दिल्ली-NCR में टैक्सी-ऑटो चालकों का 3 दिन का चक्का जाम, 21 मई से हड़ताल का ऐलान
Delhi-NCR Transport Strike: ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस (AIMTC) के नेतृत्व में दर्जनों परिवहन यूनियनों ने 21 से 23 मई तक सांकेतिक चक्का जाम करने का फैसला लिया है.

- ऑटो-टैक्सी चालकों ने किराया वृद्धि और बाइक टैक्सी पर रोक माँगी.
दिल्ली-एनसीआर में परिवहन व्यवस्था अगले सप्ताह प्रभावित हो सकती है. दिल्ली के टैक्सी ड्राइवर यूनियन किराया बढ़ाने की मांग को लेकर 21 मई से 3 दिन की हड़ताल का ऐलान कर दिया है. ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस (AIMTC) के नेतृत्व में दर्जनों परिवहन यूनियनों ने 21 से 23 मई तक सांकेतिक चक्का जाम करने का फैसला लिया है. इस संबंध में AIMTC ने सोमवार को दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को चिट्ठी लिखकर अपनी मांगें रखीं हैं.
ट्रांसपोर्ट संगठनों का आरोप है कि बढ़े हुए पर्यावरण क्षतिपूर्ति शुल्क (ECC), बीएस-4 वाहनों पर प्रस्तावित प्रतिबंध और परिवहन क्षेत्र पर बढ़ते आर्थिक दबाव ने कारोबारियों और चालकों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. बीते महीने 26 अप्रैल 2026 को हुई अहम बैठक में दिल्ली-एनसीआर की 60 से अधिक परिवहन यूनियनों और संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए. बैठक की अगुवाई AIMTC के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. हरीश सभरवाल ने की. इस दौरान ECC शुल्क में बढ़ोतरी और नई परिवहन नीतियों को लेकर गहरा विरोध दर्ज कराया गया.
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ECC शुल्क बढ़ने से महंगाई बढ़ने की आशंका
परिवहन संगठनों का कहना है कि पर्यावरण क्षतिपूर्ति शुल्क (ECC) का मकसद केवल उन ट्रांजिट वाहनों को नियंत्रित करना था जो बिना किसी काम के दिल्ली से गुजरते हैं, लेकिन अब यह शुल्क उन ट्रकों और वाणिज्यिक वाहनों पर भी लगाया जा रहा है जो राजधानी में जरूरी सामान पहुंचाते हैं. यूनियनों का दावा है कि इससे ट्रांसपोर्ट लागत बढ़ेगी और इसका सीधा असर आम लोगों पर महंगाई के रूप में दिखाई देगा.
भारी ट्रकों से लेकर छोटे कमर्शियल वाहनों तक बढ़ा बोझ
बैठक में यह भी मुद्दा उठाया गया कि हल्के वाणिज्यिक वाहनों पर ECC में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की गई है. वहीं, बड़े ट्रकों के लिए शुल्क में 40 से 55 प्रतिशत तक वृद्धि होने से देशभर के ट्रांसपोर्ट ऑपरेटर नाराज हैं. यूनियनों का कहना है कि पहले से डीजल, टोल टैक्स, फिटनेस और मेंटेनेंस खर्च बढ़े हुए हैं, ऐसे में अतिरिक्त शुल्क कारोबार को नुकसान पहुंचाएगा.
परिवहन संगठनों ने 1 नवंबर 2026 से बीएस-4 वाणिज्यिक वाहनों के दिल्ली प्रवेश पर प्रस्तावित रोक का भी विरोध किया है. उनका कहना है कि लाखों छोटे और मध्यम ट्रांसपोर्टर अभी भी इन वाहनों पर निर्भर हैं. यूनियनों का तर्क है कि जिन वाहनों को पहले तय अवधि तक चलाने की अनुमति दी गई थी, उन पर अचानक रोक लगाना गलत होगा.
यूनियनों ने रखीं कई मांगें, न मानने पर अनिश्चितकालीन आंदोलन की चेतावनी
प्रदर्शन कर रही यूनियनों ने मांग की है कि बढ़ा हुआ ECC केवल ट्रांजिट वाहनों पर लागू किया जाए. साथ ही बीएस-6 वाहनों को पूरी तरह छूट देने और बीएस-4 वाहनों पर चरणबद्ध तरीके से प्रतिबंध लागू करने की बात कही गई है. इसके अलावा वैध प्रदूषण प्रमाणपत्र वाले वाहनों को निर्धारित समय तक संचालन की अनुमति देने की मांग भी उठाई गई.
परिवहन संगठनों ने साफ कर दिया है कि यदि सरकार ने जल्द सकारात्मक फैसला नहीं लिया तो 21 से 23 मई तक प्रस्तावित सांकेतिक चक्का जाम के बाद आंदोलन को अनिश्चितकालीन रूप दिया जा सकता है. इससे दिल्ली-एनसीआर में माल ढुलाई और सार्वजनिक परिवहन सेवाओं पर असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है.
ऑटो-टैक्सी यूनियनों ने किराया बढ़ाने की उठाई मांग
इधर ऑटो और टैक्सी संगठनों ने भी बढ़ती महंगाई और सीएनजी कीमतों में हालिया बढ़ोतरी को लेकर किराया संशोधन की मांग तेज कर दी है. यूनियनों का कहना है कि बीते कुछ वर्षों में वाहन बीमा, टायर, फिटनेस और रखरखाव का खर्च काफी बढ़ चुका है. ऐसे में मौजूदा किराया ढांचा चालकों के लिए घाटे का सौदा बन गया है.
ऑटो-टैक्सी संगठनों ने दिल्ली सरकार से ओला, उबर और रैपिडो जैसी बाइक टैक्सी सेवाओं पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है. यूनियनों का कहना है कि कई राज्यों में इस तरह की सेवाओं पर रोक लग चुकी है और दिल्ली में भी पारंपरिक ऑटो-टैक्सी चालकों के हितों की रक्षा के लिए ऐसा कदम उठाया जाना चाहिए.
संगठनों ने कहा है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द फैसला नहीं लिया गया तो वो अपने सहयोगी संगठनों के साथ बड़े स्तर पर आंदोलन शुरू करेंगे. यूनियनों का दावा है कि परिवहन क्षेत्र से जुड़े लाखों लोगों की आजीविका दांव पर लगी हुई है और सरकार को इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करना चाहिए.
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