सत्य निकेतन हादसा: छात्रों की मौत का जिम्मेदार कौन? मकान मालिक पर FIR | 5 बड़ी बातें
साउथ दिल्ली के सत्य निकेतन में इमारत ढहने से अब तक 6 लोगों की मौत हो गई है. हादसे में 12 लोगों को मलबे से निकाला गया है. घायलों को AIIMS ट्रॉमा सेंटर और सफदरजंग अस्पताल भेजा गया है.

साउथ दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में इमारत गिरने की घटना में मृतकों की संख्या बढ़कर 6 हो गई है. हादसे के बाद चल रहे तलाशी और बचाव अभियान के दौरान एक और शव बरामद किया गया. मौके पर रेस्क्यू टीम लगातार मलबा हटाकर यह पता लगाने में जुटी है कि कहीं कोई और व्यक्ति तो उसमें नहीं फंसा है.
अधिकारियों के मुताबिक, हादसे में अब तक 12 लोगों को मलबे से बाहर निकाला गया है. घायलों को इलाज के लिए AIIMS ट्रॉमा सेंटर और सफदरजंग अस्पताल भेजा जा रहा है. राहत और बचाव का काम अभी भी जारी है.
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जानकारी के मुताबिक, यह हादसा मोतीबाग इलाके के सत्य निकेतन में शिव मंदिर के पास हुआ. जिस इमारत में हादसा हुआ, वहां पीजी में पढ़ने वाले छात्र भी रहते थे. हालांकि, हादसे के वक्त इमारत में कितने लोग मौजूद थे, इसकी पूरी जानकारी सामने आने के बाद ही स्थिति साफ हो सकेगी.
#WATCH | Delhi: One more body has been recovered, raising the death toll to six in the Satya Niketan building collapse. Search and rescue operations continue. pic.twitter.com/rujAXFbCFs
— ANI (@ANI) September 6, 2026
आसपास की इमारतों को खाली करने का नोटिस
हादसे के बाद प्रशासन ने आसपास की इमारतों की सुरक्षा को लेकर भी कदम उठाए हैं. जिस बिल्डिंग में हादसा हुआ, उसके ठीक बगल में बनी पांच मंजिला इमारत की हालत भी बेहद खराब बताई जा रही है. एहतियात के तौर पर इस इमारत को खाली करा दिया गया है.
बताया जा रहा है कि यह इमारत शॉप नंबर 13 और 14 को मिलाकर बनाई गई है. आरोप है कि यहां पुराने तरीके से निर्माण किया गया है और इमारत में पिलर नहीं हैं. ईंटों को सीधे जोड़कर दीवारें तैयार की गई हैं. इसकी हालत को देखते हुए आशंका जताई जा रही है कि यह इमारत भी कभी गिर सकती है.
फिलहाल इमारत को स्थिर रखने के लिए सपोर्ट सिस्टम लगाया जा रहा है. प्रशासन की चिंता यह भी है कि हादसे वाली इमारत का मलबा हटाते समय नीचे का बेस कमजोर होने से बगल की इमारत की स्थिरता पर असर पड़ सकता है.
14 नंबर शॉप में बना दी गई थी चार मंजिला इमारत
जानकारी के मुताबिक, सत्य निकेतन में जिस इमारत के गिरने से हादसा हुआ, वह 14 नंबर शॉप की जगह पर बनी थी. आरोप है कि करीब 60 गज क्षेत्रफल वाली दुकान को अवैध तरीके से बदलकर उस पर चार मंजिल की इमारत बना दी गई थी.
बताया जा रहा है कि 14 नंबर शॉप के साथ 13 नंबर और 12 नंबर शॉप के ऊपर भी अवैध तरीके से निर्माण कर PG चलाया जा रहा था. सुरक्षा के मद्देनजर इन जगहों को भी खाली करा दिया गया है और संबंधित इमारत को गिराए जाने की तैयारी की जा रही है.
सत्य निकेतन में बड़ी संख्या में छोटे निर्माण
सत्य निकेतन इलाके के इस हिस्से में करीब 92 गज क्षेत्रफल वाले 299 घर बताए जा रहे हैं. इसके अलावा करीब 60 गज क्षेत्रफल वाली 16 दुकानें और लगभग 15 से 20 फीट आकार के 16 स्टॉल भी हैं. ऐसे में यहां आबादी और निर्माण का दबाव काफी ज्यादा है.
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने हादसे की वजह को लेकर कहा कि इमारत पुरानी थी और उसमें निर्माण एवं मरम्मत का काम चल रहा था. उनके मुताबिक, बेसमेंट में खुदाई की जा रही थी, जिसकी वजह से एक पिलर खिसक गया और पूरी इमारत ढह गई. मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मामले में न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं.
मुख्यमंत्री ने कहा, "इमारत पुरानी थी और उसमें कुछ निर्माण एवं मरम्मत का काम चल रहा था. बेसमेंट में किसी तरह की खुदाई की जा रही थी, जिसकी वजह से एक पिलर खिसक गया और पूरी इमारत ढह गई."
रेखा गुप्ता ने बताया कि इमारत का इस्तेमाल पेइंग गेस्ट यानी PG आवास के तौर पर किया जा रहा था और हादसे के वक्त अंदर बच्चे मौजूद थे.
दोषियों पर कार्रवाई के आदेश
उन्होंने कहा, "इमारत का इस्तेमाल PG के तौर पर किया जा रहा था और अंदर बच्चे मौजूद थे. सभी एजेंसियां लगातार काम कर रही हैं. हमारी पहली प्राथमिकता इन बच्चों की जान बचाना है. बचाव अभियान इसी तरह जारी रहेगा. सभी अधिकारी मौके पर मौजूद हैं और किसी भी तरह की कमी नहीं होने दी जाएगी. हालांकि, दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा."
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फिलहाल प्रशासन और बचाव एजेंसियों की सबसे बड़ी चिंता मलबे में किसी और व्यक्ति के फंसे होने की है. साथ ही आसपास की कमजोर इमारतों को खाली कराकर किसी दूसरे हादसे को रोकने की कोशिश की जा रही है. जांच के बाद ही यह साफ होगा कि अवैध निर्माण और मरम्मत के काम में किस स्तर पर लापरवाही हुई.





















