दिल्ली की साकेत कोर्ट ने एलपीजी सिलेंडरों की कथित जमाखोरी और अवैध बिक्री के मामले में आरोपी व्यक्ति को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया है. अदालत का कहना है कि मामले में पूरे नेटवर्क का पता लगाने के लिए आरोपी से हिरासत में पूछताछ करना जरूरी है.
आरोपी मुकेश कुमार ने अग्रिम जमानत की याचिका दायर की थी. उस पर एलपीजी सिलेंडरों की जमाखोरी और काले बाजार में बेचने का आरोप है. पुलिस ने उसके खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत केस दर्ज किया है. इसके अलावा उस पर BNSS की धाराओं के तहत आपराधिक साजिश का भी आरोप लगाया गया है.
बचाव पक्ष ने क्या दलील दी?
सुनवाई के दौरान आरोपी के वकील ने अदालत से कहा कि आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत सजा ज्यादा गंभीर नहीं है और यह जमानती अपराध है. वकील ने यह भी दलील दी कि आरोपी जांच में सहयोग करने को तैयार है. बचाव पक्ष ने कुछ हाईकोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि मामले में पहले ही कुछ सामान बरामद हो चुका है और इस केस में एक सह-आरोपी को जमानत भी मिल चुकी है. इसलिए समानता के आधार पर मुकेश कुमार को भी राहत मिलनी चाहिए.
साकेत कोर्ट ने क्यों ठुकराई जमानत
हालांकि अदालत इन दलीलों से संतुष्ट नहीं हुई. एडिशनल सेशन जज विनोद कुमार गौतम ने कहा कि हाईकोर्ट के फैसले इस मामले में बाध्यकारी नहीं हैं, वे सिर्फ संदर्भ के तौर पर देखे जा सकते हैं. कोर्ट ने कहा कि अग्रिम जमानत एक असाधारण राहत है और इसे हर मामले में नहीं दिया जा सकता खासकर तब जब मामला संगठित आर्थिक अपराध और साजिश से जुड़ा हो.
जज ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में पुलिस को अक्सर आरोपी से हिरासत में पूछताछ करनी पड़ती है. ताकि पूरे नेटवर्क और अवैध गतिविधियों की कड़ी को समझा जा सके. अग्रिम जमानत मिलने पर यह प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है.
एलपीजी सप्लाई संकट के बीच कालाबाजारी का आरोप
अदालत ने यह भी माना कि आरोपी पर ऐसे समय में एलपीजी सिलेंडरों की अवैध खरीद-फरोख्त का आरोप है, जब पश्चिम एशिया में चल रहे संकट के कारण सप्लाई को लेकर चिंता बनी हुई है और मांग भी ज्यादा है. कोर्ट ने कहा कि ऐसे समय में जरूरी वस्तुओं की जमाखोरी और कालाबाजारी से आम लोगों को सीधा नुकसान होता है और वितरण व्यवस्था भी प्रभावित होती है.
सह-आरोपी से अलग बताई भूमिका
साकेत कोर्ट ने सह-आरोपी को मिली जमानत के आधार पर राहत देने की दलील भी खारिज कर दी. कोर्ट ने कहा कि मुकेश कुमार की भूमिका अलग दिखाई दे रही है. जांच के मुताबिक जिस वाहन का इस्तेमाल इस मामले में हुआ, उसका मालिक मुकेश कुमार बताया जा रहा है और उसे इस पूरे नेटवर्क का अहम हिस्सा माना जा रहा है.
जांच में शामिल नहीं हुआ आरोपी
अदालत ने यह भी कहा कि सुनवाई से पहले आरोपी जांच में शामिल नहीं हुआ था. इससे पुलिस की यह दलील मजबूत हुई कि उससे हिरासत में पूछताछ करना जरूरी है. इन सभी तथ्यों को देखते हुए अदालत ने अग्रिम जमानत की याचिका खारिज कर दी. हालांकि कोर्ट ने साफ किया कि उसके ये सभी टिप्पणियां सिर्फ जमानत याचिका पर फैसला देने तक सीमित हैं और इससे केस के अंतिम नतीजे पर कोई असर नहीं पड़ेगा.
