जंतर-मंतर पर फिर कॉकरोच जनता पार्टी का आंदोलन शुरू हो गया है. बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर पर जुटे हुए हैं. वहां भीड़ बढ़ती दिखी. प्रदर्शनकारी अपने समर्थन में नारेबाजी कर रहे हैं. सुरक्षा के मद्देनज़र इलाके में भारी पुलिस बल और अर्धसैनिक बल की तैनाती की गई. संसद मार्च के दौरान पुलिस कार्रवाई के कुछ घंटे बाद सोमवार (20 जुलाई) शाम तक जंतर-मंतर स्थित कॉकरोच जनता पार्टी का प्रदर्शन स्थल पूरी तरह खाली करा दिया गया था. प्रशासन ने मंच हटवा दिया, तंबू उखाड़ दिए और धरना स्थल पर लगे बैनर, पोस्टर, कालीन और अन्य सामान भी हटा दिया. लेकिन फिर से वहां पर सीजेपी ने मंच तैयार कर लिया. 

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शाम को पुलिस कार्रवाई के बाद जंतर-मंतर जाने वाले रास्ते दोनों ओर से बंद कर दिए गए. सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के अनशन और संबोधनों का केंद्र रहा मंच भी हटा दिया गया. इसके साथ ही काली तिरपाल, छात्र शिविर, तंबू, पोस्टर, बैनर, गद्दे और कालीन भी मौके से हटा दिए गए. पूरे इलाके में सुरक्षा बलों की तैनाती रही और किसी को धरना स्थल तक पहुंचने की अनुमति नहीं दी गई.

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200 मीटर दूर सड़क पर डटे रहे प्रदर्शनकारी

धरना स्थल हटने के बावजूद प्रदर्शन खत्म नहीं हुआ. जंतर-मंतर से करीब 200 मीटर दूर एक हजार से अधिक प्रदर्शनकारी सड़क पर बैठे रहे. मंच हटाए जाने के बाद उन्होंने लाउडस्पीकर लगे एक टेंपो को अस्थायी मंच बनाया और उसी से एक-दूसरे को संबोधित करते हुए नारेबाजी जारी रखी. कॉजपा के स्वयंसेवकों ने कहा कि वे फिर से मंच बनाएंगे.

वहीं, पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को बताया कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 के तहत जंतर-मंतर के अलावा किसी अन्य स्थान पर प्रदर्शन की अनुमति नहीं है.

लाठीचार्ज के बाद गुस्सा और बढ़ा

दिनभर की घटनाओं के बाद प्रदर्शनकारियों में अलग-अलग तरह की भावनाएं देखने को मिलीं. कुछ लोग इस बात से निराश थे कि उनकी मुख्य मांग पूरी नहीं हुई, जबकि कई लोगों ने कहा कि पुलिस कार्रवाई से उनका आंदोलन और मजबूत हुआ है. बांह पर पट्टी बांधे 25 वर्षीय प्रदर्शनकारी अनुष्का ने कहा, "हम धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग लेकर आए थे, लेकिन कुछ नहीं हुआ. हममें से कई लोगों पर लाठियां बरसाई गईं."

प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि संसद मार्च के दौरान पुलिस ने पहले रास्ते खोले और फिर अचानक बंद कर दिए. इसके बाद कई स्तर के बैरिकेड लगाकर उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया गया. प्रदर्शनकारी हेलेन (55) ने आरोप लगाया, "लोगों के सिर और हाथों पर लाठियां मारी गईं. बच्चे जमीन पर पड़े थे, फिर भी उन्हें पीटा गया."

प्रदर्शनकारियों का दावा है कि पुलिस कार्रवाई में 3 से 4 लोगों की हड्डियां टूटीं और कई अन्य घायल हुए. नोएडा की कॉजपा स्वयंसेवक मनु सिंह ने दावा किया कि उनके पैर की हड्डी टूट गई और हाथ में भी चोट आई है. कुछ लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि मेट्रो स्टेशन पर भीड़ अधिक होने के कारण उन्हें करीब 20 मिनट तक बाहर नहीं निकलने दिया गया.

पानी और इंटरनेट को लेकर भी लगाए आरोप

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि इलाके में पानी की आपूर्ति रोक दी गई थी और धरना स्थल तक पानी लाने की अनुमति भी नहीं दी जा रही थी. ऐसे में कुछ युवा स्वयंसेवक बाहर से पानी लाकर सभी में बांट रहे थे.

एक प्रदर्शनकारी ने कहा, "कुछ बच्चे दौड़कर पानी लाते थे और फिर सभी लोग उसी में से थोड़ा-थोड़ा पीते थे." इसके अलावा प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि इलाके में इंटरनेट जैमर लगाए गए थे, जिससे विरोध प्रदर्शन के दौरान संचार और सूचना तक पहुंच प्रभावित हुई.

कई प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अब आंदोलन समाप्त करना पिछले एक महीने की मेहनत को व्यर्थ कर देगा. एक प्रदर्शनकारी ने कहा, "अगर अब पीछे हटे तो फिर वहीं से शुरुआत करनी पड़ेगी. हम इतने मजबूत पहले कभी नहीं थे."

एक अन्य प्रदर्शनकारी ने कहा कि मंच दोबारा बनाया जा सकता है, लेकिन घायल लोगों का मनोबल वापस लाना आसान नहीं होगा. प्रदर्शनकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि संबोधन के दौरान वक्ताओं को रोका गया और माइक्रोफोन तोड़ दिए गए.

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एक महीने से चल रहा है आंदोलन

कॉकरोच जनता पार्टी ने 6 जून को जंतर-मंतर पर एक दिवसीय प्रदर्शन किया था. इसके बाद 20 जून से शुरू हुआ धरना लगातार 20 जुलाई तक जारी रहा. सोमवार को हजारों प्रदर्शनकारी परीक्षा में कथित अनियमितताओं पर जवाबदेही तय करने और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर संसद की ओर मार्च करने निकले थे. सुरक्षा बलों ने उन्हें रास्ते में रोक दिया, जिसके बाद झड़प हुई और भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज किया गया.

कॉकरोच जनता पार्टी ने दावा किया था कि केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा के साथ प्रतिनिधिमंडल की बातचीत के बाद उनकी एक प्रमुख मांग पर सहमति बनी है. हालांकि, प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट कर दिया कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तक उनका आंदोलन जारी रहेगा.