Raipur News: पंजाब, उड़ीसा में राज्य सरकार ने अनियमित कर्मचारियों को परमानेंट करने का फैसला लिया है. राजस्थान की कांग्रेस सरकार भी संविदा कर्मियों को परमानेंट करने का ऐलान कर दिया है. अब छत्तीसगढ़ में भी नियमितीकरण को लेकर सुगबुगाहट तेज हो गई है. बताया जा रहा है कि इसके लिए शासन स्तर पर तैयारी शुरू हो गई है. यानी भूपेश बघेल सरकार अपने घोषणा पत्र के एक और वादे को पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ती हुई नजर आ रही है.

जल्दी होगा छत्तीसगढ़ में नियमितीकरणबताया जा रहा है कि सामान्य प्रशासन विभाग की तरफ से सभी विभागों से अनियमित और संविदा कर्मचारियों की जानकारी मांगी गई है. डेटा तैयार होने के बाद नियमितीकरण को लेकर राज्य सरकार फैसला ले सकती है. वहीं इस मामले में कांग्रेस पार्टी सरकार के फैसले को पुष्टि करते हुए बयान दे रही है. छत्तीसगढ़ कांग्रेस के संचार विभाग प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि कांग्रेस ने अपने जन घोषणा पत्र में जो वादे किए थे, उसमें से 90 फीसदी वादों को पूरा किया है. हमारी सरकार ने कर्मचारियों से वादा किया था कि कि अनियमित कर्मचारियों को नियमित करने की दिशा में ठोस प्रयास किया जा रहे हैं. उन्होंने आगे कहा कि विभिन्न विभागों से जानकारी मंगाई गई है. सरकार बहुत जल्दी इस संबंध में निर्णय लेगी. जो वादा किया गया है उसे पूरा किया जाएगा. 

कांग्रेस की घोषणा पत्र में शामिल है नियमितीकरणदरअसल छत्तीसगढ़ में कांग्रेस सरकार बनने के पहले कांग्रेस के नेताओं ने अनियमित कर्मचारियों को नियमित करने का वादा किया था. सरकार ने इस वादे को अपने घोषणा पत्र में भी शामिल किया था, लेकिन सत्ताभोग करने के चार साल बाद भी संविदा कर्मचारियों को नियमित नहीं किया गया है. चूंकि अब सामने चुनाव है इसलिए कर्मचारियों को नियमित करने की सुगबुगाहट भी तेज हो गयी है, हालांकि इस पर अंतिम फैसला राज्य सरकार को लेना है.

एक लाख से अधिक अनियमित कर्मचारी होने का दावाकर्मचारी संघ की तरफ से दावा किया जा रहा है कि राज्य में 1 लाख से अधिक अनियमित कर्मचारी है. कर्मचारी नेता विजय झा ने बताया कि 47 हजार स्कूल सफाई कर्मचारी हैं और 13 हजार रसोईया हैं. 16 हजार प्रेरक संघ के कर्मचारी और 12 हजार बिजली विभाग के संविदा कर्मचारी हैं. इसके अलावा सरकारी विभागों में चपरासी, ड्राइवर, कंप्यूटर ऑपरेटर जैसे पदों पर भी अनियमित  कर्मचारी हैं जिनको सरकारी खजाने से वेतन मिलता है. अगर इन सब को नियमित करेंगे तो अच्छी बात है, नहीं तो आने वाले समय में सरकार को अंजाम भुगतना पड़ सकता है.

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