राजधानी के सरकारी अस्पतालों में इलाज कराने वाले लाखों मरीजों के लिए जल्द स्वास्थ्य सेवाओं का दायरा और मजबूत होने वाला है. डॉ. राम मनोहर लोहिया (आरएमएल) अस्पताल का नया सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक अब शुरू होने की दहलीज पर है. प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी होते ही यहां कई आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं एक साथ उपलब्ध होंगी, जिससे मरीजों को जांच और इलाज के लिए अलग-अलग विभागों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे.

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आखिरी औपचारिकता पूरी होते ही शुरू होंगी नई स्वास्थ्य सेवाएं

अस्पताल प्रशासन के अनुसार, भवन का निर्माण और आवश्यक तैयारियां पूरी हो चुकी हैं. अब केवल अंतिम वैधानिक फायर एनओसी जारी होना बाकी है. इसके मिलते ही पहले चरण में सुपर स्पेशियलिटी ओपीडी, आधुनिक डायलिसिस सेंटर और अत्याधुनिक रेडियोलॉजी सेवाएं शुरू कर दी जाएंगी.

नई डायलिसिस यूनिट शुरू होने से किडनी रोगियों के उपचार की क्षमता बढ़ेगी. वहीं सीटी स्कैन और एमआरआई जैसी उन्नत इमेजिंग सुविधाएं उपलब्ध होने से जटिल बीमारियों की पहचान पहले की तुलना में अधिक तेज और सटीक तरीके से की जा सकेगी. विशेषज्ञ चिकित्सकों की ओपीडी शुरू होने से मरीजों को बेहतर परामर्श भी एक ही परिसर में मिलेगा.

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सुरक्षा संबंधी सभी व्यवस्थाओं की जांच लगभग पूरी

अस्पताल सूत्रों के मुताबिक, निर्माण के समय आवश्यक स्वीकृतियां पहले ही मिल चुकी थीं. अब भवन को मरीजों के उपयोग में लाने से पहले अंतिम फायर सुरक्षा मंजूरी की प्रक्रिया पूरी की जा रही है. दमकल विभाग आपात स्थिति में वाहनों की पहुंच सहित सुरक्षा मानकों का परीक्षण कर चुका है और अंतिम स्वीकृति का इंतजार है.

सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक को लेकर पार्किंग व्यवस्था संबंधी जो आपत्तियां पहले सामने आई थीं, उनका समाधान कर दिया गया है. सुरक्षा उपकरणों और अन्य तकनीकी व्यवस्थाओं का निरीक्षण भी पूरा हो चुका है, जिससे परियोजना के संचालन का रास्ता लगभग साफ माना जा रहा है.

हर साल लाखों मरीजों को मिलेगा आधुनिक इलाज का लाभ

करीब 1,530 बेड क्षमता वाले आरएमएल अस्पताल में हर वर्ष लगभग 26 लाख मरीज ओपीडी सेवाओं के लिए पहुंचते हैं. इसके अलावा 75 हजार से ज्यादा मरीज भर्ती होते हैं और 50 हजार से अधिक सर्जरी की जाती हैं. अस्पताल में 30 से ज्यादा क्लीनिकल विभाग पहले से संचालित हैं, जबकि नया ब्लॉक सुपर स्पेशियलिटी सेवाओं को और मजबूत करेगा.

नया सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक शुरू होने के बाद कई उन्नत चिकित्सा सेवाएं एक ही भवन में उपलब्ध होंगी. इससे अस्पताल की मौजूदा व्यवस्था पर दबाव घटेगा और मरीजों को जांच, विशेषज्ञ परामर्श तथा उपचार के लिए अधिक सुव्यवस्थित और तेज स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी.

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