'अमेरिका का एकध्रुवीय दौर...', BRICS समिट को लेकर कांग्रेस सांसद ने उठाए सवाल
BRICS समिट 2026 पर कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने 9/11 के बाद वैश्विक बदलाव, BRICS के सफर और अमेरिका के एकध्रुवीय दौर के अंत पर सवाल उठाए.

BRICS शिखर सम्मेलन 2026 को लेकर कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने वैश्विक राजनीति में हो रहे बदलावों और BRICS के बढ़ते प्रभाव पर अपनी बात रखी. उन्होंने BRICS के सफर को 9/11 के आतंकी हमलों के बाद दुनिया में आए बदलाव से जोड़ते हुए कई सवाल भी उठाए. तिवारी ने कहा कि नवंबर 2001 में गोल्डमैन सैक्स के अर्थशास्त्री जिम ओ'नील की एक रिपोर्ट सामने आई थी, जिसमें ब्राजील, रूस, भारत और चीन को दुनिया की उभरती अर्थव्यवस्थाओं के तौर पर बताया गया था.
मनीष तिवारी ने कहा, "9/11 ने दुनिया को एक से अधिक मायनों में फिर से परिभाषित किया. यह शायद एक संयोग है कि गोल्डमैन सैक्स के अर्थशास्त्री जिम ओ'नील द्वारा लिखी गई रिपोर्ट नवंबर 2001 में सामने आई, यानी 9/11 हमले के दो महीने बाद. इस रिपोर्ट में उन्होंने कहा था कि दुनिया की उभरती अर्थव्यवस्थाएं ब्राजील, रूस, भारत और चीन होंगी."
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मनमोहन सिंह, हू जिंताओ और पुतिन शुरुआती सूत्रधार
BRICS के शुरुआती दौर का जिक्र करते हुए तिवारी ने कहा, "इसके बाद घटनाक्रम जिस तरह आगे बढ़ा, उसमें प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह, चीन के राष्ट्रपति हू जिंताओ और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन BRICS के शुरुआती प्रमुख सूत्रधार थे. इसके बाद 2008 में आए वैश्विक आर्थिक संकट के बाद BRIC ने अपने लिए एक अलग पहचान और गति हासिल कर ली."
उन्होंने BRICS के अब तक के सफर पर कहा, "2009 में रूस के येकातेरिनबर्ग में हुए पहले शिखर सम्मेलन से लेकर अब दिल्ली में आयोजित हो रहे 18वें शिखर सम्मेलन तक BRICS ने निश्चित रूप से एक लंबा सफर तय किया है."
तिवारी ने BRICS के मौजूदा स्वरूप को लेकर भी सवाल उठाया. उन्होंने कहा, "हालांकि, अपने विस्तारित स्वरूप में BRICS वास्तव में ‘ग्लोबल साउथ’ का प्रतिनिधित्व करता है, ऐसा कहना पूरी तरह सही नहीं होगा. आखिर क्या चीन को वास्तव में ग्लोबल साउथ का हिस्सा कहा जा सकता है, जबकि वह करीब 20 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था है और औद्योगिक क्रांति की लगभग सभी अग्रणी तकनीकों में उसकी मजबूत स्थिति है. क्या सऊदी अरब या UAE को ग्लोबल साउथ का हिस्सा माना जाएगा?"
मुद्दों के आधार पर आगे बढ़ रहा BRICS- मनीष
कांग्रेस सांसद ने कहा कि BRICS अब अलग-अलग देशों के साझा हितों और मुद्दों पर चर्चा का बड़ा मंच बनता जा रहा है. उन्होंने कहा, "महत्वपूर्ण बात यह है कि BRICS एक ऐसा मंच बन गया है, जहां अलग-अलग मुद्दों के आधार पर देशों के बीच सहमति और साझा हित सामने आए हैं. दुनिया के कई देश महसूस करते हैं कि अंतरराष्ट्रीय वित्तीय व्यवस्था और वैश्विक शासन से जुड़ी संस्थाओं में सुधार की जरूरत है."
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उन्होंने आगे कहा, "इसके अलावा, चौथी औद्योगिक क्रांति की उभरती और अग्रणी तकनीकों के लिए सुरक्षा-सीमाएं यानी ‘गार्डरेल्स’ तय करने की जरूरत को लेकर भी चर्चा हो रही है. इसलिए BRICS अब ज्यादा एक मुद्दा-आधारित गठबंधन बनता जा रहा है. और मौजूदा समय में, जब दुनिया उथल-पुथल के दौर से गुजर रही है, तो इसे कोई बुरी बात नहीं कहा जा सकता."





















