अजमेर शरीफ दरगाह पर दिल्ली हाईकोर्ट का केंद्र को निर्देश, कहा- '3 महीने के अंदर...'
Delhi High Court: दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार को अजमेर शरीफ दरगाह कमेटी के सदस्यों की नियुक्ति तीन महीने में करने का आदेश दिया है, क्योंकि 2022 से कमेटी निष्क्रिय है.

दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि वह तीन महीने के अंदर अजमेर शरीफ दरगाह कमेटी के सदस्यों की नियुक्ति करे. यह कमेटी दरगाह के सभी कामकाज की देखरेख करती है लेकिन साल 2022 से यह कमेटी निष्क्रिय पड़ी है. दिल्ली हाई कोर्ट में जस्टिस सचिन दत्ता की बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि सरकार को जल्द से जल्द प्रक्रिया पूरी करनी चाहिए.
कोर्ट ने कहा प्रक्रिया को तेज किया जाए और संभव हो तो तीन महीने के भीतर नियुक्ति कर दी जाए. फिलहाल दरगाह से जुड़े फैसले नाजिम और असिस्टेंट नाजिम ले रहे हैं जिन्हें केंद्र सरकार ने नियुक्त किया है.
दिल्ली हाई कोर्ट में केंद्र सरकार ने सीसीटीवी को लेकर दी जानकारी
दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश वकील ने दलील देते हुए कहा कि दरगाह में CCTV कैमरे लगाए जा रहे हैं ताकि जेबकतरी, छेड़खानी और चोरी जैसी घटनाओं को रोका जा सके. उन्होंने साफ किया कि कैमरे दरगाह के गर्भगृह के अंदर नहीं होंगे..बल्कि सिर्फ प्रवेश मार्ग और सार्वजनिक जगहों पर लगाए जाएंगे.
दरगाह के खादिम सैयद मेहराज ने सीसीटीवी पर जताई थी आपत्ति
दिल्ली हाई कोर्ट में यह याचिका सैयद मेहराज नामक व्यक्ति ने लगाई है. वह दरगाह के खादिम में से हैं और उन्होंने दरगाह में CCTV कैमरे लगाए जाने पर आपत्ति जताई थी. साथ ही उन्होंने मांग की थी कि दरगाह प्रबंधन कमेटी को तुरंत बनाया जाए. क्योंकि मौजूदा व्यवस्था में वित्तीय गड़बड़ियां हो रही हैं जिससे दरगाह की छवि खराब हो रही है. याचिका में कहा गया था कि अजमेर शरीफ दरगाह में आने वाले दुनियाभर के श्रद्धालु दान देते हैं, और इस पैसे का सही उपयोग होना जरूरी है.
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