दिल्ली: न फोन, न किताबें, राजस्थान के गांव में ध्यान शिविर में मनीष सिसोदिया ने गुजारे 11 दिन, बताए फायदे?
Manish Sisodia News: मनीष सिसोदिया ने बताया कि वे पिछले 11 दिनों से राजस्थान में विपश्यना ध्यान शिविर में थे. उन्होंने बताया कि यह अनुभव उनके लिए बहुत ही शांति और आत्म-ज्ञान का स्रोत रहा.

Delhi News: दिल्ली में हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी को मिली हार के बाद मनीष सिसोदिया लोगों और सार्वजनिक कार्यक्रमों से दूरी बनाए हुए हैं. चुनाव परिणाम घोषित होने के कुछ दिन बाद वह अचानक गायब हो गए. अब उन्होंने बताया कि वह पिछले कुछ दिनों से राजस्थान के एक गांव में विपश्यना ध्यान शिविर में थे. सिसोदिया ने इन 10 दिनों के अपने अनुभव को भी सोशल मीडिया पर शेयर किया है. बता दें इन दिनों आप प्रमुख अरविंद केजरीवाल भी पंजाब के विपश्यना ध्यान शिविर में हैं.
मनीष सिसोदिया ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर ट्वीट कर कहा, "पिछले 11 दिन से राजस्थान के एक गांव में विपश्यना ध्यान शिविर में था. मौन, एकांत और अपने ही अंतर्मन का अवलोकन. फोन भी बंद था, बाहरी दुनिया से पूरी तरह कटा हुआ. आज सुबह ही शिविर पूरा हुआ. विपश्यना सिर्फ ध्यान नहीं, एक गहरी आध्यात्मिक यात्रा है. दिन में 12+ घंटे केवल अपनी सांसों को देखना, बिना किसी प्रतिक्रिया के बस अपने मन और शरीर को समझना. गौतम बुद्ध की वही सीख, चीजों को वैसे ही देखना, जैसी वे वास्तव में हैं, न कि जैसी हम उन्हें देखना चाहते हैं."
पिछले 11 दिन से राजस्थान के एक गाँव में विपश्यना ध्यान शिविर में था। मौन, एकांत, और अपने ही अंतर्मन का अवलोकन। फोन भी बंद था, बाहरी दुनिया से पूरी तरह कटा हुआ। आज सुबह ही शिविर पूरा हुआ।
— Manish Sisodia (@msisodia) March 8, 2025
विपश्यना सिर्फ ध्यान नहीं, एक गहरी आध्यात्मिक यात्रा है। दिन में 12+ घंटे केवल अपनी साँसों…
सिसोदिया ने बताया अपना अनुभव
उन्होंने कहा, "इस यात्रा में कोई संवाद नहीं. न फोन, न किताबें, न लेखन, न ही किसी से नजरों का सामना. पहले कुछ दिन दिमाग भागता है, बेचैन होता है, लेकिन धीरे-धीरे समय ठहरने लगता है. एक अजीब-सी शांति हर हलचल के बीच जन्म लेने लगती है. सबसे दिलचस्प बात यह लगी कि शिविर में 75% लोग 20-35 वर्ष की उम्र के थे. जब आखिरी दिन बातचीत की, तो पता चला कि सफलता की दौड़ थकान, उलझती जिंदगियां और भीतर की बेचैनी उन्हें इतनी कम उम्र में ही इस राह पर ले आई है."
मनीष सिसोदिया ने आगे बताया, "उनकी शिकायत थी कि जिस शिक्षा ने उन्हें सफलता की इस दौड़ के लायक बनाया है. उसमें इस थकान और इन उलझनों से निपटने का मंत्र भी सिखा दिया जाता तो हर पढ़े लिखे इंसान की ज़िंदगी कितनी खुशहाल भी हो सकती है. मुझे खुशी है कि दिल्ली का शिक्षा मंत्री रहते हुए स्कूलों मे हैप्पीनेस पाठ्यक्रम के तहत रोजना हर बच्चे के लिए #HappinessClass शुरू करा सका. यह शिक्षा के मानवीयकरण की दिशा में एक बड़ा कदम है जिसका जिक्र विपासना ध्यान में 10 दिन बिताने के बाद के बाद ये युवा कर रहे थे."
'नई ऊर्जा के साथ लौटूंगा दिल्ली'
उन्होंने कहा, "आज शाम तक दिल्ली लौटूंगा, नई ऊर्जा और नए जोश के साथ और संकल्प वही, देश के हर बच्चे को शानदार शिक्षा मिले. अच्छी शिक्षा हर बच्चे को न सिर्फ सफल बल्कि एक बेहतर इंसान बनाए. शिक्षा के मानवीयकरण का काम भी तो आगे बढ़ाना है और हां अगर जीवन में आपको भी कभी मौका मिले, तो 10 दिन का यह अनुभव जरूर लें. यह केवल चित्त की शांति का मार्ग नहीं, बल्कि स्वयं को जानने का एक दुर्लभ अवसर है."
Source: IOCL























