किराए पर कमरा लिया, अडवांस भी दिया… लेकिन रहने कभी नहीं आया! डॉक्टर मुजम्मिल के मकान मालिक का खुलासा
Delhi Blast Update: डॉ. मुजम्मिल ने फरीदाबाद के धौज गांव में कमरा किराए पर लिया लेकिन 2 महीने में कभी रहने नहीं आया. मकान मालिक ने कहा उसने असली पहचान भी छुपाई, जिससे पूरे मामले पर संदेह गहरा गया है.

दिल्ली में हुए धमाके में लगातार नए खुलासे हो रहे हैं. अब फरीदाबाद के धौज गांव में किराए पर कमरा लेने आए डॉक्टर मुजम्मिल को लेकर बड़ा खुलासा सामने आया है. ताजा जानकारी के अनुसार, घर के मालिक ने बताया कि मुजम्मिल ने 2 महीने पहले कमरा किराए पर लिया लेकिन वह कभी वहां रहने नहीं आया. यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि कमरे में सिर्फ उसका सामान रखा मिला और उसने अपनी असली पहचान भी छुपाई थी.
किराए पर कमरा लेने की पूरी कहानी
मकान मालिक के अनुसार, दो महीने पहले डॉक्टर मुजम्मिल पहली मंजिल पर कमरा नंबर 15 देखने आया था और उसी दिन उसने इसे किराए पर ले लिया था. वह कमरे का पूरा निरीक्षण करके गया और तुरंत दो महीने का एडवांस किराया एक साथ दे दिया.
मकान मालिक ने जानकारी देते हुए बताया कि कमरे क किराया 1200 रुपए प्रति माह तय किया गया था जिसका एडवांस डॉक्टर मुजम्मिल ने 2 महीनों का एक साथ भुगतान किया था और ये कमरा था उनके मकान की पहली मंजिल, कमरा नंबर 15.
उन्होंने बताया कि पैसा मिलते ही उसने कमरे की चाबी सौंप दी थी और डॉक्टर मुजम्मिल ने दावा किया था कि वह तुरंत शिफ्ट होने वाला है, लेकिन इसके बाद वह दोबारा कभी दिखाई नहीं दिया.
रहस्यमय व्यवहार और छुपाई गई पहचान
मकान मालिक ने एबीपी न्यूज़ से एक्सक्लूसिव बातचीत में बताया कि मुजम्मिल ने जानबूझकर अपनी पहचान छुपाई थी. उसने न तो अपनी पूरी प्रोफाइल साझा की और न ही कोई दस्तावेज उपलब्ध कराए. पहली बार कमरे में सामान रखकर वह चला गया और उसके बाद कई हफ्तों तक उसके आने का इंतजार किया गया.
होते-होते एक समय ऐसा आया जब मालिक ने उसके कमरे की जांच की, लेकिन वहां सिर्फ सामान रखा मिला और कोई भी गतिविधि या आवाज़ नहीं सुनी गई. मंदराशी के शब्दों में, "उसे कमरे में रहने की कोई जल्दी नहीं थी, जैसे उसे सिर्फ जगह की जरूरत हो, न कि रहने की."
मामले पर बढ़ते सवाल और संदेह
डॉक्टर मुजम्मिल की रहस्यमय हरकतों से अब कई बड़े सवाल उठ रहे हैं. क्या उसने कमरा सिर्फ सामान रखने और ठिकाना बनाने के लिए लिया था? क्या उसने किसी मकसद से पहचान छुपाई? दो महीने का एडवांस किराया एक साथ देना भी संदेह बढ़ाता है क्योंकि आमतौर पर किराएदार ऐसा नहीं करते.
मकान मालिक के अनुसार, यदि उसकी मंशा सामान्य होती, तो वह कम से कम एक बार तो रहने आता या पहचान साझा करता. इस बीच, मकान मालिक ने स्थानीय स्तर पर जानकारी देना शुरू कर दिया है ताकि सच्चाई जल्द सामने आ सके. फिलहाल, गांव में चर्चा जारी है और लोग जानना चाहते हैं कि आखिर डॉक्टर मुजम्मिल कौन है और उसकी योजना क्या थी.
Source: IOCL




























