सत्य निकेतन हादसा: अब छात्रों से सीधा बात करेगा प्रशासन, सुनेंगे परेशानी
सत्य निकेतन की घटना के बाद LG तरनजीत सिंह संधू के निर्देश पर SHO और ACP छात्रों से सीधे संवाद करके ऐसे पीजी और आवासों की पहचान करेंगे जिनकी हालत जर्जर हो चुकी है. इसकी एक रिपोर्ट भी तैयार की जाएगी.

दिल्ली में पढ़ाई के लिए आने वाले हजारों छात्रों के सामने अब सिर्फ कॉलेज और करियर का सवाल नहीं है, बल्कि सुरक्षित ठिकाने का मुद्दा भी गंभीरता से सामने आ गया है. सत्य निकेतन की घटना के बाद PG, किराए के मकानों और दूसरे आवासों में रहने वाले छात्रों की सुरक्षा को लेकर पुलिस ने विशेष पहल शुरू की है. उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू
उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू के निर्देश पर SHO और ACP अब छात्रों से सीधे बातचीत कर उनके इलाके की समस्याओं और सुरक्षा संबंधी चिंताओं की जानकारी लेंगे. इसी बीच सत्य निकेतन से सटे मोची गांव की संकरी गलियों और जर्जर इमारतों ने भी छात्र आवास की मौजूदा स्थिति पर सवाल खड़े कर दिए हैं.
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सैकड़ों PG और गेस्ट हाउस ने बढ़ाई चिंता
सत्य निकेतन में MCD की कार्रवाई के दौरान इलाके की स्थिति को करीब से देखने पर आसपास के दूसरे छात्र आवासों की तस्वीर भी सामने आई. सत्य निकेतन से लगे मोची गांव में सैकड़ों PG और गेस्ट हाउस संचालित होने की बात सामने आई है, जहां हजारों छात्र रहते हैं. यहां कई इमारतें पुरानी और जर्जर बताई जा रही हैं, जबकि गांव की गलियां इतनी संकरी हैं कि किसी आपात स्थिति में राहत और बचाव दलों के लिए पहुंचना आसान नहीं होगा.
दोपहर में भी गलियों में पसरा था अंधेरा
इलाके में मौजूद वंदन कोठारी नाम के एक छात्र ने वहां की स्थिति को करीब से दिखाया. वह हादसे वाली जगह से लगभग 100 कदम दूर एक संकरी गली में लेकर गए. दोपहर का समय होने के बावजूद गली में अंधेरा था. रास्ता इतना संकरा था कि दो लोगों का एक साथ ठीक से निकलना भी मुश्किल था. गली में उस समय ज्यादा लोग नजर नहीं आ रहे थे. वंदन के मुताबिक, दिन के इस समय ज्यादातर छात्र कॉलेज या नौकरी के लिए बाहर रहते हैं.
'आसपास की कई इमारतों की हालत खराब'
वंदन ने सामने की एक इमारत की ओर इशारा करते हुए बताया कि वो खुद वहीं बने PG में रहते हैं. उनके मुताबिक इलाके की ज्यादातर इमारतों की स्थिति ठीक नहीं है. उन्होंने मोची गांव की हालत को इससे भी ज्यादा खराब बताया. इससे यह सवाल उठता है कि केवल हादसे वाली इमारत पर कार्रवाई से आसपास रहने वाले छात्रों की सुरक्षा का मुद्दा पूरी तरह खत्म होगा या नहीं.
अब छात्रों से सीधे पूछेगी दिल्ली पुलिस
इसी सुरक्षा चिंता के बीच दिल्ली पुलिस ने छात्रों तक सीधे पहुंचने की पहल की है. LG तरनजीत सिंह संधू के निर्देश पर सभी थानों के SHO और सब-डिविजन में तैनात ACP छात्रों से नियमित संवाद करेंगे. कॉलेज और यूनिवर्सिटी के अलावा उन इलाकों को भी इस कवायद में शामिल किया जाएगा, जहां बड़ी संख्या में छात्र PG या दूसरे किराए के आवासों में रहते हैं. पुलिस अधिकारी छात्रों से बातचीत के दौरान अपराध, उत्पीड़न, महिला सुरक्षा, रहने की जगह से जुड़े विवाद और दूसरी स्थानीय परेशानियों की जानकारी जुटाएंगे.
