दिल्ली के धौला कुआं में रविवार (14 सितंबर) को हुए दर्दनाक BMW हादसे ने एक खुशहाल परिवार को पलभर में उजाड़ दिया. हादसे में भारत सरकार के वित्त मंत्रालय में डिप्टी सेक्रेटरी नवजोत सिंह की मौत हो गई. आज (मंगलवार, 16 सितंबर) DDU अस्पताल में उनका पोस्टमार्टम हुआ है और मोर्चरी के बाहर गम और सन्नाटे का आलम है.
सबसे मार्मिक विडंबना यह है कि आज ही मृतक नवजोत सिंह के बेटे नूर का जन्मदिन है और इसी दिन पिता का अंतिम संस्कार होना है.
मोर्चरी में गम का माहौलडीडीयू अस्पताल की मोर्चरी में नवजोत के परिजन, रिश्तेदार और दोस्त मौजूद हैं. वहां का माहौल बेहद गमगीन है. नवजोत के करीबी मित्र ऋषभ ने रुंधे गले से कहा, “आज मैंने न सिर्फ अपना दोस्त खोया है, बल्कि अपना सबसे प्यारा भाई भी खो दिया.” उनकी बातें सुनकर हर किसी की आंखें नम हो गईं.
ऋषभ ने बताया कि वह और नवजोत सिंह पिछले 20 साल से दोस्त नहीं बल्कि भाई जैसे थे. वह साथ-साथ यात्राएं करते थे. चाहे पंचमढ़ी हो, नैनीताल, लैंसडाउन या मेघालय. नवजोत को घूमने का शौक था और वे हमेशा अपने दोस्तों को साथ लेकर जाते थे.
जन्मदिन पर पिता का गमसबसे दर्दनाक क्षण तब आया जब नवजोत सिंह के बेटे नूर का फोन ऋषभ के पास पहुंचा. उसने कहा कि उसके पापा का जन्मदिन का गिफ्ट सुबह ही डिलीवर हुआ है. ऋषभ ने बताया कि उनका दिल यह सोचकर पसीज गया कि उसी दिन बेटे को ‘हैप्पी बर्थडे’ कहने के बजाय पिता की अर्थी देखनी पड़ रही है.
पत्नी अस्पताल में, परिवार टूटाहादसे में नवजोत की पत्नी गंभीर रूप से घायल हैं और फिलहाल अस्पताल में भर्ती हैं. परिवार और रिश्तेदार दोहरी मार झेल रहे हैं. एक तरफ बेटे का जन्मदिन, दूसरी तरफ पति और पिता का अंतिम संस्कार. यह उनके लिए असहनीय समय है.
ऋषभ ने दुख जाहिर करते हुए कहा कि अगर नवजोत को तुरंत पास के अस्पताल ले जाया गया होता, तो शायद उनकी जान बच सकती थी. लेकिन न जाने किस सोच से उस महिला नर नवजोत को 20 किलोमीटर दूर एक छोटे से नर्सिंग होम में पहुंचा दिया, जिससे उनके जीवन को बचाने वाला बहुमूल्य समय बर्बाद हो गया.
इंसानियत से भरा जीवनउन्होंने कहा, नवजोत न सिर्फ अपने परिवार और दोस्तों के लिए बल्कि अपने सहकर्मियों के लिए भी एक संबल थे. उनके जूनियर्स कहते थे कि उन्हें एक बॉस नहीं बल्कि भाई जैसा इंसान मिला है. वे हर किसी के सुख-दुख में शामिल होते थे और हमेशा मदद के लिए तैयार रहते थे.