दिल्ली में लगातार खतरनाक स्तर पर पहुंच रहे वायु प्रदूषण और सरकारों की चुप्पी के बीच दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने संवाद का रास्ता अपनाया है. बीजेपी सरकारों पर प्रदूषण जैसे गंभीर मुद्दे से भागने का आरोप लगाते हुए कांग्रेस ने विशेषज्ञों और समाज के जागरूक वर्गों के साथ लोक संसद का आयोजन कर ठोस समाधान तलाशने की पहल की है. दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष देवेन्द्र यादव ने कहा कि बीजेपी की केंद्र सरकार ने संसद में विपक्ष को प्रदूषण पर विस्तृत चर्चा नहीं करने दी. इसी तरह दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी प्रदूषण के मुद्दे से पल्ला झाड़ते हुए न तो सर्वदलीय बैठक बुलाई और न ही विपक्ष के सुझावों पर ध्यान दिया. इसी कारण कांग्रेस ने वेस्टर्न कोर्ट, जनपथ के सभागार में संवाद से समाधान विषय पर लोक संसद का आयोजन किया.
सरकार और समाज के सामने रखा जाएगा सुझाव पत्र
पर्यावरणविदों ने बताए प्रदूषण के दुष्प्रभाव और समाधान
वायु लोक संसद में प्रदेश अध्यक्ष देवेन्द्र यादव के साथ पर्यावरणविद विमलेन्दु झा और डॉ. जितेन्द्र नागर ने दिल्ली में प्रदूषण के गंभीर दुष्प्रभावों पर चर्चा की. उन्होंने जनता के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव और प्रदूषण नियंत्रण के व्यावहारिक उपायों पर प्रकाश डालते हुए दिल्ली सरकार को कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए. वक्ताओं ने कहा कि स्वस्थ जीवन की जिम्मेदारी सरकार के साथ-साथ समाज की भी है.
बीजेपी सरकार पर समाधान में विफल रहने का आरोप
लोक संसद को संबोधित करते हुए यादव ने कहा कि संवाद से समाधान कार्यक्रम का उद्देश्य प्रदूषण जैसे ज्वलंत मुद्दे पर गंभीर चर्चा करना है. उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र और दिल्ली, दोनों जगह बीजेपी सरकारें खतरनाक प्रदूषण की समस्या का स्थायी और व्यवहारिक समाधान निकालने में विफल रही हैं. उन्होंने कहा कि संसद के शीतकालीन सत्र में भी प्रदूषण पर चर्चा की मांग को नकार दिया गया.
400 से 500 एक्यूआई के बीच जूझती दिल्ली
यादव ने कहा कि दिल्ली में प्रदूषण पर सर्वदलीय बैठक की मांग की गई थी ताकि विपक्ष भी समाधान के सुझाव दे सके, लेकिन मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया. जबकि दिल्ली के लोग लगातार 400 से 500 एक्यूआई तक पहुंच रहे खतरनाक प्रदूषण के कारण सांस की गंभीर समस्याओं से जूझ रहे हैं. उन्होंने बताया कि लोक संसद का आयोजन दिल्ली के बदहाल और ध्वस्त बुनियादी ढांचे पर ध्यान केंद्रित करते हुए किया गया. इसमें मौजूद सभी प्रतिभागियों ने प्रदूषण और राजधानी की अन्य ज्वलंत समस्याओं पर चिंता जताई, सवाल उठाए और अपने सुझाव दिए. लोक संसद में सभी को बराबरी से अपनी बात रखने का अवसर मिला.
सार्वजनिक परिवहन को फ्री करने का प्रस्ताव
देवेंद्र यादव ने दिल्ली में सभी सार्वजनिक परिवहन को फ्री करने का महत्वपूर्ण सुझाव दिया. उन्होंने लक्ज़मबर्ग, टेनिन और वाशिंगटन जैसे देशों और शहरों का उदाहरण देते हुए कहा कि वायु प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण वाहन प्रदूषण है, जो अब आपात स्थिति बन चुका है. लोगों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए सरकार को तुरंत यह नीति लागू करनी चाहिए.
IIT के आंकड़ों ने खोली प्रदूषण की सच्चाई
उन्होंने कहा कि आईआईटी द्वारा विकसित डिसीजन सपोर्ट सिस्टम के रियल-टाइम स्रोत विश्लेषण डेटा से स्पष्ट होता है कि दिल्ली के वायु प्रदूषण में वाहनों की हिस्सेदारी सबसे अधिक है. शीतकाल में दिल्ली के स्थानीय पीएम 2.5 प्रदूषण का 51 से 53 प्रतिशत हिस्सा वाहनों से आता है. वर्ष 2024 में स्थानीय प्रदूषण 27.3 प्रतिशत था, जो 2025 में बढ़कर लगभग 35 प्रतिशत हो गया है. वहीं एनसीआर जिलों से आने वाले प्रदूषण का योगदान 2023 के 36 प्रतिशत से घटकर 2025 में 25.8 प्रतिशत रह गया है.
निःशुल्क सार्वजनिक परिवहन को बताया अनिवार्य जरूरत
देवेंद्र यादव ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय अनुभव बताते हैं कि सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने से निजी वाहनों पर निर्भरता कम होती है और उत्सर्जन में कमी आती है. इससे सामाजिक समानता बढ़ती है और रोजगार व आवश्यक सेवाओं तक सभी वर्गों की पहुंच आसान होती है. उन्होंने कहा कि दिल्ली जैसे शहर में निःशुल्क या किफायती सार्वजनिक परिवहन कोई केवल कल्याणकारी योजना नहीं, बल्कि जन-स्वास्थ्य और जलवायु संरक्षण की अनिवार्य आवश्यकता है.