राजधानी दिल्ली के स्वास्थ्य विभाग में हुए कथित दवा और उपकरण खरीद घोटाले में एंटी करप्शन ब्रांच (ACB) ने बड़ी कार्रवाई की है. एजेंसी ने सरकारी खरीद प्रक्रिया में भारी गड़बड़ियां कर चुनिंदा कंपनियों को फायदा पहुंचाने के आरोप में केंद्रीय खरीद एजेंसी (CPA) के पूर्व प्रमुख डॉ. विनोद कुमार रंगा को गिरफ्तार कर लिया है. आरोप है कि इस घोटाले के कारण सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का भारी नुकसान हुआ है.

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टेंडर की शर्तों में हेरफेर, महंगे दामों पर हुई खरीद

ACB के मुताबिक, दिल्ली सरकार के डायरेक्टोरेट ऑफ विजिलेंस (Directorate of Vigilance) को स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी खरीद में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं की शिकायत मिली थी. जांच में सामने आया कि कुछ सरकारी अधिकारियों और निजी व्यक्तियों ने मिलकर एक गहरी साजिश रची. इसके तहत टेंडर की शर्तों और तकनीकी मानकों में इस तरह से हेरफेर किया गया कि वास्तविक और प्रतिस्पर्धी कंपनियां प्रक्रिया से बाहर हो जाएं और ठेके सिर्फ चुनिंदा फर्मों को ही मिलें.

आरोप है कि दवाइयों, सर्जिकल सामान, पोर्टेबल एक्स-रे मशीन, सी-आर्म रेडियोलॉजिकल उपकरण, एनेस्थीसिया वर्क स्टेशन, बेडशीट और लिनेन की खरीद बाजार मूल्य से कहीं अधिक कीमत पर की गई.

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गायब मिलीं घोटाले से जुड़ी अहम फाइलें

जांच के दौरान एसीबी के सामने एक और बेहद चौंकाने वाला तथ्य सामने आया. पोर्टेबल एक्स-रे मशीन, बेडशीट, रेडियोलॉजिकल उपकरण, एनेस्थीसिया वर्क स्टेशन, ओआरएस और दवाइयों की खरीद से जुड़ी कई अहम फाइलें जांच एजेंसी को उपलब्ध ही नहीं कराई गईं. आरोप है कि ये सभी महत्वपूर्ण फाइलें डॉ. विनोद कुमार रंगा की व्यक्तिगत निगरानी में थीं और साक्ष्यों को छिपाने के उद्देश्य से इन्हें गायब कर दिया गया.

जब एसीबी ने डॉ. रंगा से इन गायब फाइलों और मामले के अन्य पहलुओं को लेकर पूछताछ की, तो वे कोई भी संतोषजनक जवाब नहीं दे सके.

2 जून को दर्ज हुई थी FIR, अब 4 दिन की रिमांड

इन गंभीर आरोपों के आधार पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और आपराधिक साजिश की धाराओं के तहत 2 जून 2026 को एफआईआर (FIR) दर्ज की गई थी. इसके बाद एसीबी ने अपनी जांच तेज कर दी.

इस पूरे नेटवर्क, अन्य लाभार्थियों और धन के प्रवाह (Money Trail) का पता लगाने के लिए एजेंसी ने 18 जून को डॉ. विनोद कुमार रंगा को गिरफ्तार कर लिया. 19 जून को उन्हें अदालत में पेश किया गया, जहां से कोर्ट ने डॉ. रंगा को चार दिन की पुलिस हिरासत (Remand) में भेज दिया है. अब जांच एजेंसी इस कथित घोटाले में शामिल अन्य सरकारी अधिकारियों, निजी सप्लायरों और लाभार्थियों की भूमिका की गहराई से जांच कर रही है.

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