देश में बढ़ती जनसंख्या के चलते शहरों के लिए नई नई चुनौतियां खड़ी हो रही हैं. बड़े-बड़े शहरों में तो हालत ये बन जाते हैं कि लोगों के रहने के घर मिलना मुश्किल हो जा रहा है. हाथ पैर मारने के बाद अगर घर मिल भी जा रहा है तो मूलभूत सुविधाओं के लिए परेशान होना पड़ता है. इसमें पीने का पानी, बिजली, साफ-सफाई, शुद्ध ऑक्सीजन और ट्रैफिक जाम से जिंदगी का सफर और कठिन हो जाता है.
देश के टॉप 10 रहने लायक शहर
दरअसल देश में केंद्रीय शहरी आवास मंत्रालय द्वारा एक लिविंग इंडेक्स रिपोर्ट जारी किया जाता है. इसमें रहने लायक शहरों का 27 बिंदुओं पर सर्वे होता है. इसमें शहरों का सर्वे के किया जाता है. सभी पैमाने पर खरा उतरने वाले टॉप 10 शहरों की लिस्ट जारी की जाती है. इसके साथ ही रहने लायक शहर को रैंक भी दिया जाता है. 2018 में केंद्रीय शहरी आवास मंत्रालय ने एक रिपोर्ट जारी किया था. इसके अनुसार देश के 111 बड़े शहरों का सर्वे गए और इसमें टॉप पर पुणे शहर आया, 2 - नवी मुंबई,3- ग्रेटर मुंबई, 4- तिरुपति,5 - चंडीगढ़, 6 - ठाणे, 7 - रायपुर, 8- इंदौर, 9- विजयवाड़ा और 10 वें नंबर पर भोपाल है.
2018 की रिपोर्ट में रायपुर देश में 7 वें स्थान पर
2018 की सर्वे रिपोर्ट के अनुसार छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर ने देशभर में रहने लायक टॉप 10 शहरों में से एक है. लिविंग इंडेक्स रिपोर्ट में देशभर में रायपुर को सातवें स्थान पर जगह मिली है.इसके लिए सर्वे टीम ने नागरिकों के लिए संस्थागत, सामाजिक और भौतिक परिस्थितियों के अनुकूल वातावरण को देखने के बाद पैमाने पर खरे उतरने वाले शहरों को लिविंग इंडेक्स में जगह दी है.
रायपुर में जनसंख्या बढ़ना एक बड़ी चुनौती
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर शहर में तेजी से जनसंख्या बढ़ती जा रहे है. रायपुर में 15 लाख से अधिक जनसंख्या ही गई है.इसके साथ सड़कों में लाखों की संख्या में गाडियां चलती है और अक्सर शहर में आना जाना एक कठिन काम हो जाता है. वहीं जनसंख्या बढ़ी तो शहर में गंदगी भी बढ़ती जा रही है, जगह - जगह कचरा दिखने लगा है. हालाकि शहर की साफ सफाई बेहतर प्रयास किया जा रहा है. इस लिए रायपुर शहर ने देशभर में अपना 7 वां स्थान बनाया है.लेकिन बड़ी चुनौती ये है कि रायपुर शहर अपने मौजूदा रैंक बरकरार रखना है.