दिल्ली नगर निगम के आगामी वित्त वर्ष के बजट को लेकर निगम सदन में सियासत गरमा गई है. स्टेंडिंग कमेटी चेयरमैन सत्या शर्मा द्वारा पेश बजट पर एक ओर विपक्ष ने तीखा हमला बोला है तो वहीं सत्तापक्ष इसे ऐतिहासिक और विकासोन्मुखी बता रहा है. बजट ने निगम की राजनीति को दो साफ ध्रुवों में बांट दिया है.

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इंद्रप्रस्थ विकास पार्टी के नेता और वरिष्ठ निगम पार्षद मुकेश गोयल ने स्टैंडिंग कमेटी चेयरमैन के बजट को खोखले वादों का पुलिंदा करार दिया है. उन्होंने कहा कि आप ने बीते तीन वर्षों में एमसीडी को पीछे की ओर धकेलने का काम किया है. अब जो बजट पेश किया गया है, वह ‘खोदा पहाड़ निकली चुहिया’ जैसा है.

पार्षद फंड बढ़ा, लेकिन स्रोत पर सन्नाटा

मुकेश गोयल ने कहा कि बजट में पार्षद फंड को 1 करोड़ 55 लाख से बढ़ाकर 2 करोड़ रुपये करने की घोषणा तो कर दी गई है, लेकिन यह नहीं बताया गया कि यह अतिरिक्त राशि कहां से आएगी. उन्होंने स्पष्ट कहा कि बिना आय बढ़ाए किसी भी मद में खर्च संभव नहीं है. पिछले वित्त वर्ष में पार्षद फंड से केवल 25 लाख रुपये ही जारी किए गए, जबकि बड़ी राशि अब भी बकाया है. पहले पुराने फंड का भुगतान करने के बजाय नए फंड की घोषणा करना केवल दिखावा है.

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कच्चे कर्मचारियों के मुद्दे पर भी सवाल

कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने के मुद्दे पर मुकेश गोयल ने कहा कि एमसीडी में वर्ष 2016-17 के बाद कोई नई कच्ची भर्ती नहीं हुई है. यदि सत्ताधारी दल कर्मचारियों के हित में ईमानदार है तो सभी विभागों के कर्मचारियों को पक्का करने के लिए ठोस प्रस्ताव लाना चाहिए. बजट में इसके लिए कोई स्पष्ट बजटीय प्रावधान नहीं किया गया है. बिना फंड की व्यवस्था के कर्मचारियों को पक्का करना संभव नहीं है.

वन टाइम रिलेक्सेशन की मांग

उन्होंने कहा कि जो कर्मचारी भर्ती नियमों पर पूरी तरह खरे नहीं उतरते हैं. उनके लिए ‘वन टाइम रिलेक्सेशन’ की योजना लाई जानी चाहिए. ऐसा पहले भी किया जा चुका है. उन्होंने दो टूक कहा कि मौजूदा बजट प्रस्ताव अव्यवहारिक और खोखले हैं, जिन्हें जमीन पर उतारना नामुमकिन है.

MCD बजट पर नेता सदन की मुहर

दूसरी ओर, दिल्ली नगर निगम की स्थायी समिति की अध्यक्षा सत्या शर्मा द्वारा पेश बजट को सत्तापक्ष का पूरा समर्थन मिला है. नेता सदन प्रवेश वाही ने इसे जनता की अपेक्षाओं के अनुरूप और विकास को गति देने वाला बताया है.

आर्थिक मजबूती और पारदर्शिता का दावा

प्रवेश वाही ने कहा कि यह संभवतः एमसीडी का पहला लाभ वाला बजट है. संपत्ति कर संग्रह मजबूत करने, पार्किंग व्यवस्था के विस्तार, विज्ञापन नीति में पारदर्शिता और साप्ताहिक बाजारों के नियमितीकरण से निगम की आय बढ़ेगी.

पर्यावरण, शिक्षा और स्वास्थ्य पर फोकस

नेता सदन के अनुसार बजट में वायु प्रदूषण नियंत्रण, कचरा प्रबंधन और हरियाली बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया गया है. एमसीडी स्कूलों में स्मार्ट सुविधाएं और हर वार्ड में आयुष्मान आरोग्य मंदिर व स्वास्थ्य केंद्र खोलने के प्रस्ताव को उन्होंने अहम बताया.

कर्मचारियों और नागरिक सुविधाओं को प्राथमिकता

प्रवेश वाही ने कहा कि निगम कर्मचारियों के नियमितीकरण, पदोन्नति और नई भर्तियों पर भी फोकस किया गया है. महिला सुरक्षा, वरिष्ठ नागरिक कल्याण, सोलर ऊर्जा, ई-वाहन चार्जिंग स्टेशन और स्मार्ट सुविधाएं दिल्ली को आधुनिक शहर बनाने में सहायक होंगी.

बहरहाल, एमसीडी बजट को लेकर एक ओर जहां विपक्ष इसे खोखला और अव्यवहारिक बता रहा है. वहीं सत्तापक्ष इसे विकास और आत्मनिर्भरता का मजबूत दस्तावेज मान रहा है. अब असली परीक्षा बजट के क्रियान्वयन की होगी, जो तय करेगी कि यह घोषणाओं का पुलिंदा साबित होता है या दिल्ली को नई रफ्तार देने वाला रोडमैप है.

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