Holi 2026: होली में क्यों पहने जाते हैं सफेद कपड़े? जानिए इसके पीछे छिपी खास वजह और मान्यता
Holi 2026: होली के त्योहार पर ज्यादातर लोग सफेद कपड़े पहनते हैं. इसके पीछे शुद्धता, नई शुरुआत और रंगों को उभारने की परंपरा जुड़ी है. मौसम के बदलाव से भी कारण जुड़ा है.

देशभर में होली का उत्सव पूरे उत्साह और उमंग के साथ शुरू हो चुका है. कहीं रंग और गुलाल उड़ रहे हैं तो कहीं लोग एक-दूसरे को रंग लगाकर इस त्योहार की खुशियां बांट रहे हैं. होली को रंगों का त्योहार कहा जाता है और इस दिन लोग अलग-अलग रंगों में रंगे नजर आते हैं. क्या आप जानते हैं कि होली पर मुख्य रूप से सफेद रंग के ही कपड़े क्यों पहने जाते हैं? क्या यह सिर्फ एक फैशन ट्रेंड है या इसके पीछे कोई गहरी मान्यता और कारण है?
शुद्धता और नई शुरुआत का प्रतीक
आपने अकसर देखा होगा कि मूवी हो या असल जिंदगी, होली के त्योहार में ज्यादातर लोग सफेद रंग के कपड़े पहनते हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि हमेशा से ही सफेद रंग को शुद्धता, शांति और सादगी का प्रतीक माना गया है.
मान्यता है कि होली से पहले होलिका दहन के दिन बुराई पर अच्छाई का जश्न मनाया जाता है. वहीं, होली के अगले दिन से हिंदू कैलेंडर का नया महीना शुरू हो जाता है, जिसे कई लोग नए वर्ष के आरंभ के रूप में भी मानते हैं. ऐसे में सफेद रंग नई शुरुआत के लिए शुभ माना जाता है.
मौसम के बदलाव से भी जुड़ा है कारण
होली मौसम में बदलाव की शुरुआत का प्रतीक है. इस समय सर्दी का मौसम खत्म हो रहा होता है और गर्मी के मौसम की शुरुआत हो रही होती है. ऐसे में सफेद रंग का कपड़ा लोगों को खुले मैदान में होली खेलते समय गर्मी और पसीने से बचाने में मदद करता है. मान्यता है कि सफेद रंग मन को शांत रखता है और होली के शोर-शराबे में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है.
एकता और समानता का भी संदेश
होली रंगों का त्योहार है. ऐसे में सफेद कपड़े पर जब अलग-अलग रंग और गुलाल जब गिरते हैं तो ये अच्छे से उभरता है. यह भी एक वजह है कि होली खेलने के लिए सफेद रंग के कपड़ों का इस्तेमाल मुख्य रूप से किया जाता है.
इसी के साथ, होली खेलते समय सफेद कपड़ों पर जब रंग गिरते हैं तो सभी लोग कुछ समय बाद एक जैसे नजर आने लगते हैं और तब यह समानता और एकता का भी प्रतीक बन जाता है.
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