दिल्ली से बिना महरम 43 महिलाएं हज के लिए रवाना, उत्तर प्रदेश से हैं सबसे अधिक
Hajj Yatra: कौसर जहां ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार की पहल से समाज के हर वर्ग के लिए नई सुविधाएं विकसित हो रही हैं. यह महिला सशक्तिकरण का भी एक मजबूत उदाहरण है

- बिना महरम यात्रा से महिलाओं की धार्मिक स्वतंत्रता बढ़ी.
हज यात्रा शुरू हो चुकी है और इसके लिए व्यवस्था भी कर दी गी है ताकि लोगों को कोई परेशानी न हो. इसी क्रम में मंगलवार (21 अप्रैल) दोपहर 3 बजकर10 मिनट पर सऊदी एयरलाइंस की फ्लाइट एसवी-5909 के जरिए 43 महिलाएं बिना महरम हज यात्रा के लिए दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से मदीना के लिए रवाना हुईं. यह पहल न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बन गई, बल्कि महिलाओं की बढ़ती स्वतंत्रता को भी दर्शाती नजर आईं.
इस दौरान टर्मिनल-3 पर मौके को खास बनाने के लिए दिल्ली स्टेट हज कमेटी की चेयरपर्सन कौसर जहां, कार्यकारी अधिकारी अशफाक अहमद आरफी, उप-कार्यकारी अधिकारी मोहसिन अली और अन्य अधिकारियों ने सभी महिलाओं का स्वागत किया. यात्रियों को फूल भेंट कर सम्मानित किया गया और उन्हें शुभकामनाओं के साथ हज यात्रा के लिए रवाना किया गया.
महिला सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम
मीडिया से बातचीत करते हुए कौसर जहां ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार की पहल से समाज के हर वर्ग के लिए नई सुविधाएं विकसित हो रही हैं. उन्होंने कहा कि बिना महरम महिलाओं का हज पर जाना केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि महिला सशक्तिकरण का भी एक मजबूत उदाहरण है. इस उड़ान में 43 महिलाओं में से 12 दिल्ली से, 21 उत्तर प्रदेश से, 3 बिहार से, 4 जम्मू-कश्मीर से, 2 मध्यप्रदेश से और 2 उत्तराखंड से थीं.
18 अप्रैल से शुरू हुई हज उड़ानों की श्रृंखला की यह सातवीं उड़ान थी. अब तक कुल 2721 यात्री मदीना के लिए रवाना हो चुके हैं, जिनमें 1423 पुरुष और 1298 महिलाएं शामिल हैं. आगामी 20 मई तक सऊदी एयरलाइंस की 54 उड़ानों के जरिए उत्तर भारत के विभिन्न राज्यों के 21,100 से अधिक हज यात्री मदीना और जेद्दा के रास्ते मक्का के लिए रवाना होंगे. पहले चरण में 31 उड़ानों से 12,240 यात्री मदीना जाएंगे, जबकि दूसरे चरण में 23 उड़ानों के माध्यम से 8860 यात्री मक्का के लिए प्रस्थान करेंगे. दिल्ली से कुल 3196 हज यात्रियों के शामिल होने की संभावना है.
क्या है ‘बिना महरम’ यात्रा और क्यों है यह बदलाव अहम
बिना महरम यात्रा का मतलब उन मुस्लिम महिलाओं से है जो किसी पुरुष रिश्तेदार के साथ बिना हज या उमराह पर जाती हैं. महरम वह करीबी पुरुष रिश्तेदार होता है जिससे विवाह संभव नहीं होता, जैसे पिता, भाई या बेटा. पहले यह अनिवार्य था कि महिलाएं महरम के साथ ही यात्रा करें, लेकिन सऊदी अरब के नए नियमों के तहत अब महिलाएं समूह में बिना महरम भी यात्रा कर सकती हैं.
नए नियमों के तहत महिलाओं को सुरक्षित समूह में यात्रा की अनुमति दी गई है, जिससे उनकी धार्मिक यात्रा अधिक सहज हो गई है. इस बदलाव का उद्देश्य महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना और उनकी आस्था को व्यक्तिगत स्वतंत्रता के साथ जोड़ना है.

























