'हमें साथ रहने दो', नेत्रहीन कपल के प्यार का रोड़ा बना परिवार, दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचे पीड़ित
Delhi News In Hindi: दिल्ली में नेत्रहीन प्रेमी ने अपनी साथी को परिवार से आजाद कराने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. अदालत ने युवती को पेश करने का आदेश दिया है.

दिल्ली से एक बेहद भावुक और इंसानी संवेदनाओं को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है. पूरी तरह से नेत्रहीन एक युवक ने अदालत से गुहार लगाई है कि उसकी प्रेमिका को उसके परिवार के चंगुल से आज़ाद कराया जाए. युवती भी 100 प्रतिशत दृष्टिहीन है. युवक का कहना है कि दोनों एक-दूसरे से प्रेम करते हैं और साथ रहना चाहते हैं, लेकिन अलग धर्म होने की वजह से परिवार इस रिश्ते का विरोध कर रहा है.
युवती के माता-पिता को नोटिस जारी
यह मामला दिल्ली हाई कोर्ट की जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रवींद्र डुडेजा की पीठ के सामने आया. अदालत ने इस मामले को गंभीर मानते हुए युवती के माता-पिता को नोटिस जारी किया है. साथ ही आदेश दिया गया है कि 18 अप्रैल 2026 को युवती को अदालत में पेश किया जाए, ताकि उसकी इच्छा जानी जा सके.
याचिकाकर्ता राम कृपाल नाम के युवक ने संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत अदालत में याचिका दाखिल की है. उसने अपने वकीलों के जरिए अदालत से अपील की है कि उसकी साथी को अदालत के सामने लाया जाए और उसे स्वतंत्र रूप से अपना फैसला लेने दिया जाए.
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याचिका में कहा गया है कि युवती बालिग है और उसे अपनी जिंदगी से जुड़े फैसले लेने का पूरा अधिकार है. दोनों आपसी सहमति से रिश्ते में थे और साथ रहने का फैसला कर चुके थे.
कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद
याचिका के अनुसार, युवती दिल्ली के रानी खेड़ा इलाके में एक छात्रावास में अकेले रह रही थी. 16 और 17 मार्च 2026 की रात को जब उसके परिवार को इस रिश्ते की जानकारी मिली, तो वे उसे वहां से अपने साथ ले गए.
इसके बाद से युवती को परिवार ने पूरी तरह अलग-थलग कर दिया. उसका मोबाइल फोन भी छीन लिया गया, जिससे वह किसी से संपर्क नहीं कर पा रही थी.
याचिका में यह भी बताया गया है कि 21 मार्च को युवती ने किसी दूसरे नंबर से युवक को फोन किया. उसने बताया कि उसे उसकी इच्छा के खिलाफ घर में रोका गया है और वह अपने प्रेमी के साथ रहना और शादी करना चाहती है.
युवक का आरोप है कि परिवार सिर्फ धर्म के आधार पर इस रिश्ते का विरोध कर रहा है. युवक हिंदू है, जबकि युवती मुस्लिम है. इसी वजह से परिवार इस संबंध को स्वीकार नहीं कर रहा.
पुलिस में शिकायत के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई
युवक ने 12 अप्रैल 2026 को पुलिस में भी शिकायत दर्ज कराई थी. लेकिन उसका कहना है कि पुलिस की तरफ से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया. इसके बाद मजबूर होकर उसे अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा.
फिलहाल यह मामला अदालत में विचाराधीन है और 18 अप्रैल की सुनवाई बेहद अहम मानी जा रही है. उस दिन युवती को अदालत में पेश किया जाएगा, जहां उसकी मर्जी और स्थिति साफ हो पाएगी.
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