दिल्ली के तुर्कमान गेट इलाके में अवैध अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के बाद तनाव की स्थिति है. इसी बीच, पत्थरबाजी की घटना को लेकर दिल्ली पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है. इस मामले में करीब 10 लोगों को भी हिरासत में लिया गया है. दिल्ली पुलिस के अधिकारियों ने बुधवार सुबह इसकी जानकारी दी.पुलिस अधिकारियों ने बताया कि तुर्कमान गेट के पास फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास के इलाके में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है, जहां देर रात एमसीडी ने अतिक्रमण हटाने का अभियान चलाया.  

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पुलिस ने  भारतीय न्याय संहिता की धाराओं 221, 132, 121, 191(2), 191(3), 223 (A),  3(5)  और  PDPP एक्ट-1984 की धारा 3 के तहत मामले दर्ज किए जाएंगे.

धारा 221 – लोक सेवक को उसके कर्तव्य से रोकना

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यदि कोई व्यक्ति किसी सरकारी अधिकारी/कर्मचारी को उसके वैध कर्तव्य के निर्वहन से बल, धमकी या अवैध साधनों से रोकता है, तो यह अपराध है. . इसमें 5 वर्ष जेल या जुर्माना, या दोनों हो सकता है.

धारा 132 – लोक सेवक पर हमला या बल प्रयोग

जब कोई व्यक्ति ड्यूटी पर तैनात सरकारी कर्मचारी (जैसे पुलिस, प्रशासन) पर हमला करता है या बल प्रयोग करता है, ताकि वह अपना काम न कर सके. इसमें 2 साल तक जेल या जुर्माना या दोनों हो सकता है.

धारा 121 – लोक सेवक को गंभीर नुकसान पहुँचाने की मंशा

यदि किसी सरकारी कर्मचारी कोगंभीर चोट पहुंचाने की नीयत से हमला या हिंसा की जाती है, तो यह अधिक गंभीर अपराध माना जाता है. इसमें तीन महीने की जेल, 2500 रुपये तक का जुर्माना या दोनों हो सकता है.

धारा 191(2) व 191(3) – झूठी जानकारी / झूठा साक्ष्य

191(2): जानबूझकर झूठी जानकारी देना

191(3): ऐसी झूठी जानकारी देना जिससे किसी निर्दोष व्यक्ति को फंसाया जा सके या न्याय प्रक्रिया प्रभावित हो

उपरोक्त दोनों धाराओं में क्रमशः 2 साल और 5 साल तक की जेल या जुर्माना हो सकता है.

धारा 223(A) – गैरकानूनी जमावड़ा

यदि कई लोग एकत्र होकर कानून व्यवस्था भंग करने की नीयत रखते हैं या हिंसक गतिविधि में शामिल होते हैं, तो यह धारा लगती है. इसमें तीन महीने की जेल, 2500 रुपये तक का जुर्माना या दोनों हो सकता है.

धारा 3(5) BNS – सामूहिक अपराध की जवाबदेही

यदि किसी अपराध को समूह/भीड़ द्वारा अंजाम दिया जाता है, तो उसमें शामिल हर व्यक्ति को सामूहिक रूप से जिम्मेदार ठहराया जाता है. इसमें सजा का प्रावधान धारा 191 की ही तरह है.

सार्वजनिक संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम  1984 

धारा 3 – सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान- यदि कोई व्यक्ति सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाता है, तो यह अपराध है. इसमें अपराध के अलग अलग स्तर पर 6 महीने से 10 साल तक की जेल हो सकती है.