दिल्ली में इन दिनों नवरात्रि की धूम है. हर जगह मां दुर्गा के पंडाल सजे हुए हैं, लेकिन ग्रेटर कैलाश की एम ब्लॉक मार्केट का दुर्गा पूजा पंडाल इस बार कुछ खास वजह से चर्चा में है. यहां बीते 26 सालों से लगातार दुर्गा पूजा का आयोजन हो रहा है, लेकिन इस बार पूजा में वह हुआ जो पहले कभी नहीं हुआ. पहली बार यहां महिलाएं पुरोहित बनकर मां दुर्गा की पूजा करा रही हैं.

महिला सशक्तिकरण बनी थीम

दक्खिनायन दुर्गा पूजा पंडाल समिति के आयोजकों ने इस बार की थीम "महिला सशक्तिकरण" रखी है. इसी के तहत खासतौर से कोलकाता से दो महिला पुरोहितों को बुलाया गया. दोनों महिला पुरोहित पारंपरिक विधि-विधान से पूजा करा रही हैं.

समिति की अध्यक्ष ने कहा कि आज के समय में जब महिलाएं अंतरिक्ष तक पहुंच चुकी हैं, तो पूजा-पाठ करने में क्या दिक्कत हो सकती है? उन्होंने कहा कि समाज की सोच बदलने की जरूरत है.

समिति की अध्यक्ष ने कहा, "कुछ लोग कहते हैं कि महिलाओं के पास जनेऊ नहीं होता या वे शालिग्राम नहीं पकड़ सकतीं. लेकिन हम ये साबित करना चाहते थे कि महिलाएं सब कुछ कर सकती हैं."

पूजा कराने वाली दोनों महिला पुरोहितों ने एबीपी न्यूज से बातचीत में बताया कि पूजा के समय वे पूरी तरह मां की भक्ति में लीन हो जाती हैं. उनके मुताबिक, "जब हम पूजा करते हैं तो सिर्फ मां की आराधना का ही ख्याल रहता है. बाकी सब बातें पीछे छूट जाती हैं."

उन्होंने यह भी कहा कि अब वक्त बदल गया है, इसलिए समाज को भी अपनी सोच बदलनी चाहिए. उनका कहना है, "किसी भी वेद, पुराण या उपनिषद में नहीं लिखा कि औरत पूजा नहीं कर सकती. यह सिर्फ पुरुष प्रधान समाज की बनाई परंपरा है. अगर भगवान राम ने भी यज्ञ में सीता मां की प्रतिमा बिठाई थी क्योंकि बिना महिला के यज्ञ अधूरा था, तो आज महिलाओं को पुरोहित बनने पर क्यों ऐतराज है?"

बीजेपी नेता भी रहे मौजूदगी

इस अनोखे पंडाल में दिल्ली बीजेपी नेता प्रदीप भंडारी भी पहुंचे. उन्होंने मां दुर्गा की आराधना करते हुए पारंपरिक नृत्य किया और देश के लिए शक्ति और समृद्धि की कामना की.

उन्होंने कहा, "मैंने मां दुर्गा से प्रार्थना की है कि प्रधानमंत्री मोदी के विकसित भारत के सपने को मां शक्ति दें. हमारी सनातन संस्कृति में मां दुर्गा के सामने पुरुष और महिला सब बराबर हैं."

वहीं, ग्रेटर कैलाश से बीजेपी विधायक शिखा राय ने भी पंडाल पहुंचकर महिला पुरोहितों से पूजा कराने की इस पहल को सराहा. उन्होंने कहा कि इस तरह की कोशिशें समाज में महिलाओं को बराबरी का दर्जा देने में अहम रोल निभाती हैं.

इस दुर्गा पूजा पंडाल में लोगों की भीड़ लगातार बढ़ रही है. खास बात यह है कि यहां हर उम्र, हर वर्ग और हर समुदाय के लोग पहुंच रहे हैं. कोई मां दुर्गा के सामने सिर झुकाकर प्रार्थना कर रहा है, तो कोई पारंपरिक माहौल और संस्कृति का लुत्फ उठा रहा है.

लोगों का कहना है कि यह पंडाल न सिर्फ पूजा का स्थल है, बल्कि एक अनूठा अनुभव भी है जहां समाज और संस्कृति का संगम देखने को मिलता है.

ग्रेटर कैलाश की इस दुर्गा पूजा ने एक बड़ा संदेश दिया है, अगर महिलाएं अंतरिक्ष वैज्ञानिक बन सकती हैं, पायलट बन सकती हैं, देश चला सकती हैं, तो वे पूजा भी करा सकती हैं. यह पहल न सिर्फ धार्मिक आस्था से जुड़ी है, बल्कि समाज की उस सोच को भी चुनौती देती है जो महिलाओं की भूमिका को सीमित करने की कोशिश करती है.