राजधानी दिल्ली में घरेलू एलपीजी (LPG) गैस सिलेंडरों की उपलब्धता और वितरण व्यवस्था को लेकर जमीनी हकीकत और आधिकारिक दावों के बीच एक भारी अंतर देखने को मिल रहा है. दिल्ली के गांधी नगर स्थित 'इंडेन गैस सर्विस' पर सुबह से ही ग्राहकों की लंबी कतारें लगी हैं.

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एक तरफ गैस एजेंसी किसी भी तरह की शॉर्टेज (कमी) से साफ इनकार कर रही है, वहीं आम जनता घंटों लाइन में लगने के बावजूद खाली हाथ लौटने को मजबूर है.

'सिलेंडर की कमी नहीं, सर्वर डाउन है'

एजेंसी की काउंटर अटेंडेंट ज्योति ने गैस की किल्लत से इनकार करते हुए बताया, "हमारे पास सिलेंडर का पर्याप्त स्टॉक है. समस्या केवल सर्वर डाउन होने की वजह से आ रही है. सुबह 9:30 बजे से सिस्टम काम नहीं कर रहा है, जिसके कारण ग्राहकों के मोबाइल पर DAC (डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड) जनरेट होने में देरी हो रही है." उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन ग्राहकों के पास कोड है, उन्हें तुरंत गैस दी जा रही है.

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होम डिलीवरी फेल, रोजेदारों की बढ़ी परेशानी

एजेंसी के तकनीकी दावों के विपरीत, कतार में खड़े लोगों का दर्द कुछ और ही बयां कर रहा है. खासकर रमजान के इस पवित्र महीने में यह तकनीकी खामी बड़ी मुसीबत बन गई है: महिला ग्राहक नाज़िया और खातून ने बताया कि रमजान में सुबह सेहरी और शाम इफ्तार के लिए खाना बनाना जरूरी होता है. नाज़िया ने कहा, "मैंने 11 मार्च को बुकिंग की थी, लेकिन कोई घर पर डिलीवरी करने नहीं आया. अब रोजे की हालत में खुद सिलेंडर भरवाने आना पड़ रहा है." गैस न होने से कई परिवारों को बाहर से खाना मंगाना पड़ रहा है.

ग्राहक शिवा राठौर ने बताया कि उनकी 14 तारीख की बुकिंग थी, लेकिन गैस न आने पर उन्हें अपना काम छोड़कर लाइन में लगना पड़ा. एक बुजुर्ग ग्राहक ने अपनी पीड़ा जताते हुए कहा कि वे सोमवार से रोज एजेंसी के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन DAC नंबर आने के बाद भी हर बार उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ रहा है.

क्या है DAC का पेंच?

तेल कंपनियों के सख्त नियमों के अनुसार, LPG डिलीवरी के समय उपभोक्ता के रजिस्टर्ड मोबाइल पर एक DAC (Delivery Authentication Code) आता है. बिना इस कोड के सिलेंडर नहीं दिया जा सकता. इस तकनीकी प्रक्रिया और सर्वर की सुस्ती ने पूरी वितरण प्रणाली को धीमा कर दिया है.

त्योहार और रमजान के बीच बढ़ी घरेलू मांग और होम डिलीवरी सिस्टम के फेल होने से आम लोगों की मुश्किलें दोगुनी हो गई हैं. अगर स्थिति जल्द नहीं सुधरी, तो आने वाले दिनों में यह समस्या और भी गंभीर रूप ले सकती है.