राजधानी दिल्ली में सफर करने वालों के लिए आने वाले सालों में बड़ी राहत की तैयारी है. सराय काले खां और आनंद विहार ISBT को पूरी तरह से आधुनिक और मल्टी-मॉडल ट्रांजिट हब में बदलने की योजना बनाई गई है. इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट में यात्रियों की सुविधाओं के साथ-साथ कमर्शल और रिहायशी विकास को भी शामिल किया गया है, जिससे इन इलाकों की सूरत और उपयोग दोनों बदल जाएंगे.

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दिल्ली परिवहन विभाग ने इस प्रोजेक्ट को लंबी अवधि की जरूरतों के हिसाब से डिजाइन किया है. योजना में साल 2053 तक यात्रियों और बसों की बढ़ती संख्या को ध्यान में रखा गया है, ताकि भविष्य में किसी तरह की अव्यवस्था न हो.

आनंद विहार ISBT की क्षमता में होगा बड़ा इजाफा

योजना के मुताबिक, आनंद विहार ISBT की क्षमता धीरे-धीरे बढ़ाई जाएगी. जहां अभी बसों की संख्या सीमित है, वहीं आने वाले दशकों में यहां सैकड़ों बसों के संचालन की व्यवस्था होगी. इसके साथ ही यात्रियों के लिए बेहतर बोर्डिंग, पार्किंग और अलग-अलग बस बे की सुविधा भी तैयार की जाएगी.

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सराय काले खां ISBT भी बनेगा आधुनिक ट्रांजिट हब

सराय काले खां बस अड्डे का भी विस्तार किया जाएगा. वर्तमान क्षमता को कई गुना बढ़ाकर भविष्य की मांग के अनुरूप तैयार किया जाएगा. यहां भी इंटरस्टेट बसों के लिए अलग व्यवस्था और आधुनिक सुविधाओं पर जोर दिया जाएगा.

यात्रियों की संख्या में भारी बढ़ोतरी का अनुमान

अधिकारियों के अनुसार, आने वाले वर्षों में इन दोनों बस अड्डों पर यात्रियों की संख्या तेजी से बढ़ेगी. आनंद विहार में जहां रोजाना हजारों लोग आते हैं, वहीं भविष्य में यह आंकड़ा लाख के पार जा सकता है. सराय काले खां में भी यात्रियों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि की संभावना जताई गई है.

कॉमर्शियल और रिहायशी प्रोजेक्ट से बदलेगा पूरा इलाका

इस परियोजना में सिर्फ बस अड्डों का विस्तार ही नहीं, बल्कि आसपास के क्षेत्रों का समग्र विकास भी शामिल है. जमीन के बेहतर उपयोग के लिए यहां कमर्शल स्पेस और रिहायशी प्रोजेक्ट भी विकसित किए जाएंगे, जिससे आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी.

TOD मॉडल से जुड़ेगा मेट्रो-रेलवे और RRTS

सराय काले खां ISBT को ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट मॉडल के तहत विकसित किया जाएगा. इसका मकसद मेट्रो, रेलवे और रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम के बीच बेहतर कनेक्टिविटी सुनिश्चित करना है, ताकि यात्रियों को एक ही जगह से सभी सुविधाएं मिल सकें.

इस पूरे प्रोजेक्ट पर हजारों करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है. हालांकि, अभी अंतिम मंजूरी मिलना बाकी है. मंजूरी के बाद यह योजना दिल्ली के ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़ा बदलाव ला सकती है.

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