Delhi High Court: दिल्ली हाई कोर्ट (Delhi High Court) ने धन की कमी का हवाला देकर नागरिकों को बुनियादी सुविधाएं देने की मूल जिम्मेदारी से भागने पर दिल्ली नगर निगम (MCD) से जवाब तलब किया. एक 80 वर्षीय महिला की अपील याचिका पर फैसला सुनाते हुए मुख्य न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा और न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद की पीठ ने कहा कि जल निकासी, नालियों का निर्माण और जलजमाव न होना सुनिश्चित करना एमसीडी का काम है. बेंच ने कहा कि आर्थिक तंगी का हवाला देकर बुनियादी सार्वजनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी से नहीं बचा जा सकता है.
एमसीडी कर्तव्यों का निर्वहन करने में विफलअदालत ने कहा एमसीडी की घोर लापरवाही के कारण 80 वर्षीय अपीलकर्ता लीला माथुर एक दशक से अधिक समय से न सिर्फ अदालत में न्याय की लंबी लड़ाई लड़ने को मजबूर हुई, बल्कि उन्हें अपनी संपत्ति के नुकसान होने के अलावा लंबे समय तक परेशान भी होना सहना पड़ा. बेंच ने कहा कि इन तथ्यों को देखते हुए अदालत अपीलकर्ता को दिए जाने वाले मुआवजा की धनराशि को तीन लाख से बढ़ाते हुए नौ लाख करती है. वहीं बेंच ने आगे कहा कि एमसीडी नागरिकों को यह तर्क नहीं दे सकती है कि तूफान के कारण नालियां बंद हैं और इसलिए एमसीडी कुछ भी नहीं कर सकती है. एमसीडी अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने में बुरी तरह विफल रही है क्योंकि उसने स्वीकार किया है कि एक के ऊपर एक सड़कें बनाने के कारण मकान के सामने सड़कों की ऊंचाई बढ़ गई है जो नहीं होनी चाहिए थी.
क्या है पूरा मामलालीला माथुर ने एक अप्रैल 2015 को सूचना का अधिकार (RTI) के तहत जानकारी मांगी क्या एमसीडी पुरानी सड़कों के ऊपर नई सड़कें बना सकती है, जिससे सड़क की सतह बढ़ जाए. इस पर पूर्वी दिल्ली नगर निगम ने 21 अप्रैल 2015 को अपने जवाब में कहा कि एमसीडी को सड़क की पिछली ऊंचाई के अनुसार सड़कों के स्तर को बनाए रखना होगा. साल 2010 में दाखिल याचिका पर तीन लाख रुपये का मुआवजा तय करने और जलजमाव की समस्या को दूर करने के लिए एक पंप देने के खिलाफ एकल पीठ के 12 फरवरी 2020 के निर्णय को लीला माथुर ने फरवरी 2020 चुनौती दी थी.
21 लाख रुपये के खर्च का दावा उन्होंने तीन लाख के बजाए 21 लाख रुपये के खर्च का दावा करते हुए मुआवजा बढ़ाने की मांग की थी. वहीं, एमसीडी ने भी क्रास अपील की थी. माथुर ने दलील दी थी कि बार-बार सड़क का निर्माण और मरम्मत करने के कारण सड़क से मकान ढाई फीट नीचे हो गया है और इसके बावजूद नगर निगम सड़क के स्तर को नीचे नहीं लाने पर अड़ा है.
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