दिल्ली मेट्रो से सफर करने वाले यात्रियों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है. अब पिंक लाइन पर ट्रेन का इंतजार करते समय ही पता चल सकेगा कि किस कोच में कितनी भीड़ है. दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने मैजेंटा लाइन पर सफलतापूर्वक चल रही रियल-टाइम कोच ऑक्यूपेंसी डिस्प्ले सुविधा का विस्तार पिंक लाइन पर भी कर दिया है.

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दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के प्रधान अधिशासी निदेशक (कॉर्पोरेट कम्युनिकेशंस) अनुज दयाल ने बताया कि, DMRC की यह सुविधा पिंक लाइन यानी लाइन-7 के स्टेशनों पर शुरू की गई है. इस कॉरिडोर में मजलिस पार्क से शिव विहार और मौजपुर से बाबरपुर तक का रूट शामिल है. यह एक सर्कुलर यानी रिंग कॉरिडोर है.

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मैजेंटा लाइन पर भी है ये सुविधा

इससे पहले मैजेंटा लाइन (लाइन-8), जो बॉटनिकल गार्डन से जनकपुरी पश्चिम के बीच चलती है, उसपर यह व्यवस्था वर्ष 2022 से लागू है. वहां प्लेटफॉर्म पर लगी पैसेंजर इंफॉर्मेशन डिस्प्ले सिस्टम (PIDS) स्क्रीन यात्रियों को प्रत्येक कोच में मौजूद भीड़ की वास्तविक समय की जानकारी देती है. इस सुविधा से यात्रियों को सही कोच चुनने में मदद मिली है. साथ ही ट्रेन के अलग-अलग डिब्बों में यात्रियों की संख्या को संतुलित करने में भी सकारात्मक परिणाम मिले हैं. 

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लोड सेंसर से तय होगा किस कोच में कितनी भीड़

पिंक लाइन पर शुरू की गई इस तकनीक के तहत ट्रेन के प्रत्येक कोच में लगे लोड सेंसर उसके मौजूदा वजन का आंकलन करते हैं. इसके बाद इस वजन की तुलना खाली कोच के निर्धारित वजन से की जाती है. इसी गणना के आधार पर यात्रियों के भार का अनुमानित प्रतिशत निकाला जाता है. सिस्टम इस जानकारी को छह कोचों के हिसाब से C1, C2, C3, C4, C5 और C6 के रूप में प्रदर्शित करता है. ट्रेन के प्लेटफॉर्म पर पहुंचने से ठीक पहले संबंधित स्टेशन की डिस्प्ले स्क्रीन पर यह जानकारी दिखाई देने लगती है. यात्री स्क्रीन देखकर तय कर सकते हैं कि उन्हें किस कोच के सामने खड़ा होना चाहिए. दयाल के मुताबिक, पिंक लाइन पर इस सुविधा को लागू करना तकनीकी रूप से आसान नहीं था. इसकी वजह लाइन-7 का सर्कुलर स्वरूप है, जिसके चलते अलग-अलग हिस्सों के बीच डेटा इंटरलिंकिंग की व्यवस्था तैयार करना चुनौतीपूर्ण रहा. 

पीक आवर्स में यात्रियों को मिलेगी बड़ी राहत

सुबह और शाम के व्यस्त समय में अक्सर ट्रेन के कुछ कोच दूसरे डिब्बों की तुलना में तेजी से भर जाते हैं. ऐसे में यात्रियों को कई बार भीड़भाड़ वाले कोच में ही चढ़ना पड़ता है, जबकि दूसरे डिब्बों में अपेक्षाकृत कम जगह होती है. रियल-टाइम ऑक्यूपेंसी डिस्प्ले इस समस्या को कम करने में मदद कर सकता है. 

इस सुविधा से यात्रियों को मिलेंगे ये प्रमुख फायदे मिलेंगे

  • सही कोच चुनने में आसानी: ट्रेन आने से पहले ही कम भीड़ वाले डिब्बों की पहचान की जा सकेगी.
  •  भीड़ का बेहतर बंटवारा: यात्री अलग-अलग कोचों में संतुलित तरीके से चढ़ सकेंगे, जिससे किसी एक डिब्बे पर अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ेगा.
  • पीक आवर्स में सहूलियत: सुबह और शाम के व्यस्त समय में कम भीड़ वाले कोच तक पहुंचना आसान होगा.
  •  सुरक्षा और परिचालन में मदद: कोचों में यात्रियों के भार का संतुलन बेहतर होने से ट्रेन के सुचारु संचालन और उपलब्ध क्षमता के बेहतर इस्तेमाल में सहायता मिलेगी.
  • समय और परेशानी की बचत: ट्रेन आने के बाद खाली जगह तलाशने के लिए प्लेटफॉर्म पर इधर-उधर जाने या अनुमान लगाने की जरूरत कम होगी.

DMRC के मुताबिक,  यात्रियों को बेहतर और सुविधाजनक सफर उपलब्ध कराने के लिए यात्री सूचना प्रणालियों को लगातार उन्नत किया जा रहा है. तकनीक आधारित नई सुविधाओं के जरिए यात्रा को अधिक आरामदायक और परिचालन को ज्यादा प्रभावी बनाने पर जोर है. पिंक लाइन पर रियल-टाइम कोच ऑक्यूपेंसी डिस्प्ले की शुरुआत इसी प्रयास का हिस्सा है. मैजेंटा लाइन के बाद अब पिंक लाइन के यात्रियों को भी ट्रेन में चढ़ने से पहले कोचों की भीड़ का अंदाजा मिल सकेगा.

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