जिन मामलों पर स्थानीय पुलिस सीधे कार्रवाई कर सकती है, उनमें सुधारात्मक और एहतियाती कदम उठाए जाएंगे. यदि किसी समस्या के समाधान में MCD या किसी अन्य नागरिक एजेंसी की जरूरत होगी, तो पुलिस संबंधित विभाग के साथ तालमेल करेगी.
20 सितंबर तक देनी होगी कार्रवाई की रिपोर्ट
इस पहल को केवल बैठक या औपचारिक बातचीत तक सीमित नहीं रखने के निर्देश दिए गए हैं. अधिकारियों को छात्रों से संवाद के बाद किए गए काम की एक्शन टेकन रिपोर्ट 20 सितंबर तक जमा करनी होगी. पुलिस की कोशिश रहेगी कि छात्रों को यह भरोसा मिले कि जरूरत पड़ने पर वो स्थानीय पुलिस तक आसानी से पहुंच सकते हैं और उनकी शिकायतों पर कार्रवाई होगी.
LG के पुलिस को निर्देश
LG ने पुलिस को इस पहल को आउटरीच और कॉन्फिडेंस बिल्डिंग अभियान के रूप में प्रचारित करने के निर्देश भी दिए हैं. इसके लिए दिल्ली पुलिस के आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया जाएगा. हालांकि, प्रचार में उन्हीं गतिविधियों को शामिल करने पर जोर है, जिनमें पुलिस अधिकारियों ने वास्तव में छात्रों से बातचीत की हो और उनकी समस्याओं पर फॉलो-अप किया गया हो.
DUSU चुनाव के बीच छात्र संगठनों की सक्रियता बढ़ी
सत्य निकेतन की घटना को लेकर छात्रों का विरोध जारी है. वहीं, दिल्ली यूनिवर्सिटी में DUSU चुनाव की गतिविधियां भी तेज हो गई हैं. 18 सितंबर को होने वाले चुनाव के लिए प्रेसिडेंट, वाइस प्रेसिडेंट, सेक्रेटरी और जॉइंट सेक्रेटरी पदों के नामांकन पत्र 10 सितंबर को दोपहर 3 बजे तक नॉर्थ कैंपस स्थित चीफ इलेक्शन ऑफिसर के कार्यालय में जमा किए जाने हैं.
NSUI का मार्च, ABVP का PG संपर्क अभियान
नामांकन की अंतिम तारीख से एक दिन पहले NSUI ने नॉर्थ कैंपस में मार्च निकाला. ABVP ने PG में रहने वाले छात्रों से संपर्क अभियान चलाया. वहीं, AAP की छात्र इकाई ASAP ने सत्य निकेतन में जान गंवाने वाले छात्रों के परिवारों के प्रति संवेदना जताते हुए तालकटोरा स्टेडियम में प्रार्थना सभा और भजन का आयोजन किया.
छात्रों के हॉस्टल का सवाल अब हाई कोर्ट में
दिल्ली में सुरक्षित और किफायती छात्र आवास की कमी का मुद्दा दिल्ली हाई कोर्ट तक पहुंच गया है. कॉलेजों में छात्रों की संख्या के मुकाबले हॉस्टल की उपलब्धता को लेकर दायर जनहित याचिका पर हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार और दिल्ली यूनिवर्सिटी से जवाब मांगा है.
NSUI की याचिका पर 25 सितंबर को अगली सुनवाई
यह याचिका NSUI के प्रेसिडेंट विनोद जाखड़ ने दाखिल की है. याचिका 6 सितंबर को सत्य निकेतन में निजी PG की इमारत गिरने की घटना के बाद दायर की गई. चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की बेंच ने संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया है. मामले की अगली सुनवाई 25 सितंबर को होगी.
DU के 104 साल पुराने ढांचे पर भी उठाया सवाल
याचिका में कहा गया है कि दिल्ली यूनिवर्सिटी की स्थापना को 104 साल से अधिक समय बीत चुका है. इस अवधि में छात्रों की संख्या में काफी बढ़ोतरी हुई, लेकिन उनके रहने के लिए उपलब्ध रेजिडेंशियल इंफ्रास्ट्रक्चर उसी अनुपात में विकसित नहीं हुआ. हाई कोर्ट की बेंच ने इस याचिका को बिल्डिंग गिरने से जुड़े एक अन्य मामले के साथ जोड़ दिया है और याचिकाकर्ता को UGC को पक्षकार के रूप में हटाने का निर्देश दिया है.
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