दिल्ली आबकारी नीति के मामले में कथित घोटाले के मामले में राउज एवेन्यू कोर्ट ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो यानी सीबीआई के केस में फैसला सुनाया. कोर्ट ने आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया समेत 23 को बरी किया है.

सीबीआई के मामले में कोर्ट के फैसले के बाद अब प्रवर्तन निदेशालय द्वारा दर्ज किए गए मनी लॉन्ड्रिंग केस का क्या होगा?

इस संदर्भ में एबीपी न्यूज़ संवाददाता ने वकील रमेश गुप्ता से बात की. उन्होंने बताया कि कानून यही कहता है कि जिस मूल केस के आधार पर ईडी ने अपना मामला दर्ज किया है, अगर मूल मामले में ही ट्रायल के दौरान कोर्ट आरोपियों को बरी करे तो ईडी का मामला स्वतः खत्म हो जाता है. वकील ने कहा कि अगर ट्रायल के दौरान मूल केस खत्म हो जाए तो ईडी का केस स्वतः खत्म हो जाता है.

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए वकील ने कहा कि किसी भी एजेंसी से अगर प्रिडिकेट ऑफेंस में एफआईआर दर्ज कर दें उसके बाद ईडी अपनी जांच शुरू कर सकती है. उसमें यह हो सकता है कि ईडी अन्य एजेंसियों से ज्यादा आरोपी बनाए क्योंकि वह मनी लॉन्ड्रिंग का हवाला दे सकेत है. इसी तरह सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि प्रिडिकेट ऑफेंस अगर ट्रायल या फाइनल स्टेज पर खत्म हो जाए तो ईडी का केस अपने आप खत्म हो जाएगा.

बता दें आबकारी नीति मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने 22 अगस्त 2022 को मामला दर्ज किया था.

इन सबके बीच दिल्ली AAP अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने कहा, 'ED एक ऐसी संस्था है जो व्हीलचेयर पर है. दिल्ली, पंजाब, गुड़गांव, हैदराबाद, मुंबई, बेंगलुरु में 600 जगहों पर छापेमारी की गई लेकिन कहीं से कोई बरामदगी नहीं हुई. सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा कि यह केस एक मिनट भी ट्रायल में नहीं टिकेगा लेकिन बेल नहीं दी. वहां ही साफ हो गया था कि CBI, ED के पास सबूत नहीं हैं, इसलिए आज इसे डिस्चार्ज किया गया, इसका मतलब है कि यह केस इस लायक भी नहीं है कि इसमें मुकदमा चल सके.'