दिल्ली सरकार ने लोक निर्माण विभाग (PWD) के कामकाज में तेजी लाने और जवाबदेही तय करने के लिए एक बड़ा कदम उठाने की तैयारी कर ली है. जानकारी है कि दिल्ली PWD की स्वतंत्र इंजीनियरिंग कैडर बनाने के प्रस्ताव पर चर्चा अगली कैबिनेट बैठक में होगी.
जुलाई में हुई थी घोषणा
दरअसल, रेखा गुप्ता सरकार ने इस साल जुलाई में ही इस कदम की घोषणा कर दी थी. इसके बाद पीडब्ल्यूडी ने प्रस्ताव तैयार कर विभिन्न विभागों से अनुमोदन लेना शुरू किया. अब कैबिनेट नोट को मंजूरी मिलने का इंतजार है.
समिति बनाएगी रोडमैप
जानकारी के अनुसार, मंजूरी मिलने के बाद सरकार विशेषज्ञों और सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारियों की एक समिति गठित करेगी. यह समिति नए कैडर को लागू करने के लिए अध्ययन करेगी और रोडमैप तैयार करेगी. इसमें यह तय होगा कि सुधार लाने के लिए कौन-कौन से कदम उठाए जाएंगे और कौन से विकल्प सबसे बेहतर रहेंगे.
क्यों जरूरी है नया कैडर?
सरकार का मानना है कि दिल्ली में अभी तक इंजीनियरिंग कैडर का नियंत्रण केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (CPWD) के पास है. ऐसे में अक्सर अधिकारी बार-बार ट्रांसफर हो जाते हैं, जिससे दिल्ली सरकार के प्रति उनकी जवाबदेही कम हो जाती है. इसका असर परियोजनाओं पर पड़ता है.
अक्सर देखा गया है कि इस वजह से प्रोजेक्ट में देरी होती है, लागत बढ़ जाती है और काम की गुणवत्ता पर भी सवाल उठते हैं. नया कैडर बनने से दिल्ली सरकार को सीधे नियंत्रण और जवाबदेही सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी.
अधिकारियों को मिलेगा विकल्प
यदि कैबिनेट नोट पास हो जाता है, तो अभी दिल्ली पीडब्ल्यूडी में सेवाएं दे रहे सभी सीपीडब्ल्यूडी के प्रतिनियुक्त अधिकारी के पास दो विकल्प होंगे. पहला, वे अपने मूल कैडर यानी CPWD में वापस जा सकते हैं. दूसरा, वे नियमों और शर्तों के तहत स्थायी रूप से नए दिल्ली PWD इंजीनियरिंग कैडर का हिस्सा बन सकते हैं.
कैबिनेट की मंजूरी के बाद यह प्रस्ताव सड़क, परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के पास अंतिम स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा. उसके बाद ही दिल्ली का अपना स्वतंत्र इंजीनियरिंग कैडर आधिकारिक तौर पर अस्तित्व में आएगा.
सरकार को उम्मीद है कि इस कदम से दिल्ली की सड़क, पुल और अन्य सार्वजनिक अवसंरचना परियोजनाओं की रफ्तार तेज होगी और आम लोगों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी.