Malviya Nagar Fire: दिल्ली के मालवीय नगर में जहां हुआ अग्निकांड, वहां क्यों आते हैं विदेशी, कैसा है इलाका?
Malviya Nagar Hotel Fire: फ्लरिश स्टे नाम के इस होटल में ज्यादातर विदेशी नागरिक ठहरते थे. पास बने मैक्स अस्पताल में इलाज के दौरान मरीज और उनके तीमारदार कुछ दिन के लिए यहां पेइंग गेस्ट की तरह रहते थे.

दिल्ली के मालवीय नगर में लेमन ग्रीन नाम के रेस्टोरेंट में भड़की आग ने बिल्डिंग में मौजूद 21 लोगों को अपनी चपेट में ले लिया. बिल्डिंग में फ्लरिश स्टे नाम का होटल चल रहा था जो हौज रानी गांव स्थित संकरी गली में बना है. यहां लाइन से कई इमारत एक के बाद एक खड़ी हैं. इसे आम तौर पर 'मैच बॉक्स' बिल्डिंग या 'कंक्रीट जंगल' कहा जाता है यानी माचिस की डिब्बी जैसे बनी इमारतें जहां केवल आवाजाही का एक ही रास्ता होता है. अगर उस रास्ते पर ही आग लग जाए तो अंदर फंसे लोगों के लिए भागने का कोई जरिया नहीं बचता.
कुछ ऐसा ही हुआ इस इमारत में जहां लेमन ग्रीन रेस्टोरेंट और फ्लरिश स्टे होटल बने थे. होटल में कुल 47 लोग थे जिनमें से 21 की मौके पर ही मौत हो गई. वहीं, गंभीर रूप से घायल हुए कई लोगों को पास के मैक्स अस्पताल और फिर एम्स के बर्न यूनिट में भर्ती कराया गया है. इनमें से कई लोग या तो आग से बुरी तरह झुलस गए हैं या फिर इमारत से कूदने के बाद उनके हाथ-पैर टूट गए हैं.
फ्रैक्चर, लंग इंजरी, क्रिटिकल बर्न केस के मरीज
मैक्स अस्पताल की ओर से जानकारी दी गई थी कि हॉस्पिटल में 39 मरीज लाए गए थे, जिनमें से 18 की मौत हो चुकी थी. इनमें 8 महिला और 8 पुरुष शामिल हैं. 8 मरीज वेंटिलेटर पर हैं. पांच मरीज स्टेबल थे और उन्हें प्राथमिक इलाज के बाद डिसचार्ज कर दिया गया. अस्पताल लाए गए कई मरीजों को धुएं की वजह से फेफड़ों में इंजरी हुई है. बिल्डिंग से कूदने पर लोगों की हड्डियां भी टूटी हैं. किसी का हाथ टूटा किसी का पैर. इनमें से भी कई क्रिटिकल हैं. वहीं, 2-3 लोगों के गंभीर बर्न केस हैं.
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मैक्स अस्पताल के मरीजों के लिए ठहरने की जगह था यह होटल
बताया जा रहा है कि मैक्स अस्पताल के पास बने इस होटल में कुल 24 कमरे थे. यह प्रॉपर्टी मुख्य रूप से साकेत मैक्स हॉस्पिटल में आने वाले मरीजों और उनके तीमारदारों के लिए थी. लोग यहां अपनों के इलाज के दौरान ठहरते थे और इलाज पूरा होने पर लौट जाते थे. बांग्लादेश, अफ्रीका और भारत के आसपास अन्य देशों से इलाज के लिए आने वाले लोग भी यही रुकते थे. होटल में ठहरने के लिए मुख्य रूप से 3 प्रकार के कमरे बने थे- स्टैंडर्ड रूम, प्रीमियम ट्विन रूम और प्रीमियम ट्विन रूम विद किचन.
इन सभी कमरों में ज्यादातर विदेशी लोग ठहरे हुए थे. रेस्टोरेंट में लगी आग कम समय में पूरी बिल्डिंग में फैल गई और लोगों के पास भागने का रास्ता भी नहीं बचा. आग से जान बचाने के लिए लोगों को अपनी जान जोखिम में डालनी पड़ी. होटल के कमरों में बनी खिड़की के कांच तोड़े और दूसरी-तीसरी और चौथी मंजिलों से नीचे कूदना शुरू किया. फायर ब्रिगेड के पहुंचने से पहले स्थानीय लोगों ने होटल में फंसे लोगों को बचाने की पूरी कोशिश की. गद्दे की दुकान में रखे गद्दे सड़क पर बिछाए गए ताकि लोग ऊपर से कूदें तो उन्हें चोट कम लगे. हालांकि, इतनी ऊपर से कूदने पर चोट लगना लाजमी था.
किसी तरह होटल से बचकर निकले लोगों को आसपास के ही लोगों ने अस्पताल पहुंचाया, उन्हें सीपीआर देने की कोशिश की और इमारत से बाहर निकालने की भी कोशिश की. कुछ समय बाद फायर डिपार्टमेंट की टीम मौके पर पहुंची और रेस्क्यू ऑपरेशन की कमान अपने हाथ में ली.
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