दिल्ली की हवा बेहद खराब, इस साल पहली बार 'गंभीर' श्रेणी में पहुंचा AQI
Delhi Pollution: दिल्ली की हवा गंभीर श्रेणी में पहुंची, AQI 428 दर्ज. प्रदूषण बढ़ने पर CM ने पांचवीं तक के स्कूल हाइब्रिड मोड में करने और ग्रेप के तीसरे चरण को सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए.

दिल्ली की हवा की गुणवत्ता मंगलवार (11 नवंबर) को पहली बार ‘गंभीर’ श्रेणी में पहुंच गई, जब औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 428 दर्ज किया गया. यह जानकारी केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) से मिली है.
एक्यूआई के आंकड़े आमतौर पर हर दिन शाम चार बजे तक अपडेट कर दिए जाते हैं, लेकिन यह कई घंटों की देरी से जारी हुआ. सोमवार (10 नवंबर) को सीपीसीबी का आंकड़ा रात 11 बजे के बाद अपडेट किया गया था. अधिकारियों ने इसका कोई कारण नहीं बताया.
राष्ट्रीय राजधानी की वायु गुणवत्ता पिछले कई दिनों से ‘बहुत खराब’ श्रेणी में थी और यह मंगलवार सुबह ‘गंभीर’ श्रेणी में दर्ज की गई, क्योंकि मौसम की स्थिर स्थिति और स्थानीय उत्सर्जन के कारण प्रदूषण के स्तर में वृद्धि हुई है.
दिसंबर 2024 में हुई थी वायु गुणवत्ता इतनी खराब
एक्यूआई के 'गंभीर' श्रेणी में जाना खतरनाक प्रदूषण स्तर को इंगित करता है जो गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा करता है, जो तंदुरुस्त व्यक्तियों को भी प्रभावित करता है. पहले से ही श्वसन या हृदय संबंधी बीमारियों से ग्रस्त लोगों को ऐसी स्थिति गंभीर रूप से प्रभावित करती है. इस साल पहली बार दिल्ली का एक्यूआई 'गंभीर' श्रेणी में पहुंचा है. सीपीसीबी के आंकड़ों के अनुसार, पिछली बार शहर की वायु गुणवत्ता इतनी खराब दिसंबर 2024 में हुई थी.
प्रदूषण के बिगड़ते स्तर के बीच, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने घोषणा की कि बच्चों के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए पांचवी कक्षा तक के स्कूल अस्थायी रूप से ‘हाइब्रिड मोड’ में (ऑनलाइन और ऑफलाइन) दोनों तरीके से संचालित होंगे.
तत्काल कार्रवाई का दिया आदेश
एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए गुप्ता ने चरणबद्ध प्रतिक्रिया कार्ययोजना (ग्रेप) के चरण तीन के सख्त प्रवर्तन का निर्देश दिया, प्रवर्तन दलों की संख्या बढ़ाकर 2,088 कर दी और प्रदूषण मानदंडों का उल्लंघन करने वाले निर्माण स्थलों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई का आदेश दिया.
उन्होंने एजेंसियों को खुले क्षेत्रों में धूल को नियंत्रित करने, 30 नवंबर तक 300 ‘मिस्ट-स्प्रे’ प्रणालियां लगाने, उचित अपशिष्ट निपटान सुनिश्चित करने और बायोमास जलाने पर रोक के निर्देश भी दिए.
सीएम गुप्ता ने कहा कि दिल्ली सरकार प्रदूषण संकट से पूरी गंभीरता और जवाबदेही के साथ 'मिशन मोड' में निपट रही है.
सीपीसीबी वर्गीकरण के अनुसार, एक्यूआई को शून्य से 50 के बीच ‘अच्छा’, 51 से 100 के बीच ‘संतोषजनक’, 101 से 200 के बीच ‘मध्यम’, 201 से 300 के बीच ‘खराब’, 301 से 400 के बीच ‘बहुत खराब’ और 401 से 500 के बीच ‘गंभीर’ माना जाता है.
वायु गुणवत्ता पूर्वानुमान के लिए ‘निर्णय समर्थन प्रणाली’ (डीएसएस) के अनुसार, मंगलवार (11 नवंबर) को दिल्ली के प्रदूषण में पराली जलाने का योगदान 6.5 प्रतिशत था, जबकि परिवहन क्षेत्र का योगदान लगभग 18.2 फीसदी था.
बुधवार (12 नवंबर) को पराली जलाने का योगदान 5.3 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जबकि परिवहन से संबंधित उत्सर्जन थोड़ा बढ़कर 18.9 प्रतिशत हो सकता है. उपग्रह आधारित आंकड़ों के अनुसार सोमवार को पंजाब में 133, हरियाणा में 30, उत्तर प्रदेश में 154 और दिल्ली में एक खेत में पराली जलाने की घटना हुई.
दिल्ली के लिए वायु गुणवत्ता प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली ने पूर्वानुमान जताया है कि शहर की वायु गुणवत्ता बुधवार (12 नवंबर) से 'बहुत खराब' श्रेणी में बनी रहेगी.
इस बीच, तापमान में गिरावट जारी रही और मंगलवार को न्यूनतम तापमान 10.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 4.1 डिग्री कम था. अधिकतम तापमान 27.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 1.8 डिग्री कम था. मौसम विभाग ने बुधवार को सुबह हल्का कोहरा छाए रहने तथा अधिकतम और न्यूनतम तापमान क्रमश: 27 और 11 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की संभावना जताई है.
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Source: IOCL
























