिंग
कहा जा सकता है कि सियासी उठा पटक के चलते पटल की नई बिल्डिंग अधर में है. हालांकि 80 फीसदी के करीब काम पूरा हो चुका है. सिर्फ फिनिशिंग भर बाकी है. वैसे कुछ लोग यह भी कह रहे हैं कि बीजेपी को आम मरीजों व जनता का भले ना सही लेकिन कम से कम उसे पंडित दीनदयाल उपाध्याय के नाम का मान जरूर रखना चाहिए था, जिनके नाम पर यह अस्पताल संचालित हो रहा है और बीजेपी जिनके नाम पर सियासत करते हुए वोट मांगती है.
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Source: IOCL
























