देश की राजधानी दिल्ली में राष्ट्रीय जनगणना अभियान का पहला चरण शनिवार से औपचारिक रूप से शुरू हो गया है. अगले 30 दिनों तक चलने वाले इस बड़े सर्वे अभियान के तहत 14 जून तक राजधानी के हर इलाके में घरों की गिनती और मकानों का विस्तृत रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा. प्रशासन इसे आने वाले वर्षों की सरकारी नीतियों और योजनाओं की बुनियाद मान रहा है.
दिल्ली में इस विशाल प्रशासनिक प्रक्रिया को तय समय में पूरा करने के लिए करीब 50 हजार सरकारी कर्मचारियों और प्रगणकों को मैदान में उतारा गया है. इन सभी को पहले विशेष प्रशिक्षण दिया गया है ताकि सर्वे के दौरान किसी तरह की परेशानी न हो. जनगणना टीम दिल्ली नगर निगम के अलग-अलग प्रशासनिक क्षेत्रों में जाकर लगभग 32 लाख मकानों का डेटा जुटाएगी. कर्मचारी घर-घर जाकर लोगों से जानकारी लेंगे और उसे आधिकारिक रिकॉर्ड में दर्ज करेंगे.
घरों से जुड़े 33 सवाल पूछे जाएंगे
इस सर्वे के दौरान नागरिकों से कुल 33 अहम सवाल पूछे जाएंगे. इनमें मकान, परिवार, सुविधाएं और संपत्ति से जुड़ी जानकारियां शामिल होंगी. अधिकारियों का कहना है कि लोगों द्वारा दी गई हर जानकारी को पूरी तरह गोपनीय रखा जाएगा. प्रशासन ने साफ किया है कि जनगणना प्रक्रिया में शामिल होना सभी नागरिकों के लिए जरूरी है. अगर कोई व्यक्ति सर्वे में सहयोग करने से मना करता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है.
पहचान पत्र और QR कोड से होगी कर्मचारियों की जांच
लोगों की सुरक्षा और भरोसे को ध्यान में रखते हुए सरकार ने सत्यापन की सुविधा भी दी है. नागरिक जनगणना कर्मचारियों और पर्यवेक्षकों का पहचान पत्र और नियुक्ति पत्र जांच सकते हैं. इसके अलावा पहचान पत्र पर मौजूद QR कोड स्कैन कर उनकी प्रामाणिकता भी पता की जा सकती है. जनगणना से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक पहले लोगों को समझाने की कोशिश की जाएगी, लेकिन लगातार मना करने पर सेंसस एक्ट 1948 की धारा 11 के तहत 1000 रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकता है. दोष सिद्ध होने पर तीन साल तक की सजा का भी प्रावधान मौजूद है.
ऑनलाइन स्वगणना को भी मिला अच्छा रिस्पॉन्स
इस बार सरकार ने लोगों को खुद अपनी जानकारी ऑनलाइन भरने यानी स्वगणना का विकल्प भी दिया है. आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, अब तक करीब 1 लाख 34 हजार लोग पोर्टल पर अपना पंजीकरण कर चुके हैं. हालांकि ऑनलाइन दर्ज की गई जानकारियों का बाद में जनगणना कर्मचारी सत्यापन भी करेंगे ताकि रिकॉर्ड पूरी तरह सही और प्रमाणिक रहे.
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घर-घर पहुंच रहीं टीचर्स, लोगों से मिल रहा सहयोग
जनगणना अभियान में बड़ी संख्या में सरकारी स्कूलों के शिक्षकों की भी ड्यूटी लगाई गई है. घर-घर जाकर सर्वे कर रहीं एक सरकारी स्कूल टीचर आरती मान ने एबीपी लाइव की टीम को बताया कि लोगों का अब तक काफी अच्छा सहयोग मिल रहा है और अधिकांश लोग आराम से अपनी जानकारी साझा कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को वही जानकारी रिकॉर्ड करनी पड़ती है जो परिवार के लोग बताते हैं, क्योंकि मौके पर यह पता लगाना संभव नहीं होता कि घर में वास्तव में कितने लोग रह रहे हैं. फिलहाल उन्हें गलत जानकारी मिलने जैसी कोई बड़ी समस्या सामने नहीं आई है.
छुट्टियां प्रभावित, लेकिन देश के काम का संतोष
आरती मान ने बताया कि इस बार लगभग हर स्कूल से शिक्षकों की ड्यूटी जनगणना में लगाई गई है. उनके स्कूल से भी 7-8 शिक्षकों को यह काम सौंपा गया है, जिनमें से किसी को 100 घर तो किसी को 77 घरों का जिम्मा मिला है और सभी को तय समय के भीतर अपना क्षेत्र पूरा करना है. उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत स्तर पर देखा जाए तो छुट्टियां जरूर प्रभावित हो रही हैं, लेकिन देश के लिए योगदान देने का मौका भी महत्वपूर्ण है. उन्होंने याद दिलाया कि जनगणना हर दस साल में होती है और कोविड महामारी की वजह से इसमें पहले ही काफी देरी हो चुकी है.
लोगों में BLO और जनगणना टीम को लेकर भी भ्रम
मैदानी स्तर पर काम कर रहे कर्मचारियों को लोगों की कई तरह की जिज्ञासाओं का सामना भी करना पड़ रहा है. आरती मान के मुताबिक कई लोग उन्हें BLO समझ लेते हैं और पूछते हैं कि कहीं उनका नाम वोटर लिस्ट से तो नहीं हट गया. ऐसे में उनको स्पष्ट करना पड़ता है कि वे केवल जनगणना के काम के लिए पहुंची हैं और उनका चुनावी सूची से कोई संबंध नहीं है.
पानी की समस्या सबसे ज्यादा सामने आ रही
जनगणना के दौरान लोगों की स्थानीय समस्याएं भी सामने निकलकर आ रही हैं. आरती मान ने बताया कि कई परिवार पानी की परेशानी को लेकर लगातार शिकायत कर रहे हैं, जबकि बिजली को लेकर अपेक्षाकृत कम शिकायतें सुनने को मिली हैं. उनका कहना है कि सरकार तक पहुंचने वाला यही डेटा आगे चलकर नई नीतियां बनाने में मदद करेगा. जनगणना का मकसद सिर्फ आबादी गिनना नहीं, बल्कि लोगों की जरूरतों को समझकर योजनाएं तैयार करना भी है.
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