दिल्ली के विवेक विहार इलाके में रविवार (3 मई) तड़के सुबह करीब चार बजे एक चार मंजिला बिल्डिंग में भीषण आग गई. इस हादसे में 9 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई. वहीं, दमकल विभाग ने मौके पर पहुंचकर 15 लोगों को बचा लिया था. इस आग की घटना में जान गंवाने वालों में से एक शिखा जैन भी थीं. जानकारी के मुताबिक, आग लगते ही एक धमाका हुआ और शिखा की नींद खुली तो उसने तुरंत घर के लोगों चिल्लाकर और  बिल्डिंग के लोगों को जगाने की कोशिश की, लेकिन दूसरों को बचाते-बचाते शिखा की खुद की जान चली गई.

पैंतालीस वर्षीय शिखा जैन के आखिरी पलों को याद करते हुए सफदरजंग अस्पताल के बर्न कैजुअल्टी वार्ड के बाहर खड़े  नमित ने यह जानकारी दी. शिखा के 48 वर्षिय पति नवीन अभी भी अस्पताल में हैं उनका शरीर 30 से 40 प्रतिशत जल चुका है और उनकी हालत नाजुक बनी हुई है. जब ये हादसा हुआ था उस समय दूसरी मंज़िल पर स्थित फ्लैट में परिवार के आठ सदस्य मौजूद थे तो गहरी  निंद में सो रहे थे.

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परिवार को बचाने में खोई जिंदगी

परिवार के लोगों में शिखा, उनके पति, उनकी दो बेटियां, उनके बुजुर्ग माता-पिता और दो घरेलू सहायक. आग लगने पर सभी ने पड़ोसियों से मदद मांगी लेकिन जब तक लोग मदद के लिए कुछ करते आग तेजी से फैलने लगी. परिवार के एक सदस्य, नमित ने इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में बताया कि शिखा भी कूदने वाली थी, लेकिन किसी कारण वो एक सेंकंड के लिए अंदर गई और वापस बाहर नहीं आ पाई. नमित ने बताया कि कैसे शिखा और उसके पति ने लोगों को बचाने के पूरा प्रयास किया और इस कारण नवीन भी झुलस गया और शिखा हादसे का शिकार हो गई.  

कैसे नवीन और शिखा ने अपने लोगों को बचाया?

परिवार के सदस्य ने बताया कि शिखा की दोनों घरेलू सहायक तुरंत बाहर निकल गईं. पति नवीन के साथ मिलकर शिखा ने अपने पिता अरुण जैन को सीढ़ियों से बाहर निकाला. नमित ने कहा, "जैसे ही आग लगी, पड़ोसियों ने ज़मीन पर गद्दे बिछा दिए. लोग खुद को बचाने के लिए कूद रहे थे." इसी दौरान आग तेजी से फैली और सीढ़ियों से निकलना संभव नहीं हो सका. नवीन ने इमारत की साइड में लगी खिड़की के कांच को तोड़ा और अपनी दोनों बेटियों रक्षता और प्रियल को दूसरी मंजिल से गद्दे पर नीचे कूदाकर बाहर निकाला.

नवीन की हालत गंभीर

सभी को बाहर निकालते-निकालते शिखा और नवीन अंदर फंस गए, लेकिन किसी तरह नवीन को बचा लिया गया. नवीन के चेहरे और हाथ झुलस गए. इस दौरान शिखा अंदर फंसी रही और अचेत हो गई जिससे वो बाहर नहीं आ सकी. बाद में शिखा का झुलासा हुआ शव बरामद हुआ और ये वही जगह थी जहाँ से आग की शुरुआत हुई थी. परिवार के सदस्य नमित ने आगे बताया कि इमारत से कूदने के दौरान उनकी बेटियों को भी मामूली चोटें आई हैं. उन्हें GTB अस्पताल ले जाया गया और बाद में सफदरजंग अस्पताल में शिफ़्ट कर दिया गया. फिलहाल उसकी हालत गंभीर बनी हुई है और  सफदरजंग अस्पताल में इलाज चल रहा है. 

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