दिल्ली में बसों का नया रूट रेशनलाइजेशन आज यानी 21 जनवरी 2026 से लागू किया जाएगा. सरकार का कहना है कि इस फैसले का मुख्य उद्देश्य यात्रियों को बेहतर सुविधा देना, बसों की समयबद्धता सुधारना और लास्ट माइल कनेक्टिविटी यानी घर या कॉलोनी तक आसान तरीके से पहुंचना सुनिश्चित करना है.

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दिल्ली सरकार और दिल्ली परिवहन निगम (DTC) ने साफ किया है कि 15 साल पुराने DTC बस फ्लीट को चरणबद्ध तरीके से हटाया जरूर जाएगा, लेकिन इसके बावजूद एक भी बस रूट बंद नहीं किए जाएंगे. यात्रियों को किसी तरह की परेशानी न हो, इसका पूरा ध्यान रखा गया है. 

वेस्ट दिल्ली के 181 रूट्स पर सेवाएं होंगी बेहतर

रूट रेशनलाइजेशन के तहत वेस्ट दिल्ली के सभी 181 बस रूट्स पर सेवाएं और बेहतर की जाएंगी. अधिकारियों के मुताबिक, 12 मीटर लंबाई वाले किसी भी रूट को बंद नहीं किया गया है. यात्रियों की मांग, भीड़ और राइडरशिप पैटर्न को ध्यान में रखते हुए रूट्स का पुनर्गठन किया गया है, ताकि बसें खाली न चलें और जरूरत वाले इलाकों में ज्यादा सुविधा मिल सके.

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सरकार ने यह भी फैसला लिया है कि सुबह और शाम के पीक ऑवर्स में अतिरिक्त बसें चलाई जाएंगी, जिससे दफ्तर जाने वाले कर्मचारियों, छात्रों और रोजमर्रा के यात्रियों को राहत मिले. इसके साथ ही यूनिफाइड टाइम टेबल लागू किया जाएगा, ताकि यात्रियों को यह पता रहे कि बस कब आएगी और कब जाएगी.

सरकार 2026 में उतारेगी 7000 से अधिक इलेक्ट्रिक बसे 

दिल्ली सरकार लगातार प्रदूषण कम करने और पर्यावरण को सुरक्षित रखने की दिशा में काम कर रही है. इसी कड़ी में DTC के बेड़े में अब तक 3600 से ज्यादा इलेक्ट्रिक बसें शामिल की जा चुकी हैं. सरकार का लक्ष्य है कि मार्च 2026 तक 5000 से ज्यादा और नवंबर 2026 तक 7000 से अधिक इलेक्ट्रिक बसें सड़कों पर उतारी जाएं.

दिल्ली में हर दिन लाखों लोग DTC और क्लस्टर बसों से सफर करते हैं. बढ़ती आबादी, ट्रैफिक और प्रदूषण को देखते हुए सरकार सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करने पर जोर दे रही है. पिछले कुछ सालों में इलेक्ट्रिक बसों की संख्या बढ़ाई गई है और बस स्टॉप, टाइम टेबल व रूट मैनेजमेंट में सुधार भी किए गए हैं.

सरकार का कहना है कि रूट रेशनलाइजेशन से बसों की फ्रीक्वेंसी बढ़ेगी, सफर आसान होगा और लोगों को निजी वाहनों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा. इससे ट्रैफिक जाम और प्रदूषण दोनों में कमी आने की उम्मीद है. कुल मिलाकर, यह कदम दिल्ली के यात्रियों के लिए राहत भरा और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर उठाया गया फैसला माना जा रहा है.