मायावती को किसका डर? अभिषेक मनु सिंघवी के दावे से मची हलचल
मायावती की चुप्पी पर कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने बड़ा दावा किया है. उन्होंने एजेंसियों के दुरुपयोग और राजनीतिक दबाव का जिक्र करते हुए कहा कि मायावती के विरोध न करने की वजह भय हो सकती है.

कांग्रेस नेता और वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने बहुजन समाज पार्टी (BSP) प्रमुख मायावती को लेकर बड़ा दावा किया है. उन्होंने मोदी सरकार को लेकर देश में कथित तौर पर एजेंसियों के दुरुपयोग, विपक्ष में पैदा किए जा रहे डर और संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता को लेकर सवाल उठाए. अभिषेक मनु सिंघवी ने मायावती की चुप्पी को भी इसी डर से जोड़ते हुए अपनी बात रखी.
'15 साल से ED का हो रहा दुरुपयोग'
एबीपी को दिए इंटरव्यू में अभिषेक मनु सिंघवी ने जांच एजेंसियों के इस्तेमाल को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा, "आज अघोषित रूप से इमरजेंसी जैसा व्यवहार किया जा रहा है. 15 साल से ED का दुरुपयोग करके लोगों को जेल में डाल रहे हैं. जैसे ही कोई जोर से बोलता है, तो उसको डरा देते हैं. उसको कहते हैं कि हमारी पार्टी जॉइन करो, वॉशिंग मशीन में जाओ, नहीं तो हम ये कर देंगे. मायावती जी ऐसी चुप बैठी हैं? इसकी वजह भय है."
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कांग्रेस नेता ने आगे कहा, "वजह है एजेंसियों का दुरुपयोग. मायावती जी तो इसका बहुत छोटा उदाहरण हैं. निश्चित रूप से इसमें कोई दो राय हो सकती है. मायावती की इतनी बड़ी पार्टी है और इतने लंबे समय से वह शांत बैठी हैं. कब विरोध करती हैं? बीजेपी जॉइन तो नहीं किया उन्होंने लेकिन विरोध भी नहीं किया."
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सिंघवी ने विपक्षी दलों के अस्तित्व और लोकतांत्रिक व्यवस्था को लेकर भी अपनी बात रखी. उन्होंने कहा, "फितरत होती है, कांग्रेस और समाजवादी पार्टी जैसी पार्टियां अभी खड़ी हैं, तभी तो विपक्ष है, नहीं तो विपक्ष होगा ही नहीं.
उन्होंने मोदी सरकार पर हमला करते हुए कहा, "किस प्रकार से आपने इस देश में भय का एक वातावरण पैदा किया है. किस प्रकार से आपने हर संस्था को नष्ट किया है. ब्यूरोक्रेसी आज कहां स्वतंत्र है? जिसको आयरन स्टील कहा जाता है? इलेक्शन कमीशन, चुनाव आयोग, कहां स्वतंत्र है? आपने भय पैदा करने का प्रयास किया है."
'इमरजेंसी में मानव अधिकारों का हनन हुआ'
अभिषेक मनु सिंघवी ने इमरजेंसी का जिक्र करते हुए कहा, "इमरजेंसी में बहुत सारे मानव अधिकारों का हनन हुआ. मैं तो खुद साफ बोलता हूं कि इमरजेंसी बहुत से मामलों में संवैधानिक रूप से गलत मानी जा सकती है."
उन्होंने आगे कहा, "दो वर्ष का एक नियंत्रित संवैधानिक अपवाद था. आज आप इमरजेंसी से 10 गुना हर काम वही कर रहे हैं, बिना उस संवैधानिक सेफगार्ड के, बिना आपातकाल घोषित किए हुए. जैसे ही आप इमरजेंसी घोषित करेंगे, तो सारे संवैधानिक सेफगार्ड भी बीच में आ जाते हैं."
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न्यायपालिका को लेकर भी उठाए सवाल
सिंघवी ने न्यायपालिका को लेकर भी कहा, "न्यायपालिका में भी आपने भय डालने का प्रयास किया है. न्यायपालिका में भी बिल्कुल निश्चित रूप से भय डालने का काम किया है. कभी ट्रांसफर, कभी थ्रेट, कभी नियुक्ति रोकना, इससे क्या संदेश जाता है?"






















