दिल्ली पुलिस के आउटर नॉर्थ जिले में एक हेड कॉन्स्टेबल ने ऐसा काम कर दिखाया है, जो पूरे विभाग के लिए मिसाल बन गया है. HC संजय कुमार वशिष्ठ को बेस्ट इन्वेस्टिगेटिंग ऑफिसर चुना गया, लेकिन सवाल है. आखिर उन्होंने ऐसा क्या किया कि डिपार्टमेंट के लिए मिसाल कायम करते हुए वे सबसे आगे निकल गए?

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3 महीने में 155 केस का निपटान, आखिर कैसे किया ये संभव?

जनवरी से मार्च 2026 के बीच संजय वशिष्ठ ने 155 मामलों का निपटारा किया. यह सिर्फ एक रिकॉर्ड नहीं, बल्कि उनकी तेज, सटीक और साक्ष्य-आधारित जांच का परिणाम है.

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संजय वशिष्ठ की सफलता के पीछे कई अहम कारण बताए जा रहे हैं. उन्होंने तेज और समयबद्ध जांच कर हर केस को तय समय में खत्म करने पर फोकस किया. साक्ष्य आधारित जांच के दौरान बिना पुख्ता सबूत के उन्होंने केस को आगे नहीं बढ़ाया. वहीं, पेंडिंग केस पर विशेष ध्यान देते हुए उन्होंने पुराने मामलों को प्राथमिकता देकर तेजी से क्लियर किया. प्रोफेशनल अप्रोच अपनाते हुए उन्होंने हर केस को अलग रणनीति के साथ हैंडल किया. जो उनकी सफलता और इस अभूतपूर्व प्रदर्शन का कारण बनी.

कड़ी समीक्षा में भी साबित हुए नंबर-1

आउटर नॉर्थ डिस्ट्रिक्ट की समीक्षा बैठक में सभी थानों और जांच अधिकारियों के काम का बारीकी से आकलन किया गया. बावाना, नरेला, अलीपुर जैसे थानों के प्रदर्शन की तुलना के बाद संजय वशिष्ठ सबसे बेहतर साबित हुए.

वरिष्ठ अधिकारियों ने भी माना लोहा

डीसीपी हरेश्वर स्वामी ने उनकी तारीफ करते हुए कहा कि एक ही तिमाही में 155 केस निपटाना असाधारण उपलब्धि है. उन्होंने इसे “पुलिसिंग में उत्कृष्टता का प्रतीक” बताया.

सिर्फ IO ही नहीं, पूरी टीम का प्रदर्शन शानदार

जहां HC संजय विषष्ठ सर्वश्रेष्ठ जांच अधिकारी के सम्मान से सम्मानित किए गए तो वहीं इंस्पेक्टर शैलेन्द्र सिंह जाखड़ बेस्ट SHO से नवाजे गए. जबकि राकेश कुमार को सब-डिवीजन स्तर पर सम्मान मिला.

क्या सीख मिलती है इस सफलता से?

संजय वशिष्ठ की कहानी यह बताती है कि, सही प्लानिंग और अनुशासन से बड़ा परिणाम हांसिल किया जा सकता है. पेंडिंग काम खत्म करना ही असली परफॉर्मेंस है. पारदर्शिता और तेजी से ही जनता का भरोसा बनता है.

क्यों खास है ये उपलब्धि?

आज जब पुलिस पर केस पेंडेंसी का दबाव रहता है, ऐसे में 155 केस का निपटान यह दिखाता है कि सही कार्यशैली से सिस्टम को तेज और प्रभावी बनाया जा सकता है.